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रक्षा मंत्रालय की स्टे से सेना क्षेत्र के हजारों लोगों को जगी आस
Updated Sat, 25 Aug 2018 01:21 AM IST
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रक्षा मंत्रालय की स्टे से सेना क्षेत्र के हजारों लोगों को जगी आस
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सैन्य क्षेत्र में दशकों से लीज प्रॉपर्टी पर बसे हजारों परिवारों को अब रक्षा मंत्रालय का स्टे मिल गया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज द्वारा लोगों को इस क्षेत्र से न हटाने के आवेदन पर अपनी मोहर लगा दी है। मंत्री विज को प्रेषित किए गए पत्र में रक्षा मंत्री ने इसकी जानकारी दी है। यह जानकारी जैसे ही स्थानीय निवासियों को मिली तो उनमें खुशी की लहर थी। अब तक इन लोगों को सेना एवं कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा विभिन्न नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा था। अंग्रेजी हुकूमत के समय से बसे परिवार केवल अपना अधिकार मांग रहे थे जिस पर अब रक्षा मंत्रालय ने उन्हें कुछ राहत प्रदान कर दी है।
सैन्य क्षेत्र में 176.87 एकड़ जमीन अंग्रेजी हुकूमत के समय लोगों को सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लीज पर प्रदान की गई थी। यहां पर लोग सब्जियां, फसल, फल और फूल आदि उगाकर सेना को सप्लाई करते थे। आजादी के बाद यह परिवार यहीं बस गए और आज तक इन परिवारों की आय का मुख्य साधन यही खेती है। लीज अवधि मई 1975 में समाप्त हो गई थी और तभी से कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा लोगों को जमीन खाली करने के नोटिस भेजे जाने लगे थे। इसको लेकर कई मामले अब भी अदालतों में विचाराधीन हैं। लीज की जमीन होने की वजह से यहां छोटे मकानों में बसे लोगों को नई कंट्रक्शन करने तक का अधिकार नहीं है। कई बार बोर्ड एवं सेना ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर यहां अवैध निर्माण गिराए और जगहों को खाली भी कराया। यहां पर कब्जों का हवाला देते हुए पेयजल एवं अन्य सुविधाएं भी सेना द्वारा उपलब्ध नहीं करवाई जाती थीं।
मंत्री विज से लगाई थी गुहार
तोपखाना परेड, माली परेड, गुलाब मंडल व दुधला मंडी क्षेत्र के लोगों ने कुछ समय पहले मंत्री अनिल विज से गुहार लगाई थी। उनकी मांग थी कि उन्हें उजाड़ने से रोका जाए, जिस जमीन पर बसे हैं उसका मालिकाना हक दिया जाए, साथ ही उन्हें रोजगार चलाने के लिए खेती की जमीन लीज पर रिन्यू करके दी जाए। लोगों की इस मांग को विज ने रक्षा मंत्रालय के समक्ष पहुंचाया था और विज ने स्वयं रक्षा मंत्री से इस संबंध में कई बार चर्चा तक की थी। इसी को लेकर अब रक्षा मंत्री द्वारा प्रशासनिक स्तर पर स्टे प्रदान कर दिया है। आगामी आदेशों तक अब यहां पर लोगों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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बीते वर्ष काट दी थी यहां के निवासियों की वोट
बता दें कि बीते वर्ष कैंटोनमेंट बोर्ड ने हजारों निवासियों की वोट काट दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर यह कार्रवाई की गई थी। अंबाला में तोपखाना परेड क्षेत्र में 1843 में अंग्रेजों ने लोगों को खेतीबाड़ी करने के लिए बसाया था। यहां पर कानपुर, इटावा, मेरठ एवं हरदोई आदि जगहों से किसानों को लाया गया था। करीब 200 एकड़ जमीन पर सेना की जरूरतों के लिए खेतीबाड़ी की जाती थी।
इतनी वोट क्षेत्रों में
कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन आने वाले इन क्षेत्रों में तोपखाना परेड के अलावा, दुधला मंडी, गुलाब मंडी, रिसाला बाजार, शहजादा मंडी आदि क्षेत्र शामिल हैं। यहां पर कुल 5300 से ज्यादा वोट हैं और अकेले तोपखाना परेड में 3200 से अधिक वोट हैं।
