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.. तो भंग होगा अंबाला नगर निगम
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:09 AM IST
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-.. तो भंग होगा अंबाला नगर निगम
अंबाला सिटी/कैंट। अंबाला नगर निगम भंग करने को लेकर सरकार की सहमति लगभग बन गई है। जानकारी के अनुसार वीरवार को चंडीगढ़ में मंत्री मंडल की बैठक में अंबाला निगम को भंग करने पर लगभग मुहर लग गई है। आगामी दिनों में इस पर औपचारिक घोषणा हो सकती है। अंबाला में नगर निगम भंग करने के लिए भाजपा सरकार द्वारा पूरी कसरत की जा रही थी और अभी कुछ दिनों पहले ही जिला प्रशासन द्वारा निगम भंग करने को लेकर इसकी पूरी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी गई थी। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सिटी विधायक निगम भंग करने के पक्ष में थे और अब सरकार का यह सपना साकार हो रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस निगम भंग करने के मुद्दे को भाजपा की घटिया मानसिकता का परिचय बता रही है। निगम मेयर से लेकर कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि निगम में कांग्रेस का वर्चस्व था और यही बात भाजपा की आंख में खटक रही थी। निगम का गठन शहर को आगे बढ़ाने के लिए किया गया था, मगर अब वापस इसे परिषद बनाना एक हिसाब से पीछे जाने के बराबर है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम का विरोध कांग्रेस द्वारा भविष्य में व्यापक स्तर पर किया जाएगा।
2010 में हुआ था निगम का गठन
बता दें कि अंबाला में नगर निगम का गठन वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार के समय हुआ था। सिटी व कैंट क्षेत्र का विलय करने के बाद आसपास क्षेत्र के 26 गांवों को भी निगम सीमा में शामिल किया गया था। निगम गठन के समय से ही अंबाला में भाजपा ने इसका विरोध जताना आरंभ कर दिया था। भाजपा का कहना था कि निगम गठन में जो मानक होने चाहिए वह अंबाला पूरा नहीं करता है। अंबाला शहरी क्षेत्र की जनसंख्या दस लाख से अधिक नहीं है और इस जनसंख्या का आंकड़ा पूरा करने के लिए आसपास के गांवों को निगम में शामिल किया गया था।
60 वार्ड से 20 वार्ड रह गए थे
पहले अंबाला में सिटी और कैंट में अलग-अलग नगर परिषद होती थी। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 30-30 वार्ड थे। मगर नगर निगम के गठन के बाद निगम सीमा में केवल 20 वार्ड कर दिए गए थे, यानि तीन वार्डों का एक वार्ड बना दिया गया था। काफी बड़ा क्षेत्र एक वार्ड में होने की वजह से पार्षद पूरे इलाके में निगरानी नहीं रख पाते थे और विकास कार्यों को लेकर भी शिकायतें थी।
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निगम भंग हुआ तो यह नुकसान
नगर निगम यदि भंग होता है तो इसके व्यापक नुकसान भी होंगे। निगम का बजट नगर परिषद से ज्यादा होता है और केंद्र से जो बड़ी परियोजनाएं शहर को मिलती है उसमें नगर परिषद की भागीदारी कम हो जाती है। अब तक जिले को कई बड़े प्रोजेक्ट निगम की वजह से मिले हैं।
यह बोले मंत्री और विधायक
- स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने कहा कि मुझे इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। अंबाला में निगम भंग हुआ या नहीं इस बारे में उन्हें फिलहाल कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
