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फर्जी आरसी बनाई थी, चार साल धरे गए
जींद/ब्यूरो
Updated Sun, 06 Oct 2013 09:10 PM IST
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डीटीओ कार्यालय के साथ मिलकर कई साल पहले वाहनों के रजिस्ट्रेशन के बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने के दो आरोपियों रामनिवास उर्फ रामू और सतीश को रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया गया।
ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने दोनों को 19 अक्तूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। दोनों ने दो दिन के पुलिस रिमांड के दौरान यह बात मानी कि उन्होंने 30 गाड़ियों की फर्जी आरसी बनाकर बेची थी।
कार से लेकर ट्रक और जीप और इस तरह के दूसरे वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जींद में कई साल पहले थोक में तैयार किए गए थे। बाहर की गाड़ियों को जींद में फर्जीवाड़े के जरिए पास कर दिया जाता था। इस काम में फर्जी राशन कार्ड से लेकर दूसरे कागजात का इस्तेमाल किया जाता था।
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डीटीओ कार्यालय की मोहर से लेकर दस्तख्त तक सब फर्जी होते थे। इसके तहत जींद में 100 से ज्यादा वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए थे। शहर थाना पुलिस ने इस सिलसिले में 2009 में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें जींद के रामनिवास उर्फ रामू, सतीश के अलावा नरवाना के ओमप्रकाश उर्फ ओमी, पंजाब के पातड़ां की सुखविंदर उर्फ सुखी तथा पंजाब के ही मानसा के चंद्रमोहन उर्फ ओमी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
शहर थाना पुलिस जब इस मामले की तह तक नहीं जा पाई थी, तब यह मामला जांच के लिए स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने 4 साल पुराने इस मामले में दो दिन पहले जींद के रामनिवास उर्फ रामू तथा सतीश को गिरफ्तार किया था। दोनों से स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने दो दिन तक गहन पूछताछ की।
इस पूछताछ में रामू और सतीश ने बताया कि उन्होंने कुल 30 गाड़ियों की फर्जी आरसी तैयार की थी। इस काम को उन्होंने फर्जी कागजात के आधार पर अंजाम दिया था। पूछताछ में स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने दोनों से उन गाड़ियों का विस्तृत ब्यौरा जुटाया। स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमनीत की अदालत में पेश किया। जहां से दोनों को 19 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।
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ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने दोनों को 19 अक्तूबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। दोनों ने दो दिन के पुलिस रिमांड के दौरान यह बात मानी कि उन्होंने 30 गाड़ियों की फर्जी आरसी बनाकर बेची थी।
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कार से लेकर ट्रक और जीप और इस तरह के दूसरे वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट जींद में कई साल पहले थोक में तैयार किए गए थे। बाहर की गाड़ियों को जींद में फर्जीवाड़े के जरिए पास कर दिया जाता था। इस काम में फर्जी राशन कार्ड से लेकर दूसरे कागजात का इस्तेमाल किया जाता था।
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डीटीओ कार्यालय की मोहर से लेकर दस्तख्त तक सब फर्जी होते थे। इसके तहत जींद में 100 से ज्यादा वाहनों के फर्जी रजिस्ट्रेशन तैयार किए गए थे। शहर थाना पुलिस ने इस सिलसिले में 2009 में एफआईआर दर्ज की थी। इसमें जींद के रामनिवास उर्फ रामू, सतीश के अलावा नरवाना के ओमप्रकाश उर्फ ओमी, पंजाब के पातड़ां की सुखविंदर उर्फ सुखी तथा पंजाब के ही मानसा के चंद्रमोहन उर्फ ओमी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
शहर थाना पुलिस जब इस मामले की तह तक नहीं जा पाई थी, तब यह मामला जांच के लिए स्टेट क्राइम ब्रांच को सौंपा गया था। स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने 4 साल पुराने इस मामले में दो दिन पहले जींद के रामनिवास उर्फ रामू तथा सतीश को गिरफ्तार किया था। दोनों से स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने दो दिन तक गहन पूछताछ की।
इस पूछताछ में रामू और सतीश ने बताया कि उन्होंने कुल 30 गाड़ियों की फर्जी आरसी तैयार की थी। इस काम को उन्होंने फर्जी कागजात के आधार पर अंजाम दिया था। पूछताछ में स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने दोनों से उन गाड़ियों का विस्तृत ब्यौरा जुटाया। स्टेट क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें रविवार को ड्यूटी मजिस्ट्रेट अमनीत की अदालत में पेश किया। जहां से दोनों को 19 अक्तूबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।