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शहीद स्मारक के लिए सात एकड़ जमीन से नगर निगम ने छुड़वाया कब्जा
Updated Sat, 01 Sep 2018 01:05 AM IST
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सात एकड़ खेती की जमीन पर निगम टीम ने लिया कब्जा
अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। 323 करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाले शहीद स्मारक के लिए शुक्रवार दोपहर को नगर निगम की टीम ने कैंट की नई आबादी में सात एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया। इस बीच कुछ लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस दल के सामने उनकी एक न चली और वह शांत होकर पुलिस कार्रवाई को देखते रहे। इससे पूर्व पीडब्ल्यूडी बी एंड आर की टीम ने सुबह से ही झंडे लगाते हुए निशानदेही का कार्य आरंभ कर दिया था।
अंबाला-दिल्ली हाईवे पर किनारे करीब 22 एकड़ जमीन पर शहीद स्मारक बनाना प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन अधिग्रहीत की गई है, जिसमें वह जमीन भी शामिल है, जिस पर शाक्य समाज पिछले कई सालों से खेतीबाड़ी कर रहा है। शुक्रवार सुबह नौ बजे पीडब्ल्यूडी की टीम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्मारक के लिए ली जाने वाली जमीन पर झंडियां लगाईं। इस जमीन पर रंगिया मंडी/नन्हेड़ा का वह क्षेत्र भी शामिल है जिस पर करीब 120 साल से लोग खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इस जमीन के अलावा उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। उस समय सेना द्वारा यह जमीन लीज पर दी गई थी, जबकि इसकी देखरेख सैन्य संपदा कार्यालय करता था। साल 1977 के बाद यह जमीन नगर पालिका (वर्तमान नगर निगम) के अधीन आ गई। तभी से उनको यहां से हटाने की कोशिश की जा रही है। उधर, निगम अधिकारियों ने बताया कि यह निगम की जमीन है, जबकि इसकी लीज भी समाप्त हो चुकी है। शहीद स्मारक बनाने के लिए यह जमीन ली गई है।
तीन जेसीबी और पुलिस दल बल के साथ मौजूद थी नगर निगम टीम
अधिग्रहण की कार्रवाई के दौरान विरोध से बचने के लिए नगर निगम टीम पूरी तैयारी के साथ रंगिया मंडी क्षेत्र में पहुंची। इस दौरान अधिकारियों के साथ तीन जेसीबी, ट्रैक्टर ट्रॉली व भारी पुलिस बल तैनात था। ऊपर से आदेश आते ही नगर निगम टीम ने तीन जेसीबी के साथ जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई आरंभ कर दी। इस दौरान कई निवासियों के चेहरों पर मायूसी थी, तो कई लोग गुस्से में सरकार को कोस रहे थे।
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छह महीने की फसल कर दी बर्बाद
निवासियों ने आरोप लगाया कि निगम अधिकारियों ने शुरुआत में बेतरतीब तरीके से जेसीबी चला दी है। इससे छह महीने से तैयार की गई उनकी फूलों व अन्य सब्जियों की फसलें नष्ट हो गईं। अगर टीम ढंग से कार्य करती तो उनकी इतने महीनों की मेहनत बर्बाद न होती। वहीं कई फसलें तो केवल अधिकारियों व अन्य लोगों के पैरों के नीचे आने से ही नष्ट हो गई, जिसे बेचकर वह अपनी आजीविका चलाते थे। अब उनके पास कमाई का साधन भी नहीं रह गया है।
यह लोग करते थे खेती
राधेश्याम एक एकड़, मंगल सैन एक एकड़, मामराज दो एकड़, तीलकराज आधा एकड़, राज कुमार आधा एकड़, अभिषेक आधा एकड़, दीपक आधा एकड़, ओमप्रकाश आधा एकड़, टीकाराम आधा एकड़ जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे जिस पर अब निगम ने कब्जा ले लिया है।
यह अधिकारी रहे मौजूद
ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजेश पूनिया, नायब तहसीलदार हवा सिंह, नगर निगम एमई हरीश, बिल्डिंग इंस्पेक्टर तेजिंद्र सिंह, पीडब्ल्यूडी बी एंड आर एक्सईएन डीडी कंबोज व अन्य मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
अंबाला कैंट। 323 करोड़ रुपयों की लागत से बनने वाले शहीद स्मारक के लिए शुक्रवार दोपहर को नगर निगम की टीम ने कैंट की नई आबादी में सात एकड़ जमीन पर कब्जा ले लिया। इस बीच कुछ लोगों ने विरोध भी किया, लेकिन पुलिस दल के सामने उनकी एक न चली और वह शांत होकर पुलिस कार्रवाई को देखते रहे। इससे पूर्व पीडब्ल्यूडी बी एंड आर की टीम ने सुबह से ही झंडे लगाते हुए निशानदेही का कार्य आरंभ कर दिया था।
अंबाला-दिल्ली हाईवे पर किनारे करीब 22 एकड़ जमीन पर शहीद स्मारक बनाना प्रस्तावित है। इसके लिए जमीन अधिग्रहीत की गई है, जिसमें वह जमीन भी शामिल है, जिस पर शाक्य समाज पिछले कई सालों से खेतीबाड़ी कर रहा है। शुक्रवार सुबह नौ बजे पीडब्ल्यूडी की टीम के अधिकारी मौके पर पहुंचे और उन्होंने स्मारक के लिए ली जाने वाली जमीन पर झंडियां लगाईं। इस जमीन पर रंगिया मंडी/नन्हेड़ा का वह क्षेत्र भी शामिल है जिस पर करीब 120 साल से लोग खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण कर रहे हैं। इस जमीन के अलावा उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। उस समय सेना द्वारा यह जमीन लीज पर दी गई थी, जबकि इसकी देखरेख सैन्य संपदा कार्यालय करता था। साल 1977 के बाद यह जमीन नगर पालिका (वर्तमान नगर निगम) के अधीन आ गई। तभी से उनको यहां से हटाने की कोशिश की जा रही है। उधर, निगम अधिकारियों ने बताया कि यह निगम की जमीन है, जबकि इसकी लीज भी समाप्त हो चुकी है। शहीद स्मारक बनाने के लिए यह जमीन ली गई है।
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तीन जेसीबी और पुलिस दल बल के साथ मौजूद थी नगर निगम टीम
अधिग्रहण की कार्रवाई के दौरान विरोध से बचने के लिए नगर निगम टीम पूरी तैयारी के साथ रंगिया मंडी क्षेत्र में पहुंची। इस दौरान अधिकारियों के साथ तीन जेसीबी, ट्रैक्टर ट्रॉली व भारी पुलिस बल तैनात था। ऊपर से आदेश आते ही नगर निगम टीम ने तीन जेसीबी के साथ जमीन पर कब्जा लेने की कार्रवाई आरंभ कर दी। इस दौरान कई निवासियों के चेहरों पर मायूसी थी, तो कई लोग गुस्से में सरकार को कोस रहे थे।
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छह महीने की फसल कर दी बर्बाद
निवासियों ने आरोप लगाया कि निगम अधिकारियों ने शुरुआत में बेतरतीब तरीके से जेसीबी चला दी है। इससे छह महीने से तैयार की गई उनकी फूलों व अन्य सब्जियों की फसलें नष्ट हो गईं। अगर टीम ढंग से कार्य करती तो उनकी इतने महीनों की मेहनत बर्बाद न होती। वहीं कई फसलें तो केवल अधिकारियों व अन्य लोगों के पैरों के नीचे आने से ही नष्ट हो गई, जिसे बेचकर वह अपनी आजीविका चलाते थे। अब उनके पास कमाई का साधन भी नहीं रह गया है।
यह लोग करते थे खेती
राधेश्याम एक एकड़, मंगल सैन एक एकड़, मामराज दो एकड़, तीलकराज आधा एकड़, राज कुमार आधा एकड़, अभिषेक आधा एकड़, दीपक आधा एकड़, ओमप्रकाश आधा एकड़, टीकाराम आधा एकड़ जमीन पर खेती कर अपने परिवार का पालन पोषण करते थे जिस पर अब निगम ने कब्जा ले लिया है।
यह अधिकारी रहे मौजूद
ड्यूटी मजिस्ट्रेट राजेश पूनिया, नायब तहसीलदार हवा सिंह, नगर निगम एमई हरीश, बिल्डिंग इंस्पेक्टर तेजिंद्र सिंह, पीडब्ल्यूडी बी एंड आर एक्सईएन डीडी कंबोज व अन्य मौजूद रहे।