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बेटे की सड़क हादसे में मौत के बाद अलख जला रहे माता-पिता
Updated Sat, 30 Jun 2018 01:05 AM IST
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हादसे में बेटा खोया, अब जगा रहे जागरूकता की अलख
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे परिवार को झिंझोरकर रख दिया था, मगर परिवार ने उस हादसे से उबरते हुए संकल्प लिया और जागरूकता की अलख जगाई। अब यह परिवार सड़कों पर वाहन चलाते समय बरतनी जाने वाली सावधानियां व हादसे के बाद तुरंत किए जाने वाले बचाव के उपायों की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहा है। तीन वर्ष पहले जीटी रोड पर दम तोड़ने वाले 12वीं पास सन्नी आहलूवालिया के माता-पिता इस अभियान में जुटे हैं। अब छह जुलाई को बेटे की बरसी पर पंचायत भवन में रक्तदान शिविर लगाकर लोगों को गाड़ी चलाते समय यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूकता कर रहे हैं।
भविष्य में फिल्म डायरेक्टर बनने का सपना लिए सन्नी आहलूवालियां 6 जुलाई 2015 की दोपहर जीटी रोड पर अपने दोस्तों संग दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उसके अन्य दोस्त भी हादसे में दम तोड़ चुके थे। इस हादसे के बाद माता-पिता ने सन्नी आहलूवालिया चैरिटेबल फाउंडेशन की स्थापना की और अब इसी फाउंडेशन और रोटरी क्लब के सहयोग से छह जुलाई को सुबह नौ से दो बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन होगा। इसमें पीजीआई चंडीगढ़ तथा सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम रक्त एकत्रित करने में सहयोग देंगी। वहीं ‘उम्मीद’ एनजीओ के सदस्य भी अपनी सेवाएं देंगे। उम्मीद एनजीओ की सदस्य अंजलि ने बताया कि सन्नी की याद में आयोजित होने वाला यह तीसरा रक्तदान शिविर होगा।
लोगों को कर रहे माता-पिता जागरूक
बेटे की मौत के बाद सन्नी के पिता प्रीत मोहिंद्र पाल सिंह व मां हनीप्रीत ने सन्नी आहलूवालिया चैरिटेबल फाउंडेशन की स्थापना की और वह इसके अध्यक्ष भी हैं। बेटे के साथ हुए हादसे में उन्होंने पाया था कि इस हादसे में ट्रक ड्राइवर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा पुलिस की मिलीजुली लापरवाही के चलते उनके बेटे की मौत हुई। वे नहीं चाहते कि दूसरे लोग भी इस तरह का नुकसान उठाएं। तभी से आज तक वह लोगों को रोड सेफ्टी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। एनजीओ एक्सीडेंट संभावित क्षेत्रों का पता लगाता है और इस बारे में प्रशासन तथा जनता को जागरूक करता है, ताकि संभावित दुघर्टना को टाला जा सके। समय-समय पर रक्तदान शिविरों का भी आयोजन करते हैं।
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पूरा शहर स्तब्ध था इस हादसे से
बता दें कि छह जुलाई 2015 को चार छात्र व एक छात्रा जिनमें सन्नी आहलुवालिया भी शामिल था, कार में सवार होकर जा रहे थे। जैसे ही वह कैंट के निकट आईओसी डिपो पर पहुंचे तो स्टेशनरी के समान से लदे एक ट्रक से उनकी कार की टक्कर हो गई थी। ट्रक रोड पर पिछले तीन-चार घंटों से गलत ढंग से खड़ा था। उस समय न तो पुलिस ने इस पर ध्यान दिया और न ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने। इस दुर्घटना में सन्नी की मौत हो गई थी। वह फिल्म डायरेक्टर बनना चाहता था और सुभाष घई की फिल्म ट्रेनिंग अकादमी में दाखिला भी लिया था। दुघर्टना वाले दिन वह अपने दोस्तों के साथ इसी खुशी को मनाकर वापस लौट रहा था।