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दुखभंजनी मंदिर में की मां की स्वर्ण मुकुट से ताजपोशी

Rohtak Bureauरोहतक ब्यूरो Updated Sun, 14 Oct 2018 01:04 AM IST
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दुखभंजनी मंदिर में की मां की स्वर्ण मुकुट से ताजपोशी
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फोटो नंबर : 32 व 33
1989 में हुई थी मंदिर की स्थापना, मंदिर में है मां का सोम्य रूप
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला सिटी। नवरात्र के चौथे दिन कुष्मांडा माता की पूजा के साथ शहर के जैन कॉलेज रोड पर स्थित दुखभंजनी माता मंदिर में मां काली की स्वर्ण मुकुट से ताजपोशी की गई। मां को 56 भोग भी लगाया गया। इससे पूर्व दोपहर को मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए भंडारा लगाया गया। बता दें कि मंदिर की स्थापना 1989 में हुई थी। मंदिर सरोवर के बीचों-बीच स्थित है और यहां लोग दूर-दूर से मन्नतें मांगने आते हैं। यह सरोवर लब्बू वाला तालाब के नाम से मशहूर है। मान्यता है कि इस मंदिर में मांगी गई मुराद माता जल्द पूरी करती हैं।
मंदिर के पुजारी पंकज वशिष्ट ने बताया कि अधिकतर मंदिर में मां काली का क्रोधी रूप देखने को मिलता है, लेकिन इस मंदिर में मां का सोम्य रूप है, जिसे प्रसन्नता का रूप भी कहा जाता है। मंदिर में हर वर्ष नवरात्र में तीसरे नवरात्र पर मां दुखभंजनी को दुग्ध स्नान करवाने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि गत दिवस एक शोभायात्रा मंदिर से अंबाला कैंट व कैंट से वापस मंदिर तक निकाली गई थी, इसके बाद मां का दुग्ध स्नान करवाया गया।
मंदिर में नारियल भेंट का विशेष महत्व
पुजारी पंकज वष्शिट ने बताया कि दुखभंजनी मंदिर में मां को नारियल भेंट चढ़ाने का विशेष महत्व है। उन्होंने बताया कि अधिकतर काली माता मंदिर में शराब व बली दी जाती है, लेकिन इस मंदिर में नारियल व चने की भेंट ही चढ़ाई जाती है। उन्होंने बताया कि मान्यता है कि इस मंदिर में नारियल भेंट चढ़ाने से मां दुखभंजनी भक्तों के दुख हर लेती हैं।
मंदिर में सरोवर का विशेष महत्व
पुजारी पंकज वष्शिट ने बताया कि दुखभंजनी मंदिर एक सरोवर के बीचों-बीच स्थित है। इस सरोवर की विशेष महत्ता है। सरोवर में स्नान करने से निसंतान को संतान की प्राप्ति होती है। उन्होंने कहा कि अगर कोई बच्चा अधिक बीमार रहता हो तो उसे भी मंदिर में बने सरोवर में स्नान करवाने से वह ठीक हो जाता है।
अष्टमी पर प्रतियोगिताएं होगी आयोजित
पुजारी पंकज वष्शिट ने बताया कि हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सप्तमी पर अखंड ज्योति, अष्टमी में बच्चों की विभिन्न प्रतियोगिताएं व नवमी में यज्ञ का आयोजन कर पाठ का समापन किया जाएगा। उन्होंने बताया कि अष्टमी में आयोजित प्रतियोगिता में हर वर्ष बच्चों को उपहार भी भेंट किए जाते हैं।

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