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620 मरीजों पर जिले में हो रही 14 टन ऑक्सीजन की औसतन खपत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 15 May 2021 02:52 AM IST
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14 ton oxygen spend on 620 patient
कोरोना की चेन को तोड़ने के अथक प्रयासों के बावजूद लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। हालात यह हैं कि किसी भी सरकारी अस्पताल में कोई भी बेड खाली नहीं है। हालांकि हर दिन होने वाली मौत और डिस्चार्ज होने वाले मरीजों की संख्या के आधार पर भी खाली बेड की स्थिति निर्भर करती है। जिले के सभी अस्पतालों की बात करें तो जिले में कुल 1063 बेड की व्यवस्था की गई है। इनमें से करीब 680 बेड पर कोरोना संक्रमित मरीज हैं। इनमें से शुक्रवार तक करीब 600 मरीज ऑक्सीजन सपोर्ट पर थे। जबकि 60 मरीज कोरोना से मुक्त होने के बाद अब अलग-अलग अस्पताल में आब्जर्वेशन के लिए रखे गए हैं। जिला नागरिक अस्पताल में ऑक्सीजन उत्पादन प्लांट काम करने लगा है। इसमें प्रति मिनट 200 लीटर ऑक्सीजन तैयार की जा रही है। इसी तरह छावनी में ऑक्सीजन टैंक स्थापित किया गया है।
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जिला नागरिक अस्पताल में करीब 144 मरीज भर्ती
जिला नागरिक अस्पताल अंबाला शहर में इस समय करीब 144 मरीज भर्ती हैं। इसके अलावा करीब 80 मरीज छावनी नागरिक अस्पताल में भी उपचाराधीन हैं। इनमें से करीब 15 मरीज वेंटिलेटर सपोर्ट और बाईपेप पर भी हैं। इसी तरह मुलाना मेडिकल अस्पताल में करीब 125 मरीज भर्ती हैं। अंबाला छावनी नागरिक अस्पताल में रोजाना औसतन करीब दो टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है जबकि शहर नागरिक अस्पताल में करीब 3 टन ऑक्सीजन की खपत हो रही है। इसी तरह मुलाना मेडिकल कॉलेज में भी करीब साढ़े 3 टन ऑक्सीजन की औसतन रोजाना खपत हो रही है। अंबाला के हीलिंग टच अस्पताल में भी रोजाना औसतन डेढ़ टन ऑक्सीजन की खपत है। इसके अलावा अन्य अस्पतालों में ऑक्सीजन की खपत हो रही है।
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घरों में भी पहुंचाए जा रहे ऑक्सीजन सिलिंडर
रेडक्रॉस की ओर से जिले में घरों में आइसोलेट मरीजों को भी ऑक्सीजन की सप्लाई की जाने लगी है। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा बनाए गए एप के माध्यम से रिपोर्ट टीम को भेज दी जाती है। जिनकी ऑक्सीजन 90 से कम होती है और वह अस्पताल नहीं जाने की बजाए घरों में ही रहकर ऑक्सीजन सपोर्ट चाहते हैं उन्हें ऑक्सीजन उपलब्ध करवा दी जाती है। लेकिन इसके लिए सिलिंडर आवेदनकर्ता के पास होना चाहिए। आवेदनकर्ता को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना पड़ता है। इसी तरह से प्राइवेट अस्पतालों में जो मरीज भर्ती हैं उनकी मदद भी की जा रही है लेकिन रेडक्रॉस के माध्यम से यह सुविधा ज्यादातर होम आइसोलेट मरीजों को ही उपलब्ध करवाई जा रही है। जिले में अभी तक 71 मरीजों ने इनके लिए आवेदन किया था। लेकिन इसमें से 44 आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। इनमें से कुछ दूसरे राज्यों से थे, कुछ को ऑक्सीजन सपोर्ट की जरूरत नहीं थी जब कुछ ने प्राइवेट अस्पताल में सुविधा होने के बावजूद आवेदन कर दिया था। इसीलिए इनके आवेदन रिजेक्ट कर दिए गए। डीसी अशोक कुमार की पहल के बाद रेडक्रॉस यह सुविधा मरीजों तक पहुंचा रहा है। छोटा ऑक्सीजन सिलिंडर घर पहुंचाने पर रेडक्रॉस की ओर से 50 रुपये और बड़े सिलिंडर ऑक्सीजन का 200 रुपये में पहुंचाया जा रहा है। यह केवल ऑक्सीजन भराई का रेट है। ट्रांसपोटेशन चार्ज मरीज से नहीं लिए जा रहे।
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होम आइसोलेट मरीज जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत है उन्हें हम घर पर ही यह सुविधा उपलब्ध करवा रहे हैं। इसके लिए मरीज के पास अपना ऑक्सीजन सिलिंडर होना जरूरी है। खाली सिलिंडर के बदले हम भरा सिलिंडर दे देते हैं। डीसी के निर्देशानुसार हम अभी तक 24 व्यक्तियों को यह सुविधा मुहैया करवा चुके हैं। तीन अभी डिलीवर करवाने हैं। छोटे सिलिंडर के बदले 50 रुपये और बड़े सिलिंडर के 200 रुपये लिए जाते हैं।
विजय लक्ष्मी, रेडक्रॉस सचिव, अंबाला।
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जिले में ऑक्सीजन की किसी भी प्रकार की अभी कोई कमी नहीं है। डिमांड के अनुसार ऑक्सीजन की पर्याप्त व्यवस्था और स्टॉक हमारे पास उपलब्ध है।
डॉ. सुखप्रीत सिंह, नोडल अधिकारी।
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