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Ambala News: तीन लड़ाइयों में 15 शूरवीरों ने छुड़ाए थे पसीने

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 10 May 2025 01:18 AM IST
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15 warriors sweated it out in three battles
हरिंदर पाल सिंह
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अंबाला। भारत-पाकिस्तान के बीच चल रहे तनाव ने एक बार फिर अंबाला से जुड़े बलिदान की याद को ताजा कर दिया। उन्होंने पिछली तीन लड़ाइयों में जान की परवाह न करते हुए दुश्मनों के दांत खट्टे करवाए थे। अब उसी तरह मौजूदा जवान भी जीजान से दुश्मनों से लोहा ले रहे हैं।
अंबाला की जमीन शूरवीरों की धरती है। पहले 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में सैकड़ों देशभक्तों ने शहादत देकर देश की आन-बान और शान को बरकरार रखा। वर्ष 1962 से लेकर 1971 तक लड़ी तीन लड़ाइयों में अपनी जान की परवाह न करते हुए जिले के 15 वीर जवानों ने अपनी शहादत देकर पाकिस्तान को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया।
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बलिदानियों के नाम से रोशन हैं गांव
जिले के कुछ गांव ऐसे हैं जो बलिदानियों के नाम से ही जाने जाते हैं। उनकी याद में गांव में कहीं स्वागत द्वार बना है तो कहीं सड़क का नाम रखा है। कुछ जगह धर्मशालाएं और अन्य धार्मिक स्मारक भी शहीदों की याद में बने हैं। बलिदान की गाथा लिखने वाली श्रेणी में पंजोखरा साहिब के अधीन जनेतपुर गांव सबसे पहले नंबर है। इसके बाद बराड़ा के अधीन दुखेड़ी, पिलखनी, खान अहमदपुर और डुलियानी गांव, नारायणगढ़ के अधीन धनाना, जंगू माजरा, नेक नावां और नसरौली गांव, शहजादपुर के नजदीक साैंतली गांव, अंबाला कैंट में वशिष्ठ नगर और अंबाला सिटी में बलदेव नगर के अलावा कलरेहड़ी खंड में टूंडली गांव शामिल हैं।
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1962 के युद्ध में पांच ने दिया था बलिदान
1962 के भारत-चीन युद्ध में जिले के पांच भारतीय सैनिक बलिदान हुए थे। यह युद्ध 20 अक्टूबर 1962 को शुरू हुआ था और 21 नवंबर 1962 को समाप्त हुआ था। इस युद्ध में भारतीय सेना को भारी नुकसान हुआ था और लगभग 3137 भारतीय सैनिक मारे गए थे। जिले वीरगति प्राप्त करने वालों में जनेतपुर गांव के सेनानी मोहिंदर सिंह ने 19 नवंबर 1962 को, दुखेड़ी के सेनानी जोरा सिंह ने 16 नवंबर को, नारायणगढ़ के सेनानी दयाल सिंह ने 22 नवंबर 1962 को, खान अहमदपुर के देश राज ने 11 अक्टूबर और किशन सिंह ने 22 नवंबर 1962 को देश के लिए कुर्बानी देकर जिले व हरियाणा का नाम रोशन किया।
ये हैं 1965 के योद्धा
1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध एक संक्षिप्त संघर्ष था जो पांच अगस्त 1965 से 23 सितंबर 1965 तक चला था। यह युद्ध मुख्य रूप से जम्मू और कश्मीर के नियंत्रण को लेकर था। यह युद्ध 17 दिनों तक चला और अंत में संयुक्त राष्ट्र के हस्तक्षेप से युद्धविराम हुआ। इस युद्ध में जिले के सात शूरवीरों ने शहादत को प्राप्त किया था। इसमें अंबाला कैंट वशिष्ठ नगर के सेनानी अजमेर सिंह ने 20 सितंबर 1965 को शहादत प्राप्त की। वहीं पिलखनी बराड़ा गांव के बहादुर सिंह ने 9 सितंबर 1965 और डुलियानी के प्यारा सिंह ने 22 सितंबर 1965 को, धनाना नारायणगढ़ के साहिब सिंह ने 5 सितंबर 1965, साैंतली शहजादपुर के मोहिंदर सिंह ने छह सितंबर 1965, नारायणगढ़ के जंगू माजरा गांव के नरंजन सिंह ने 22 सितंबर 1965 को और अंबाला सिटी बलदेव नगर के चमन लाल ने 8 सितंबर 1965 को देश सेवा की खातिर अपने प्राणों की आहुति दी थी।

ये हैं 1971 के शूरवीर
1971 का भारत-पाकिस्तान युद्ध एक सैन्य टकराव था जोकि 3 दिसंबर 1971 से 16 दिसंबर 1971 को पूर्वी पाकिस्तान में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध के दौरान हुआ था। इसमें जिले के तीन शूरवीरों ने वीरगति को प्राप्त किया था। इसमें कलरहेड़ी खंड के अधीन टूंडली गांव के दीदार सिंह ने 15 दिसंबर 1971 को वीरगति प्राप्त की। वहीं नारायणगढ़ के नेक नावां के हरि सिंह ने 11 दिसंबर 1971 और नसरौली के अर्जुन सिंह ने एक फरवरी 1971 में दुश्मनों के छक्के छुड़ाते हुए अपने प्राणों की आहुति दे दी।
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