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- प्लाटिंग करने वालों पर अब तक कोई कार्यवाही नहीं
Updated Wed, 28 Jun 2017 12:15 AM IST
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कालोनाइजर धड़ल्ले से कर रहा नदी में प्लाटिंग
अंबाला कैंट। मानसून से पहले बेशक प्रशासन ने टांगरी नदी में बसे लोगों को नोटिस जारी कर अपना पल्ला झाड़ लिया हो। मगर नदी के बीच में प्लाटिंग करने वाले कालोनाइजरों के खिलाफ आज तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसी का खामियाजा यहां नदी तल में बसे हजारों लोग झेल रहे हैं। हैरत है कि अभी भी नदी तल में कई प्लाट कटे हुए हैं और यहां पर बिजली निगम के पोल भी गड़े हुए हैं। आने-जाने के लिए इंटर लॉकिंग टाइलों
की सड़के तक बनी हैं। अब सवाल है कि यदि नदी का अंदरूनी क्षेत्र पूरी तरह से अवैध है तो अब तक इस अवैध खेल में कौन शामिल था, जब कॉलोनियां विकसित हो रही थीं तो विभिन्न विभागों के अधिकारी कैसे आंख मूंदे बैठे रहे, क्या कालोनाइजरों पर पूरी मेहबानी बरती गई। रसूखदारों को छोड़ अब गरीब तबके को नोटिस जारी करते हुए उन्हें नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है जिससे यहां बसे लोग परेशान हैं। टांगरी नदी की जद में बसे मकानों के बाहर गत दिनों सिंचाई विभाग के नोटिस लगाने से सैकड़ों परिवारों के समक्ष असमंजस की स्थिति है। नदी में अधिकतर कॉलोनियों से हाउस टैक्स, बिजली बिल और वॉटर बिल वसूल किए जा रहे हैं। कॉलोनियों में सरकार द्वारा सड़कों के अलावा स्ट्रीट लाइटों तक की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मगर अब मानसून से ठीक पहले कॉलोनियों को अवैध बताकर यहां बसे लोगों को एक ही झटके में सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा जा रहा है। इसी को लेकर यहां बसे परिवारों में रोष है।
नोटिस के बावजूद बन रहे नए मकान
कई जगह तो नोटिस से बावजूद भी नदी तल में नए मकान तैयार किए जा रहे हैं परंतु प्रशासन है कि आंख बंद किए बैठा है। टांगरी के हालातों को ब्यौरा किया जाए तो कई कॉलोनियों ऐसी भी बनी हुई है कि जहां शहरी इलाके से ज्यादा सुविधा दी जा रही है। इन कॉलोनियों में लक्ष्मीपुरा, न्यू प्रीत नगर, विश्वकर्मा नगर, न्यू लक्की नगर और दर्जनों कॉलोनियां शामिल है।
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कार्रवाई होती तो आज ये नौबत न आती
टांगरी नदी में रहने वाले जितेंद्र पंडित, विरेंद्र पंडित, एकता, सुमित्रा देवी, कौशिल्या रानी, भागो देवी, रानी, लक्ष्मी, मोना का कहना है कि प्रशासन को तब देखना चाहिए था, जब ये कॉलोनियां तैयार हो रही है। पहले तो प्रापर्टी डीलरों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिली भगत से कम पैसों में जमीन उपलब्ध करवा दी। यहां तक की कॉलोनीवासियों से बिजली और पानी के बिल लिए जा रहे हैं और हाउस टैक्स भी भेजे जा रहे हैं परंतु अब नोटिस चस्पा कर उन्हीं को उलझन में डाल रहा है। ये नोटिस भी मकान मालिकों की गैर मौजूदगी में चस्पा किए गए हैं ताकि कोई भी नोटिस लगाने का विरोध न कर सके। गरीब लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी हैं।
पहले बने हालातों से प्रशासन लेता सबक
टांगरी में पानी आने का ये पहला मामला नहीं होगा। इससे पहले भी मानसून के मौसम में टांगरी में पानी आने से अंदर बसी कालोनियों में जल भराव भी स्थिति बन जाती है। मजबूरन इलाका वासियों को अपने घरों की छतों का सहारा लेकर अपनी जान व सामान दोनों बचाना पड़ता है। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाएं जाते हैं, हर बार केवल कॉलोनियों में नोटिस चस्पा कर दिए जाते हैं। बता दें कि मानसून सीजन देखते हुए सिंचाई विभाग द्वारा शनिवार को नदी में स्थित कॉलोनियों में नोटिस चस्पाकर लोगों को यहां से हटने को कहा गया था। इससे पहले विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर नदी क्षेत्र को नोटिफाइड कर यहां रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
वर्जन