सूरजभान ने किए थे प्रयास, अब कोई साथ नहीं
तोपखाना परेड में 80 प्रतिशत तक आबादी एससी-बीसी वर्ग से है। पूर्व में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे चौ. सूरजभान ने रक्षा मंत्रालय से पत्राचार कर यहां निवासियों की मदद के प्रयास किए थे। मगर, उनकी मृत्यु के बाद कोई आगे नहीं आया था। अब मंत्री विज के प्रयासों से लोगों में उम्मीद की किरण जगी है।
कोट्स
लोगों की मांग को रक्षा मंत्रालय पहुंचाया गया था और इस मसले को लेकर रक्षा मंत्री से बातचीत भी हुई थी। लोगों को अब सेना द्वारा बेघर नहीं किया जाएगा, उन्हें स्टे प्रदान किया गया है। हजारों निवासियों को इसका लाभ होगा।
-अनिल विज, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री।
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मंत्री अनिल विज के प्रयासों से यह संभव हो सका है। सेना यहां के निवासियों को बाहर करना चाहती थी, मगर मंत्री ने सकारात्मक तौर पर लोगों की बात रखी जिसका बेहतर परिणाम सामने आया है।
-अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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तोपखाना परेड के हजारों निवासी मूलभूत सुविधाओं से इसलिए वंचित हैं क्योंकि उन्हें हमेशा यही कहा जाता है कि वह अवैध तौर पर बैठे हैं। उन्हें यहां से उजाड़ा जा रहा था, मगर मंत्री विज ने प्रयास कर हजारों लोगों को बसाने का काम किया और जल्द क्षेत्र के लोग मंत्री से मिलकर उनका आभार जताएंगे।
-लक्ष्मी देवी, पार्षद, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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अर्से से लोग अपने मालिकाना हक को लेकर संघर्षरत हैं और रक्षा मंत्रालय के आदेशों के बाद लोगों को यहां रहने का हक मिला है। जल्द इसका जश्न मनाया जाएगा और मंत्री का आभार जताया जाएगा।
-ललित कुमार, पूर्व पार्षद, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। सैन्य क्षेत्र में दशकों से लीज प्रॉपर्टी पर बसे हजारों परिवारों को अब रक्षा मंत्रालय का स्टे मिल गया है। रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज द्वारा लोगों को इस क्षेत्र से न हटाने के आवेदन पर अपनी मोहर लगा दी है। मंत्री विज को प्रेषित किए गए पत्र में रक्षा मंत्री ने इसकी जानकारी दी है। यह जानकारी जैसे ही स्थानीय निवासियों को मिली तो उनमें खुशी की लहर थी। अब तक इन लोगों को सेना एवं कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा विभिन्न नोटिस भेजकर परेशान किया जा रहा था। अंग्रेजी हुकूमत के समय से बसे परिवार केवल अपना अधिकार मांग रहे थे जिस पर अब रक्षा मंत्रालय ने उन्हें कुछ राहत प्रदान कर दी है।
सैन्य क्षेत्र में 176.87 एकड़ जमीन अंग्रेजी हुकूमत के समय लोगों को सैन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए लीज पर प्रदान की गई थी। यहां पर लोग सब्जियां, फसल, फल और फूल आदि उगाकर सेना को सप्लाई करते थे। आजादी के बाद यह परिवार यहीं बस गए और आज तक इन परिवारों की आय का मुख्य साधन यही खेती है। लीज अवधि मई 1975 में समाप्त हो गई थी और तभी से कैंटोनमेंट बोर्ड द्वारा लोगों को जमीन खाली करने के नोटिस भेजे जाने लगे थे। इसको लेकर कई मामले अब भी अदालतों में विचाराधीन हैं। लीज की जमीन होने की वजह से यहां छोटे मकानों में बसे लोगों को नई कंट्रक्शन करने तक का अधिकार नहीं है। कई बार बोर्ड एवं सेना ने अतिक्रमण विरोधी अभियान चलाकर यहां अवैध निर्माण गिराए और जगहों को खाली भी कराया। यहां पर कब्जों का हवाला देते हुए पेयजल एवं अन्य सुविधाएं भी सेना द्वारा उपलब्ध नहीं करवाई जाती थीं।
