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Ambala News: 139 साल पुराना जमना दास जवाहर लाल मंदिर शिव भक्तों के लिए बना आस्था का केंद्र
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अंबाला। छावनी की टिंबर मार्केट स्थित 139 साल पुराना जमना दास जवाहर लाल मंदिर शिव भक्तों के लिए बना आस्था का केंद्र बना हुआ है। सावन के महीने में दूर-दूर से भक्तों के साथ-साथ श्रद्धालु भी इस मंदिर में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। मौजूदा समय में मंदिर के प्रधान अनिल मित्तल, सचिव अमित बिंदलस और कैशियर नलिन बिंदलस की देखरेख में है। सुबह 4 बजकर 45 मिनट पर मंदिर को खोला जाता है। इसके बाद से ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। सुबह पांच बजे और शाम को 7 बजकर 45 मिनट पर रोजाना आरती की जाती है। आरती के बाद भक्तों को प्रसाद वितरित किया जाता है।
पंडित दिनेश बैंजवाल बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से मंदिर में आकर मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। मंदिर में आज भी पुराने समय का मुख्य द्वार स्थापित है। यह द्वार कई सालों पुराना है। इस द्वार पर पुराना पत्थर भी लगाया हुआ है। समय के साथ साथ मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित की गई है।
सावन में सुबह और शाम मंदिर में होने वाली पूजा अर्चना और आरती में दूरदराज से श्रद्धालु परिवार संग पहुंचते हैं। पंडित दिनेश बैंजवाल ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1882 में हुआ था। उस दौरान मंदिर में शिवलिंग और राम दरबार स्थापित हुआ था। इसके बाद मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में बढ़ती आस्था को देखते हुए मंदिर में करीब 50 साल पहले दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित की गई थी। यही नहीं मंदिर में सरस्वती माता, हनुमान जी के पवित्र स्वरूप भी स्थापित किए गए। समय के बदलाव के साथ लोगों में मंदिर के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है। जो भी श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ नतमस्तक होता है उसकी मनोकामना पूरी होती है।
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पंडित दिनेश बैंजवाल बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे मन से मंदिर में आकर मन्नत मांगता है, उसकी मन्नत अवश्य पूरी होती है। मंदिर में आज भी पुराने समय का मुख्य द्वार स्थापित है। यह द्वार कई सालों पुराना है। इस द्वार पर पुराना पत्थर भी लगाया हुआ है। समय के साथ साथ मंदिर में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित की गई है।
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सावन में सुबह और शाम मंदिर में होने वाली पूजा अर्चना और आरती में दूरदराज से श्रद्धालु परिवार संग पहुंचते हैं। पंडित दिनेश बैंजवाल ने बताया कि इस मंदिर का निर्माण वर्ष 1882 में हुआ था। उस दौरान मंदिर में शिवलिंग और राम दरबार स्थापित हुआ था। इसके बाद मंदिर के प्रति श्रद्धालुओं में बढ़ती आस्था को देखते हुए मंदिर में करीब 50 साल पहले दुर्गा मां की मूर्ति स्थापित की गई थी। यही नहीं मंदिर में सरस्वती माता, हनुमान जी के पवित्र स्वरूप भी स्थापित किए गए। समय के बदलाव के साथ लोगों में मंदिर के प्रति आस्था बढ़ती जा रही है। जो भी श्रद्धालु पूरे श्रद्धाभाव के साथ नतमस्तक होता है उसकी मनोकामना पूरी होती है।
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