फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Ambala News ›   कैंसर से आंखों की रोशनी गई, आज देश को रोशन कर रहे %राम’

कैंसर से आंखों की रोशनी गई, आज देश को रोशन कर रहे %राम’

Sun, 02 Dec 2018 01:10 AM IST
Updated Sun, 02 Dec 2018 01:10 AM IST
विज्ञापन
कैंसर से आंखों की रोशनी गई, आज देश को रोशन कर रहे %राम’
फोटो नंबर------10
विज्ञापन

कैंसर से आंखों की रोशनी गई, आज देश को रोशन कर रहे ‘राम’
दो ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप और एशिया कप खेल चुके हैं सोनीपत के रामबीर सिंह
हरियाणा की टीम से अंबाला में रणजी खेलने पहुंचे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी से विशेष बातचीत
शनिवार को केरल के खिलाफ खेलते हुए बनाया नॉट आउट 104 रन, दो विकेट भी लिए
आलोक सिंह रघुवंशी
अंबाला कैंट। बीमारी इंसान के शरीर को तो तोड़ सकती है, लेकिन हौसलों को नहीं। ये बात अंतरराष्ट्रीय ब्लाइंड क्रिकेटर रामबीर सिंह पर सटीक बैठती है। दो साल की उम्र में ही आंखों में कैंसर होने के कारण रोशनी चली जाने के बाद भी वे अब सबकी आंखों का तारा बन गए हैं। वे अब तक भारत की तरफ से दो वर्ल्ड कप और एक एशिया कप में खेल चुके हैं और अभी भी आलराउंडर की भूमिका निभा रहे हैं।
सोनीपत के सैदपुर गांव के रहने वाले 22 वर्षीय रामबीर सिंह जोकि 60 फीसदी तक ब्लाइंड हैं, वह अंबाला में दृष्टिहीनों के हो रहे रणजी मैच में हरियाणा की तरफ से खेल रहे हैं। शनिवार को भी केरल के खिलाफ खेलते हुए उन्होंने नाबाद 104 रन बनाकर और गेंदबाजी में दो विकेट झटककर हरियाणा को जीत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्हें मैन ऑफ द मैच का अवार्ड भी मिला। विशेष बातचीत में उन्होंने बताया कि वर्ष 1998 में दो साल की उम्र में उनकी आंखों में कैंसर हो गया था। इसके बाद परिजनों ने पीजीआई रोहतक में भर्ती कराया। इलाज के दौरान डॉक्टरों ने कैंसर को जड़ से समाप्त करने के लिए उनकी आंखों की रेटिना को निकाल दिया। इसके बाद उन्हें मालूम हुआ कि वे अब कभी देख नहीं सकते। एक बार तो हिम्मत टूट गई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। आर्थिक स्थिति सही नहीं होने पर परिजनों ने वर्ष 2004 में उनका दाखिला ब्लाइंड स्कूल दिल्ली में करवा दिया। इसके बाद उन्होंने मुड़कर नहीं देखा। ब्लाइंड बच्चों को क्रिकेट खेलते सुना तो उनका भी हौसला जागा और स्कूल की तरफ से वर्ष 2009 में क्रिकेट खेलना शुरू किया। उनके प्रदर्शन को देखते हुए वर्ष 2012 में उनका चयन स्टेट लेवल पर हो गया। उन्होंने बताया कि दिन-रात मेहनत की बदौलत और स्टेट स्तर पर शानदार प्रदर्शन के कारण उनका चयन टीम इंडिया में हो गया। उन्होंने भारत की तरफ से वर्ष 2015 में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच श्रीलंका के खिलाफ खेला।
विज्ञापन

------------
वर्ल्ड कप के फाइनल में दिलाई थी जीत
रामबीर ने बताया कि वह वर्ष 2016 में एशिया कप, वर्ष 2017 में टी-20 वर्ल्ड कप और वर्ष 2018 में वर्ल्ड कप खेल चुके हैं। दुबई में हुए वर्ल्ड कप के फाइनल में पाकिस्तान के खिलाफ उन्होंने आठ ओवर में एक मेडन रखते हुए 14 रन देकर दो विकेट लिए, जोकि निर्णायक साबित हुई। वे अब तक 35 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

------------
किसान हैं रामबीर के पिता
दिल्ली यूनिवर्सिटी में बीए फाइनल ईयर के विद्यार्थी रामबीर ने बताया कि घर में उनके अलावा पिता, दो बहनें और एक छोटा भाई है। पिता कर्ण सिंह खेतीबाड़ी करके जीवन यापन करते हैं। उनकी आर्थिक हालत ठीक नहीं है। प्रदेश सरकार की तरफ से भी कोई नौकरी व रुपये नहीं मिले हैं। उनकी माता का सात साल पहले ही निधन हो गया था।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed