इलाज के बाद भी नहीं ठीक हो रहा घाव: गाय में लंपी वायरस के लक्षण, पशुपालक परेशान
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वीपी सिंह का कहना है कि इस बीमारी के जिले में अभी तक फैलने की सूचना नही है। इसका इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। यदि किसी पशु में लक्षण की संभावना है तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से दूर करें।
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गोरखपुर जिले के बेलघाट विकास खंड के बभनौली गांव की एक गाय में लंपी वायरस के लक्षण मिले हैं। इससे पशुपालक परेशान हैं। पशुपालन विभाग के डॉक्टर पिछले 15 दिनों से इलाज कर रहे हैं, फिर भी गाय पूरी तरह से ठीक नहीं हुई है। इसके बावजूद सैंपल जांच के लिए नहीं भेजा गया। हालांकि, लंपी संक्रमण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
जानकारी के मुताबिक, गाय बभनौली गांव के अजय कुशवाहा की है। कुछ दिन पहले गाय के शरीर के कई हिस्से में गांठ दिखाई पड़ी। बुखार भी हुआ। देखते ही देखते गांठ पक गई और घाव हो गया। इसकी जानकारी पशुपालन विभाग के स्थानीय अधिकारियों को दी गई। आशंका व्यक्त की गई कि लंपी वायरस का अटैक हो सकता है।
डॉक्टर आए और गाय का इलाज भी चल रहा है, लेकिन वह पूरी तरह से ठीक नहीं है। शरीर पर घाव बने हुए हैं। इलाज करने वाले डॉक्टर ने लंपी वायरस के चपेट में आने की संभावना व्यक्त की थी, पर जांच के लिए सैंपल नहीं भेजा गया।
पशु चिकित्साधिकारी वीपी सिंह ने कहा कि एलर्जी की वजह से भी पशुओं के शरीर में गांठ पड़ जाती है। दवा देने पर ठीक हो जाता है। लेकिन, 15 दिनों में गांठ का ठीक न होना चिंतित करने वाला है।
जहां पशु रहें, वहां साफ-सफाई हो
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी वीपी सिंह का कहना है कि इस बीमारी के जिले में अभी तक फैलने की सूचना नही है। इसका इलाज लक्षण के आधार पर किया जाता है। यदि किसी पशु में लक्षण की संभावना है तो उसे तुरंत अन्य पशुओं से दूर करें। इस बीमारी की रोकथाम के लिए तीन दिवसीय कार्यशाला का आयोजन विकास भवन में किया गया है। सभी पशु चिकित्सकों को बुलाकर इसके बारे में जानकारी दी जा रही है। जहां पशु रहते हैं, वहां साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए।
ये होते हैं लक्षण
लंपी बीमारी गो-वंश को प्रभावित करती है। देशी गो-वंश की तुलना में संकर नस्ल की गायों में इस रोग के फैलने की संभावना अधिक रहती है। लंपी होने पर पशु को बुखार होता है। शरीर में कई स्थानों पर गांठ पड़ जाते हैं। बाद में गांठ पक कर फोड़ा का रूप ले लेते हैं। इसके फैलने का मुख्य कारण मच्छर, मक्खी व किलनी है। यह रोग गंदगी की वजह से भी पशुओं में होता है। बीमारी का प्रसार संक्रमित पशु के नाक से स्राव, दूषित आहार और पानी से भी होता है।