- सरकार जो भी कार्य कर रही है वह जनता के अनुरूप हो रहा है। निगम में बड़ा क्षेत्र होने एक वार्ड में होने से विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे थे। निगम को कांग्रेस ने थोपा था और यदि अब वापस परिषद का गठन होता है तो इससे जनता को बहुत लाभ मिलेगा।
असीम गोयल, विधायक, अंबाला सिटी।
यह बोले मंत्री व पार्षद
- यदि नगर निगम भंग होता है तो उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। भाजपा की घटिया मानसिकता के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। भाजपा के मंत्री व विधायक कोई बड़ा प्रोजेक्ट अंबाला में नहीं ला पाए इसलिए अपनी नाकामी को छिपाने के लिए वह नगर निगम को भंग कराने पर तुले हुए हैं।
मेयर, रमेश मल, नगर निगम, अंबाला।
- यह अंबाला का दुर्भाग्य है। इससे जहां विकास कार्यों पर असर पड़ेगा वहीं कई युवा बेरोजगार हो जाएंगे। आम जनता की राय ली जानी चाहिए थी। विकास कार्यों के लिए नगर निगम के कमिशनर के पास जो पावर होती हैं वह नगर पालिका के अध्यक्ष के पास नहीं होती हैं। विकास कार्यों पर भारी असर पड़ेगा। जो विकास कार्य अभी अधर में थे वह रूक जाएंगे और जो विकास कार्य पास हुए थे वह भी नहीं हो पाएंगे।
सोनिया रानी, पार्षद।
- नगर निगम बनने के बाद लाखों खर्च करने के बाद जो अंबाला सफाई के क्षेत्र में 360वें स्थान पर आया था अब उसकी हालत और खराब होगी। केंद्र की योजनाओं का कोई फायदा नगर परिषद को नहीं मिल पाएगा। निगम बनने के बाद जितना विकास अंबाला का हुआ है उतना ही परिषद बनने के बाद अंबाला फिर पिछड़ जाएगा।
हरदीप कौर, पार्षद।
- जो नई कालोनियां निगम में शामिल हुई थी वो अब फिर नगर परिषद से बाहर हो जाएंगी। जो क्षेत्र रूलर से अर्बन क्षेत्रों में शामिल हुए थे अब वह फिर रूलर में आ जाएंगे। वार्ड विकास के लिए बड़ा बजट होता था अब वह सिमट जाएगा। समाज आगे बढ़ता है, मगर भाजपा केवल ओछी राजनीति करते हुए प्रदेश को पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है। निगम भंग होता है तो इसका विरोध हर स्तर पर जोरदार तरीके से किया जाएगा।
चित्रा सरवारा, पार्षद।
- नगर निगम को भंग करना एक गलत काम है। यदि इसे बनाया गया है, तो चलाना चाहिए था, जबकि भाजपा ने तो इसे चलाने में एक तरह से अपने हाथ ही खड़े किए हैं। नगर निगम भंग होने से विकास कार्य प्रभावित होंगे, जबकि मिलने वाले फंड पर भी असर पड़ेगा।
दुर्गा सिंह अत्री, सीनियर डिप्टी मेयर नगर निगम अंबाला
- सरकार की मर्जी है, वह जो भी कर ले। मेरे हिसाब से तो यह गलत कदम है, जबकि सरकार को चाहिए था कि निगम में मेयर को शक्तियां दी जाती। यदि ऐसा कदम उठाना ही है, तो कम से कम निगम का कार्यकाल तो पूरा करवाया जाता।
- सुधीर जायसवाल, डिप्टी मेयर नगर निगम अंबाला
- कैंट व सिटी में काफी दूरी है, जबकि निगम में स्टाफ भी पूरा नहीं हैं। मुझे लगता है कि सरकार का यह सही कदम है, जिससे लोगों की परेशानी तो खत्म होगी और जनता को अपने कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
सुरेंद्र बिंद्रा, पार्षद नगर निगम अंबाला
- अंबाला में निगम बनने के बाद कई विकास कार्य हुए, मगर सत्ता में भाजपा नहीं थी और यही बात उन्हें खटक रही थी। राजनीति द्वेष के चलते निगम को भंग किया गया है और यह फैसला जनता विरोधी है। निगम भंग करने का विरोध कांग्रेस जोरशोर से उठाएगी।
परविंद्र सिंह परी, पार्षद।
