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- मगर मंत्री ने इसे लेने से किया इंकार
Updated Sun, 11 Mar 2018 01:12 AM IST
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ग्राम सचिवों ने परिवहन भत्ते के 20 रुपये विज को लिफाफे में दिए, मंत्री ने लेने से किया इंकार
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
1962 से परिवहन भत्ते के रूप में मिल रहे 20 रुपयों को ग्राम सचिव ने लिफाफे में डालकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तो सौंपते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में भिजवाने का आग्रह किया। लेकिन विज ने इसे लेने से मना करते हुए उनकी बात सीएम तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
शनिवार को हरियाणा सरकार के पंचायती विभाग के अधीन आने वाले ग्राम सचिवों ने ग्राम सचिव वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से उनके निवास पर मुलाकात की। एसोसिएशन ने उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि 1962 से ग्राम सचिवों को केवल 20 रुपये ही परिवहन भत्ता दिया जा रहा है जो कर्मचारियों के साथ मजाक के समान है। ग्राम सचिवों ने सरकार की ओर से दिया जाने वाला 20 रुपये का परिवहन भत्ता इकट्ठा किया और लिफाफे में डालकर स्वास्थ्य मंत्री को देकर इसे मुख्यमंत्री राहत कोष में भिजवाने का आग्रह किया। जैसे ही ग्राम सचिवों ने मंत्री को राशि दी तो उन्होंने इसे लेने से मना करते हुए ग्राम सचिवों की बात को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अन्य मांगों को रखते हुए कहा कि शैक्षिक योग्यता को दसवीं से बढ़ाकर ग्रेजुएट किया जाए, वाहन भत्ता 20 रुपये से बढ़ाकर प्रतिमाह 1500 रुपये किया जाए। मुख्यमंत्री के कथन के अनुसार ग्राम सचिवों के 803 नए पद सृजित किए जाए और ई पंचायत के कार्यक्रमों को गति देने के लिये विभाग को हाईटेक करने की मांग की।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट।
1962 से परिवहन भत्ते के रूप में मिल रहे 20 रुपयों को ग्राम सचिव ने लिफाफे में डालकर स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज तो सौंपते हुए मुख्यमंत्री राहत कोष में भिजवाने का आग्रह किया। लेकिन विज ने इसे लेने से मना करते हुए उनकी बात सीएम तक पहुंचाने का आश्वासन दिया।
शनिवार को हरियाणा सरकार के पंचायती विभाग के अधीन आने वाले ग्राम सचिवों ने ग्राम सचिव वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज से उनके निवास पर मुलाकात की। एसोसिएशन ने उन्हें अपनी मांगों से अवगत करवाया। उन्होंने बताया कि 1962 से ग्राम सचिवों को केवल 20 रुपये ही परिवहन भत्ता दिया जा रहा है जो कर्मचारियों के साथ मजाक के समान है। ग्राम सचिवों ने सरकार की ओर से दिया जाने वाला 20 रुपये का परिवहन भत्ता इकट्ठा किया और लिफाफे में डालकर स्वास्थ्य मंत्री को देकर इसे मुख्यमंत्री राहत कोष में भिजवाने का आग्रह किया। जैसे ही ग्राम सचिवों ने मंत्री को राशि दी तो उन्होंने इसे लेने से मना करते हुए ग्राम सचिवों की बात को सरकार तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी अन्य मांगों को रखते हुए कहा कि शैक्षिक योग्यता को दसवीं से बढ़ाकर ग्रेजुएट किया जाए, वाहन भत्ता 20 रुपये से बढ़ाकर प्रतिमाह 1500 रुपये किया जाए। मुख्यमंत्री के कथन के अनुसार ग्राम सचिवों के 803 नए पद सृजित किए जाए और ई पंचायत के कार्यक्रमों को गति देने के लिये विभाग को हाईटेक करने की मांग की।
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