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। दर्दनाक सड़क हादसे ने पूरे परिवार को झिंझोरकर रख दिया था, मगर परिवार ने उस हादसे से उबरते हुए संकल्प लिया और जागरूकता की अलख जगाई। अब यह परिवार सड़कों पर वाहन चलाते समय बरतनी जाने वाली सावधानियां व हादसे के बाद तुरंत किए जाने वाले बचाव के उपायों की जानकारी लोगों तक पहुंचा रहा है। तीन वर्ष पहले जीटी रोड पर दम तोड़ने वाले 12वीं पास सन्नी आहलूवालिया के माता-पिता इस अभियान में जुटे हैं। अब छह जुलाई को बेटे की बरसी पर पंचायत भवन में रक्तदान शिविर लगाकर लोगों को गाड़ी चलाते समय यातायात नियमों का पालन करने के लिए जागरूकता कर रहे हैं।
भविष्य में फिल्म डायरेक्टर बनने का सपना लिए सन्नी आहलूवालियां 6 जुलाई 2015 की दोपहर जीटी रोड पर अपने दोस्तों संग दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया था। उसकी मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि उसके अन्य दोस्त भी हादसे में दम तोड़ चुके थे। इस हादसे के बाद माता-पिता ने सन्नी आहलूवालिया चैरिटेबल फाउंडेशन की स्थापना की और अब इसी फाउंडेशन और रोटरी क्लब के सहयोग से छह जुलाई को सुबह नौ से दो बजे तक रक्तदान शिविर का आयोजन होगा। इसमें पीजीआई चंडीगढ़ तथा सिविल अस्पताल के डॉक्टरों की टीम रक्त एकत्रित करने में सहयोग देंगी। वहीं ‘उम्मीद’ एनजीओ के सदस्य भी अपनी सेवाएं देंगे। उम्मीद एनजीओ की सदस्य अंजलि ने बताया कि सन्नी की याद में आयोजित होने वाला यह तीसरा रक्तदान शिविर होगा।
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लोगों को कर रहे माता-पिता जागरूक
बेटे की मौत के बाद सन्नी के पिता प्रीत मोहिंद्र पाल सिंह व मां हनीप्रीत ने सन्नी आहलूवालिया चैरिटेबल फाउंडेशन की स्थापना की और वह इसके अध्यक्ष भी हैं। बेटे के साथ हुए हादसे में उन्होंने पाया था कि इस हादसे में ट्रक ड्राइवर, नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया तथा पुलिस की मिलीजुली लापरवाही के चलते उनके बेटे की मौत हुई। वे नहीं चाहते कि दूसरे लोग भी इस तरह का नुकसान उठाएं। तभी से आज तक वह लोगों को रोड सेफ्टी के प्रति जागरूक कर रहे हैं। एनजीओ एक्सीडेंट संभावित क्षेत्रों का पता लगाता है और इस बारे में प्रशासन तथा जनता को जागरूक करता है, ताकि संभावित दुघर्टना को टाला जा सके। समय-समय पर रक्तदान शिविरों का भी आयोजन करते हैं।
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पूरा शहर स्तब्ध था इस हादसे से
बता दें कि छह जुलाई 2015 को चार छात्र व एक छात्रा जिनमें सन्नी आहलुवालिया भी शामिल था, कार में सवार होकर जा रहे थे। जैसे ही वह कैंट के निकट आईओसी डिपो पर पहुंचे तो स्टेशनरी के समान से लदे एक ट्रक से उनकी कार की टक्कर हो गई थी। ट्रक रोड पर पिछले तीन-चार घंटों से गलत ढंग से खड़ा था। उस समय न तो पुलिस ने इस पर ध्यान दिया और न ही नेशनल हाईवे अथॉरिटी ने। इस दुर्घटना में सन्नी की मौत हो गई थी। वह फिल्म डायरेक्टर बनना चाहता था और सुभाष घई की फिल्म ट्रेनिंग अकादमी में दाखिला भी लिया था। दुघर्टना वाले दिन वह अपने दोस्तों के साथ इसी खुशी को मनाकर वापस लौट रहा था।