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मुआवजे की मांग को लेकर सीएम आवास पहुंचे नई आबादी के निवासी
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:26 AM IST
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मुआवजे की मांग को लेकर सीएम आवास पहुंचे नई आबादी के निवासी
अंबाला कैंट।
मुआवजे की मांग को लेकर नई आबादी के निवासी बुधवार को सीएम आवास पर पहुंचे। यहां लोगों ने प्रत्येक पीड़ित को सौ-सौ गज प्लाट एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की। यहां के निवासी संतोष, राजेश, सुनील, महेंद्र, सोमनाथ, संजय, फूल सिंह, राकेश व अन्य ने सीएम के नाम एक ज्ञापन उनके पीए को सौंपा। लोगों को इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
क्षेत्र निवासियों का एक दल बुधवार चंडीगढ़ पहुंचा जहां लोगों ने सीएम के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में लोगों ने कहा कि वह नई आबादी में बीते डेढ़ सौ वर्षों से रहकर सब्जियां उगाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि रेलवे ने जमीन अधिग्रहण के नाम पर उनकी जमीने उनसे छीन ली है और उनके मकान भी तोड़ दिए गए हैं। वह बेघर हो गए हैं। लोगों ने कहा कि उनके पास रहने के लिए न तो कोई घर है न ही कोई अन्य ठिकाना। सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण के नाम पर उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है वह ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। इस मुआवजे से कुछ नहीं होने वाला। प्रभावितों ने मांग उठाई की उन्हें 100 से 200 वर्ग गज का प्लाट या फिर परिवार से एक सदस्य को नौकरी प्रदान की जाए। यदि ऐसा नहीं होता तो वह आने वाले दिनों में अपना प्रदर्शन और तेज करेंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही रेलवे द्वारा डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर परियोजना के लिए रेलवे ने नई आबादी में जमीन अधिग्रहण की थी। जमीन अधिग्रहण होने से करीब दस परिवार बेघर हो गए थे।
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अंबाला कैंट।
मुआवजे की मांग को लेकर नई आबादी के निवासी बुधवार को सीएम आवास पर पहुंचे। यहां लोगों ने प्रत्येक पीड़ित को सौ-सौ गज प्लाट एवं परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी की मांग की। यहां के निवासी संतोष, राजेश, सुनील, महेंद्र, सोमनाथ, संजय, फूल सिंह, राकेश व अन्य ने सीएम के नाम एक ज्ञापन उनके पीए को सौंपा। लोगों को इस मामले में सकारात्मक कार्रवाई का आश्वासन दिया गया।
क्षेत्र निवासियों का एक दल बुधवार चंडीगढ़ पहुंचा जहां लोगों ने सीएम के नाम ज्ञापन दिया। ज्ञापन में लोगों ने कहा कि वह नई आबादी में बीते डेढ़ सौ वर्षों से रहकर सब्जियां उगाकर अपना जीवन यापन कर रहे हैं। लोगों ने कहा कि रेलवे ने जमीन अधिग्रहण के नाम पर उनकी जमीने उनसे छीन ली है और उनके मकान भी तोड़ दिए गए हैं। वह बेघर हो गए हैं। लोगों ने कहा कि उनके पास रहने के लिए न तो कोई घर है न ही कोई अन्य ठिकाना। सरकार द्वारा जमीन अधिग्रहण के नाम पर उन्हें जो मुआवजा दिया जा रहा है वह ऊंट के मुंह में जीरे के सामान है। इस मुआवजे से कुछ नहीं होने वाला। प्रभावितों ने मांग उठाई की उन्हें 100 से 200 वर्ग गज का प्लाट या फिर परिवार से एक सदस्य को नौकरी प्रदान की जाए। यदि ऐसा नहीं होता तो वह आने वाले दिनों में अपना प्रदर्शन और तेज करेंगे जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। बता दें कि कुछ दिन पहले ही रेलवे द्वारा डेडीकेटिड फ्रेट कोरिडोर परियोजना के लिए रेलवे ने नई आबादी में जमीन अधिग्रहण की थी। जमीन अधिग्रहण होने से करीब दस परिवार बेघर हो गए थे।
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