{"_id":"5d13c4538ebc3e3c8653c09d","slug":"156157651214-ambala-news115","type":"story","status":"publish","title_hn":"मंत्री को छावनी का प्रमोशन नहीं डिमोशन करना पसंद : सरवारा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मंत्री को छावनी का प्रमोशन नहीं डिमोशन करना पसंद : सरवारा
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अंबाला। अंबाला छावनी को नगर निगम से बाहर कर नगर परिषद बनाए जाने के मामले में कांग्रेस ने कड़ी आपत्ति जताई है। मामले को लेकर कांग्रेस भवन में कांग्रेस पदाधिकारियों की बैठक हुई। इसके उपरांत पत्रकारों से बातचीत करते हुए कांग्रेस महिला नेत्री चित्रा सरवारा ने कहा कि शायद मंत्री को अंबाला छावनी की प्रमोशन नहीं डिमोशन करना अक्सर पसंद आता है। पहले पुलिस कमिश्नरी खत्म की गई और अब निगम से कैंट को बाहर किया गया है। उन्होंने कहा कि नगर निगम में शामिल होने के कई फायदे हैं जैसे अतिरिक्त बजट व केंद्र सरकार की सहायता से नगर निगम में शामिल गांवों में सड़क, पेयजल, ड्रेनेज जैसी सुविधाएं मिल पाती हैं। जरूरतमंद गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ मिलता है। प्रापर्टी के सर्किल रेट में वृद्धि होती है, जिससे ऋण लेने की क्रेडिट लिमिट बढ़ती है। इसके अलावा अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। मगर राजनीतिक कारणों से अंबाला को अब भाजपा ने पीछे कर दिया है। सिर्फ राजनीतिक कुंठा व महत्व कांक्षा पूरी करने के लिए जनहित से दूर कर अंबाला छावनी क्षेत्र को नगर निगम से बाहर करना सर्वथा गलत है जिसका जवाब आने वाले विधानसभा चुनाव में अंबाला छावनी की जनता अवश्य देगी। उन्होंने कहा कि इस मामले को कोर्ट में जाएंगे और पूरे से कोर्ट को अवगत कराया जाएगा।
अंबाला शहर के कब्जे से छावनी को मिली मुक्ति : विज
उधर, मंत्री अनिल विज ने कहा कि नगर परिषद बनने से अंबाला शहर के कब्जे से अंबाला छावनी को मुक्ति मिली है। अत: अंबाला छावनी की जनता को मुक्ति दिवस मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत काम करने के लिए मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अंबाला को निगम बनाने के लिए अंबाला छावनी को जबरन अंबाला शहर में मिला दिया था जबकि अंबाला छावनी और शहर कहीं भी आपस में जुड़े हुए नहीं हैं। दोनों शहरों में कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी है। निगम का कार्यालय अंबाला शहर में है। अत: अधिकारियों के वहां बैठने के कारण अंबाला छावनी के लोगों को छोटे-छोटे काम कराने के लिए भी अंबाला शहर जाना पड़ता था। मंत्री विज ने कहा एसडीएम कार्यालय के अतिरिक्त पिछले पांच वर्षों में लोगों को सुविधाएं देने के लिए प्रयास करके कई कार्यालय अंबाला छावनी में वह लेकर आए हैं। नगर निगम का कार्यालय अंबाला शहर में है, जिससे लोगों को सबसे अधिक काम पड़ते हैं। नगर निगम कार्यालय जाने के लिए लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती थी जिससे लोगों का अधिक समय तो लगता ही था तथा पैसे की बर्बादी भी होती थी। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है के अंबाला छावनी साधन संपन्न कमेटी है, जिसके कारण अंबाला छावनी का पैसा अंबाला शहर में लग रहा था। उन्होंने कहा कि जब अंबाला छावनी की जनसंख्या तीन लाख हो जाएगी तो वह यहां नगर निगम बनवा देंगे।
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अंबाला शहर के कब्जे से छावनी को मिली मुक्ति : विज
उधर, मंत्री अनिल विज ने कहा कि नगर परिषद बनने से अंबाला शहर के कब्जे से अंबाला छावनी को मुक्ति मिली है। अत: अंबाला छावनी की जनता को मुक्ति दिवस मनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि गलत काम करने के लिए मशहूर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने अंबाला को निगम बनाने के लिए अंबाला छावनी को जबरन अंबाला शहर में मिला दिया था जबकि अंबाला छावनी और शहर कहीं भी आपस में जुड़े हुए नहीं हैं। दोनों शहरों में कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी है। निगम का कार्यालय अंबाला शहर में है। अत: अधिकारियों के वहां बैठने के कारण अंबाला छावनी के लोगों को छोटे-छोटे काम कराने के लिए भी अंबाला शहर जाना पड़ता था। मंत्री विज ने कहा एसडीएम कार्यालय के अतिरिक्त पिछले पांच वर्षों में लोगों को सुविधाएं देने के लिए प्रयास करके कई कार्यालय अंबाला छावनी में वह लेकर आए हैं। नगर निगम का कार्यालय अंबाला शहर में है, जिससे लोगों को सबसे अधिक काम पड़ते हैं। नगर निगम कार्यालय जाने के लिए लोगों को बहुत परेशानी उठानी पड़ती थी जिससे लोगों का अधिक समय तो लगता ही था तथा पैसे की बर्बादी भी होती थी। उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है के अंबाला छावनी साधन संपन्न कमेटी है, जिसके कारण अंबाला छावनी का पैसा अंबाला शहर में लग रहा था। उन्होंने कहा कि जब अंबाला छावनी की जनसंख्या तीन लाख हो जाएगी तो वह यहां नगर निगम बनवा देंगे।
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