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चिलचिलाती गर्मी में पानी को तरसे 350 परिवार, धरने पर बैठे
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अंबाला सिटी। लगातार बढ़ते तापमान के साथ पानी की खपत भी बढ़ जाती है। इसी कारण नारायणगढ़ के पास स्थित काला आंब वासी पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। शिकायतों के बाद भी जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो खफा लोग वीरवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचे। वहां लोगों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। लोग सुबह नौ बजे उपायुक्त कार्यालय पहुंचे और दोपहर डेढ़ बजे तक धरना जमाए रखा।
इसके बाद उपायुक्त विक्रम सिंह कार्यालय पहुंचे और लोगों ने शिकायत उनके समक्ष रखी। लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 350 परिवार हैं जो पिछले दो साल से पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। पहले उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को इस बारे में कई बार शिकायत दी। यहां तक कि जब प्रशासन ने ट्यूबवेल लगाने के लिए जमीन की कमी बताई तो उन्होंने जमीन भी उपलब्ध करवाई। इसके बावजूद अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। लोग टैंकर मंगवाकर पानी का इंतजाम करने में जुटे हुए हैं। जब कहीं भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी बात उपायुक्त के सामने रखी। इस दौरान उपायुक्त ने भी संबंधित अधिकारियों से बात करते हुए समस्या का हल करवाने का आश्वासन दिया।
काला आंब से पहुंचे लोगों से वहां मौजूद कर्मचारियों ने किसी अन्य अधिकारी से मुलाकात करने की बात कही, परंतु लोग उपायुक्त से मिलने की बात पर ही अड़े रहे। उनका कहना था कि वह पहले ही कई अन्य अधिकारियों को शिकायतें कर चुके हैं। किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी। अब जब तक उपायुक्त नहीं आते, वह वहीं शेड के नीचे धरने पर बैठे रहेंगे।
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कोई सुनने वाला नहीं
पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। कई बार शिकायतें कर चुुके हैं, परंतु हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। इस कारण उपायुक्त के समक्ष अपनी गुहार लगाने के लिए आए हैं।
- गीता दुआ।
चार दिन चलता है टैंकर
इतनी कमाई भी नहीं जितने रुपये पानी का टैंकर मंगवाने में लग जाते हैं। एक टैंकर मंगवाते हैं तो तीन से चार दिन ही चलता है, फिर मंगवाना पड़ता है। लंबे समय से यही स्थिति है।
- रंजीत कौर।
पानी की बड़ी समस्या
क्षेत्र में पानी की समस्या बहुत बड़ी है। इसके निदान के लिए हम उपायुक्त कार्यालय पहुंचे हैं। इससे पहले कई अधिकारियों को इस बारे में शिकायत कर चुके हैं पर कोई समाधान नहीं हुआ।
-बलविंद्र कौर।
गर्मी में खपत बढ़ी
गर्मी में वैसे ही पानी की खपत अधिक बढ़ जाती है। हम लोगों को पहले काफी दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा था, जब वह संभव नहीं हुआ तो मजबूरी में रुपये खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाते हैं।
- रेखा देवी
नहीं लगा ट्यूबवेल
प्रशासन कह रहा था कि उनके पास ट्यूबवेल के लिए जमीन नहीं है। सभी ने मिलकर ट्यूबवेल लगवाने के लिए जमीन भी उपलब्ध करवा दी है। इसके बावजूद अभी तक ट्यूबवेल नहीं लगा है।
- सावित्री।
पानी बना परेशानी
पानी की समस्या हमारे लिए बड़ी परेशानी बन गई है। इसके समाधान के लिए हम कई बार गुहार लगा चुके हैं। अब मजबूरी में इतने किलोमीटर दूर का सफर कर यहां आना पड़ा है।
- उषा देवी।
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इसके बाद उपायुक्त विक्रम सिंह कार्यालय पहुंचे और लोगों ने शिकायत उनके समक्ष रखी। लोगों ने बताया कि उनके क्षेत्र में करीब 350 परिवार हैं जो पिछले दो साल से पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। पहले उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को इस बारे में कई बार शिकायत दी। यहां तक कि जब प्रशासन ने ट्यूबवेल लगाने के लिए जमीन की कमी बताई तो उन्होंने जमीन भी उपलब्ध करवाई। इसके बावजूद अधिकारियों ने कोई संज्ञान नहीं लिया। लोग टैंकर मंगवाकर पानी का इंतजाम करने में जुटे हुए हैं। जब कहीं भी उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो उन्होंने अपनी बात उपायुक्त के सामने रखी। इस दौरान उपायुक्त ने भी संबंधित अधिकारियों से बात करते हुए समस्या का हल करवाने का आश्वासन दिया।
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काला आंब से पहुंचे लोगों से वहां मौजूद कर्मचारियों ने किसी अन्य अधिकारी से मुलाकात करने की बात कही, परंतु लोग उपायुक्त से मिलने की बात पर ही अड़े रहे। उनका कहना था कि वह पहले ही कई अन्य अधिकारियों को शिकायतें कर चुके हैं। किसी ने भी उनकी बात नहीं सुनी। अब जब तक उपायुक्त नहीं आते, वह वहीं शेड के नीचे धरने पर बैठे रहेंगे।
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कोई सुनने वाला नहीं
पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं। कई बार शिकायतें कर चुुके हैं, परंतु हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। इस कारण उपायुक्त के समक्ष अपनी गुहार लगाने के लिए आए हैं।
- गीता दुआ।
चार दिन चलता है टैंकर
इतनी कमाई भी नहीं जितने रुपये पानी का टैंकर मंगवाने में लग जाते हैं। एक टैंकर मंगवाते हैं तो तीन से चार दिन ही चलता है, फिर मंगवाना पड़ता है। लंबे समय से यही स्थिति है।
- रंजीत कौर।
पानी की बड़ी समस्या
क्षेत्र में पानी की समस्या बहुत बड़ी है। इसके निदान के लिए हम उपायुक्त कार्यालय पहुंचे हैं। इससे पहले कई अधिकारियों को इस बारे में शिकायत कर चुके हैं पर कोई समाधान नहीं हुआ।
-बलविंद्र कौर।
गर्मी में खपत बढ़ी
गर्मी में वैसे ही पानी की खपत अधिक बढ़ जाती है। हम लोगों को पहले काफी दूर से पानी भरकर लाना पड़ रहा था, जब वह संभव नहीं हुआ तो मजबूरी में रुपये खर्च कर पानी का टैंकर मंगवाते हैं।
- रेखा देवी
नहीं लगा ट्यूबवेल
प्रशासन कह रहा था कि उनके पास ट्यूबवेल के लिए जमीन नहीं है। सभी ने मिलकर ट्यूबवेल लगवाने के लिए जमीन भी उपलब्ध करवा दी है। इसके बावजूद अभी तक ट्यूबवेल नहीं लगा है।
- सावित्री।
पानी बना परेशानी
पानी की समस्या हमारे लिए बड़ी परेशानी बन गई है। इसके समाधान के लिए हम कई बार गुहार लगा चुके हैं। अब मजबूरी में इतने किलोमीटर दूर का सफर कर यहां आना पड़ा है।
- उषा देवी।