- भाजपा अर्से से निगम भंग करने की तैयारी में जुटी थी। निगम गठन होने से अंबाला अर्बन एरिया के अलावा आसपास गांवों में विकास की बयार बही थी, मगर अब फिर से पुरानी व्यवस्था को लाकर शहर को वापस पीछे धकेलने का काम भाजपा कर रही है जोकि गलत है।
जरनैल सिंह माजरा, पार्षद।
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अंबाला सिटी/कैंट। अंबाला नगर निगम भंग करने को लेकर सरकार की सहमति लगभग बन गई है। जानकारी के अनुसार वीरवार को चंडीगढ़ में मंत्री मंडल की बैठक में अंबाला निगम को भंग करने पर लगभग मुहर लग गई है। आगामी दिनों में इस पर औपचारिक घोषणा हो सकती है। अंबाला में नगर निगम भंग करने के लिए भाजपा सरकार द्वारा पूरी कसरत की जा रही थी और अभी कुछ दिनों पहले ही जिला प्रशासन द्वारा निगम भंग करने को लेकर इसकी पूरी रिपोर्ट प्रदेश सरकार को सौंपी गई थी। स्थानीय स्वास्थ्य मंत्री से लेकर सिटी विधायक निगम भंग करने के पक्ष में थे और अब सरकार का यह सपना साकार हो रहा है। दूसरी ओर कांग्रेस निगम भंग करने के मुद्दे को भाजपा की घटिया मानसिकता का परिचय बता रही है। निगम मेयर से लेकर कांग्रेसी पार्षदों का कहना है कि निगम में कांग्रेस का वर्चस्व था और यही बात भाजपा की आंख में खटक रही थी। निगम का गठन शहर को आगे बढ़ाने के लिए किया गया था, मगर अब वापस इसे परिषद बनाना एक हिसाब से पीछे जाने के बराबर है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम का विरोध कांग्रेस द्वारा भविष्य में व्यापक स्तर पर किया जाएगा।
2010 में हुआ था निगम का गठन
बता दें कि अंबाला में नगर निगम का गठन वर्ष 2010 में कांग्रेस सरकार के समय हुआ था। सिटी व कैंट क्षेत्र का विलय करने के बाद आसपास क्षेत्र के 26 गांवों को भी निगम सीमा में शामिल किया गया था। निगम गठन के समय से ही अंबाला में भाजपा ने इसका विरोध जताना आरंभ कर दिया था। भाजपा का कहना था कि निगम गठन में जो मानक होने चाहिए वह अंबाला पूरा नहीं करता है। अंबाला शहरी क्षेत्र की जनसंख्या दस लाख से अधिक नहीं है और इस जनसंख्या का आंकड़ा पूरा करने के लिए आसपास के गांवों को निगम में शामिल किया गया था।
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60 वार्ड से 20 वार्ड रह गए थे
पहले अंबाला में सिटी और कैंट में अलग-अलग नगर परिषद होती थी। दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 30-30 वार्ड थे। मगर नगर निगम के गठन के बाद निगम सीमा में केवल 20 वार्ड कर दिए गए थे, यानि तीन वार्डों का एक वार्ड बना दिया गया था। काफी बड़ा क्षेत्र एक वार्ड में होने की वजह से पार्षद पूरे इलाके में निगरानी नहीं रख पाते थे और विकास कार्यों को लेकर भी शिकायतें थी।
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निगम भंग हुआ तो यह नुकसान
नगर निगम यदि भंग होता है तो इसके व्यापक नुकसान भी होंगे। निगम का बजट नगर परिषद से ज्यादा होता है और केंद्र से जो बड़ी परियोजनाएं शहर को मिलती है उसमें नगर परिषद की भागीदारी कम हो जाती है। अब तक जिले को कई बड़े प्रोजेक्ट निगम की वजह से मिले हैं।
यह बोले मंत्री और विधायक
- स्वास्थ्य एवं खेल मंत्री अनिल विज ने कहा कि मुझे इस संबंध में फिलहाल कोई जानकारी नहीं है। अंबाला में निगम भंग हुआ या नहीं इस बारे में उन्हें फिलहाल कोई अधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
- सरकार जो भी कार्य कर रही है वह जनता के अनुरूप हो रहा है। निगम में बड़ा क्षेत्र होने एक वार्ड में होने से विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित हो रहे थे। निगम को कांग्रेस ने थोपा था और यदि अब वापस परिषद का गठन होता है तो इससे जनता को बहुत लाभ मिलेगा।