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। क्षेत्र में सिंचाई विभाग निगरानी रखता है। यह उन्हीं का जिम्मा है। सुभाष सिहाग। एसडीएम, अंबाला कैंट।
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अंबाला कैंट। मानसून से पहले बेशक प्रशासन ने टांगरी नदी में बसे लोगों को नोटिस जारी कर अपना पल्ला झाड़ लिया हो। मगर नदी के बीच में प्लाटिंग करने वाले कालोनाइजरों के खिलाफ आज तक प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की है। इसी का खामियाजा यहां नदी तल में बसे हजारों लोग झेल रहे हैं। हैरत है कि अभी भी नदी तल में कई प्लाट कटे हुए हैं और यहां पर बिजली निगम के पोल भी गड़े हुए हैं। आने-जाने के लिए इंटर लॉकिंग टाइलों
की सड़के तक बनी हैं। अब सवाल है कि यदि नदी का अंदरूनी क्षेत्र पूरी तरह से अवैध है तो अब तक इस अवैध खेल में कौन शामिल था, जब कॉलोनियां विकसित हो रही थीं तो विभिन्न विभागों के अधिकारी कैसे आंख मूंदे बैठे रहे, क्या कालोनाइजरों पर पूरी मेहबानी बरती गई। रसूखदारों को छोड़ अब गरीब तबके को नोटिस जारी करते हुए उन्हें नियमों का पाठ पढ़ाया जा रहा है जिससे यहां बसे लोग परेशान हैं। टांगरी नदी की जद में बसे मकानों के बाहर गत दिनों सिंचाई विभाग के नोटिस लगाने से सैकड़ों परिवारों के समक्ष असमंजस की स्थिति है। नदी में अधिकतर कॉलोनियों से हाउस टैक्स, बिजली बिल और वॉटर बिल वसूल किए जा रहे हैं। कॉलोनियों में सरकार द्वारा सड़कों के अलावा स्ट्रीट लाइटों तक की सुविधा उपलब्ध करवाई गई है। मगर अब मानसून से ठीक पहले कॉलोनियों को अवैध बताकर यहां बसे लोगों को एक ही झटके में सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा जा रहा है। इसी को लेकर यहां बसे परिवारों में रोष है।
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नोटिस के बावजूद बन रहे नए मकान
कई जगह तो नोटिस से बावजूद भी नदी तल में नए मकान तैयार किए जा रहे हैं परंतु प्रशासन है कि आंख बंद किए बैठा है। टांगरी के हालातों को ब्यौरा किया जाए तो कई कॉलोनियों ऐसी भी बनी हुई है कि जहां शहरी इलाके से ज्यादा सुविधा दी जा रही है। इन कॉलोनियों में लक्ष्मीपुरा, न्यू प्रीत नगर, विश्वकर्मा नगर, न्यू लक्की नगर और दर्जनों कॉलोनियां शामिल है।
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कार्रवाई होती तो आज ये नौबत न आती
टांगरी नदी में रहने वाले जितेंद्र पंडित, विरेंद्र पंडित, एकता, सुमित्रा देवी, कौशिल्या रानी, भागो देवी, रानी, लक्ष्मी, मोना का कहना है कि प्रशासन को तब देखना चाहिए था, जब ये कॉलोनियां तैयार हो रही है। पहले तो प्रापर्टी डीलरों और प्रशासनिक अधिकारियों ने मिली भगत से कम पैसों में जमीन उपलब्ध करवा दी। यहां तक की कॉलोनीवासियों से बिजली और पानी के बिल लिए जा रहे हैं और हाउस टैक्स भी भेजे जा रहे हैं परंतु अब नोटिस चस्पा कर उन्हीं को उलझन में डाल रहा है। ये नोटिस भी मकान मालिकों की गैर मौजूदगी में चस्पा किए गए हैं ताकि कोई भी नोटिस लगाने का विरोध न कर सके। गरीब लोगों को निशाना बनाया जा रहा है जबकि जिम्मेदार प्रशासन के अधिकारी हैं।
पहले बने हालातों से प्रशासन लेता सबक
टांगरी में पानी आने का ये पहला मामला नहीं होगा। इससे पहले भी मानसून के मौसम में टांगरी में पानी आने से अंदर बसी कालोनियों में जल भराव भी स्थिति बन जाती है। मजबूरन इलाका वासियों को अपने घरों की छतों का सहारा लेकर अपनी जान व सामान दोनों बचाना पड़ता है। प्रशासन द्वारा कोई ठोस कदम नहीं उठाएं जाते हैं, हर बार केवल कॉलोनियों में नोटिस चस्पा कर दिए जाते हैं। बता दें कि मानसून सीजन देखते हुए सिंचाई विभाग द्वारा शनिवार को नदी में स्थित कॉलोनियों में नोटिस चस्पाकर लोगों को यहां से हटने को कहा गया था। इससे पहले विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर नदी क्षेत्र को नोटिफाइड कर यहां रजिस्ट्रियों पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।
वर्जन
मुझे इस मामले की जानकारी नहीं है। क्षेत्र में सिंचाई विभाग निगरानी रखता है। यह उन्हीं का जिम्मा है। सुभाष सिहाग। एसडीएम, अंबाला कैंट।