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मंत्री विज से लगाई थी गुहार
तोपखाना परेड, माली परेड, गुलाब मंडल व दुधला मंडी क्षेत्र के लोगों ने कुछ समय पहले मंत्री अनिल विज से गुहार लगाई थी। उनकी मांग थी कि उन्हें उजाड़ने से रोका जाए, जिस जमीन पर बसे हैं उसका मालिकाना हक दिया जाए, साथ ही उन्हें रोजगार चलाने के लिए खेती की जमीन लीज पर रिन्यू करके दी जाए। लोगों की इस मांग को विज ने रक्षा मंत्रालय के समक्ष पहुंचाया था और विज ने स्वयं रक्षा मंत्री से इस संबंध में कई बार चर्चा तक की थी। इसी को लेकर अब रक्षा मंत्री द्वारा प्रशासनिक स्तर पर स्टे प्रदान कर दिया है। आगामी आदेशों तक अब यहां पर लोगों को हटाने की कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
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बीते वर्ष काट दी थी यहां के निवासियों की वोट
बता दें कि बीते वर्ष कैंटोनमेंट बोर्ड ने हजारों निवासियों की वोट काट दी थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों पर यह कार्रवाई की गई थी। अंबाला में तोपखाना परेड क्षेत्र में 1843 में अंग्रेजों ने लोगों को खेतीबाड़ी करने के लिए बसाया था। यहां पर कानपुर, इटावा, मेरठ एवं हरदोई आदि जगहों से किसानों को लाया गया था। करीब 200 एकड़ जमीन पर सेना की जरूरतों के लिए खेतीबाड़ी की जाती थी।
इतनी वोट क्षेत्रों में
कैंटोनमेंट बोर्ड के अधीन आने वाले इन क्षेत्रों में तोपखाना परेड के अलावा, दुधला मंडी, गुलाब मंडी, रिसाला बाजार, शहजादा मंडी आदि क्षेत्र शामिल हैं। यहां पर कुल 5300 से ज्यादा वोट हैं और अकेले तोपखाना परेड में 3200 से अधिक वोट हैं।
सूरजभान ने किए थे प्रयास, अब कोई साथ नहीं
तोपखाना परेड में 80 प्रतिशत तक आबादी एससी-बीसी वर्ग से है। पूर्व में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल रहे चौ. सूरजभान ने रक्षा मंत्रालय से पत्राचार कर यहां निवासियों की मदद के प्रयास किए थे। मगर, उनकी मृत्यु के बाद कोई आगे नहीं आया था। अब मंत्री विज के प्रयासों से लोगों में उम्मीद की किरण जगी है।
कोट्स
लोगों की मांग को रक्षा मंत्रालय पहुंचाया गया था और इस मसले को लेकर रक्षा मंत्री से बातचीत भी हुई थी। लोगों को अब सेना द्वारा बेघर नहीं किया जाएगा, उन्हें स्टे प्रदान किया गया है। हजारों निवासियों को इसका लाभ होगा।
-अनिल विज, स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री।
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मंत्री अनिल विज के प्रयासों से यह संभव हो सका है। सेना यहां के निवासियों को बाहर करना चाहती थी, मगर मंत्री ने सकारात्मक तौर पर लोगों की बात रखी जिसका बेहतर परिणाम सामने आया है।
-अजय बवेजा, उपाध्यक्ष, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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तोपखाना परेड के हजारों निवासी मूलभूत सुविधाओं से इसलिए वंचित हैं क्योंकि उन्हें हमेशा यही कहा जाता है कि वह अवैध तौर पर बैठे हैं। उन्हें यहां से उजाड़ा जा रहा था, मगर मंत्री विज ने प्रयास कर हजारों लोगों को बसाने का काम किया और जल्द क्षेत्र के लोग मंत्री से मिलकर उनका आभार जताएंगे।
-लक्ष्मी देवी, पार्षद, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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अर्से से लोग अपने मालिकाना हक को लेकर संघर्षरत हैं और रक्षा मंत्रालय के आदेशों के बाद लोगों को यहां रहने का हक मिला है। जल्द इसका जश्न मनाया जाएगा और मंत्री का आभार जताया जाएगा।
-ललित कुमार, पूर्व पार्षद, कैंटोनमेंट बोर्ड, अंबाला।
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