असीम गोयल, विधायक, अंबाला सिटी।
यह बोले मंत्री व पार्षद
- यदि नगर निगम भंग होता है तो उसके खिलाफ आवाज उठाएंगे। भाजपा की घटिया मानसिकता के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। भाजपा के मंत्री व विधायक कोई बड़ा प्रोजेक्ट अंबाला में नहीं ला पाए इसलिए अपनी नाकामी को छिपाने के लिए वह नगर निगम को भंग कराने पर तुले हुए हैं।
मेयर, रमेश मल, नगर निगम, अंबाला।
- यह अंबाला का दुर्भाग्य है। इससे जहां विकास कार्यों पर असर पड़ेगा वहीं कई युवा बेरोजगार हो जाएंगे। आम जनता की राय ली जानी चाहिए थी। विकास कार्यों के लिए नगर निगम के कमिशनर के पास जो पावर होती हैं वह नगर पालिका के अध्यक्ष के पास नहीं होती हैं। विकास कार्यों पर भारी असर पड़ेगा। जो विकास कार्य अभी अधर में थे वह रूक जाएंगे और जो विकास कार्य पास हुए थे वह भी नहीं हो पाएंगे।
सोनिया रानी, पार्षद।
- नगर निगम बनने के बाद लाखों खर्च करने के बाद जो अंबाला सफाई के क्षेत्र में 360वें स्थान पर आया था अब उसकी हालत और खराब होगी। केंद्र की योजनाओं का कोई फायदा नगर परिषद को नहीं मिल पाएगा। निगम बनने के बाद जितना विकास अंबाला का हुआ है उतना ही परिषद बनने के बाद अंबाला फिर पिछड़ जाएगा।
हरदीप कौर, पार्षद।
- जो नई कालोनियां निगम में शामिल हुई थी वो अब फिर नगर परिषद से बाहर हो जाएंगी। जो क्षेत्र रूलर से अर्बन क्षेत्रों में शामिल हुए थे अब वह फिर रूलर में आ जाएंगे। वार्ड विकास के लिए बड़ा बजट होता था अब वह सिमट जाएगा। समाज आगे बढ़ता है, मगर भाजपा केवल ओछी राजनीति करते हुए प्रदेश को पीछे धकेलने का प्रयास कर रही है। निगम भंग होता है तो इसका विरोध हर स्तर पर जोरदार तरीके से किया जाएगा।
चित्रा सरवारा, पार्षद।
- नगर निगम को भंग करना एक गलत काम है। यदि इसे बनाया गया है, तो चलाना चाहिए था, जबकि भाजपा ने तो इसे चलाने में एक तरह से अपने हाथ ही खड़े किए हैं। नगर निगम भंग होने से विकास कार्य प्रभावित होंगे, जबकि मिलने वाले फंड पर भी असर पड़ेगा।
दुर्गा सिंह अत्री, सीनियर डिप्टी मेयर नगर निगम अंबाला
- सरकार की मर्जी है, वह जो भी कर ले। मेरे हिसाब से तो यह गलत कदम है, जबकि सरकार को चाहिए था कि निगम में मेयर को शक्तियां दी जाती। यदि ऐसा कदम उठाना ही है, तो कम से कम निगम का कार्यकाल तो पूरा करवाया जाता।
- सुधीर जायसवाल, डिप्टी मेयर नगर निगम अंबाला
- कैंट व सिटी में काफी दूरी है, जबकि निगम में स्टाफ भी पूरा नहीं हैं। मुझे लगता है कि सरकार का यह सही कदम है, जिससे लोगों की परेशानी तो खत्म होगी और जनता को अपने कार्यों के लिए भटकना नहीं पड़ेगा।
सुरेंद्र बिंद्रा, पार्षद नगर निगम अंबाला
- अंबाला में निगम बनने के बाद कई विकास कार्य हुए, मगर सत्ता में भाजपा नहीं थी और यही बात उन्हें खटक रही थी। राजनीति द्वेष के चलते निगम को भंग किया गया है और यह फैसला जनता विरोधी है। निगम भंग करने का विरोध कांग्रेस जोरशोर से उठाएगी।
परविंद्र सिंह परी, पार्षद।
- भाजपा अर्से से निगम भंग करने की तैयारी में जुटी थी। निगम गठन होने से अंबाला अर्बन एरिया के अलावा आसपास गांवों में विकास की बयार बही थी, मगर अब फिर से पुरानी व्यवस्था को लाकर शहर को वापस पीछे धकेलने का काम भाजपा कर रही है जोकि गलत है।
जरनैल सिंह माजरा, पार्षद।