विश्व टीबी दिवस: फेफड़े वाली TB से पांच से सात प्रतिशत मरीजों की जा रही जान, बीआरडी पहुंच रहे मरीज
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि बीआरडी में गोरखपुर मंडल से मरीज आते हैं। इनमें सबसे अधिक कुशीनगर और महराजगंज के हैं, जिन्हें फेफड़े वाली टीबी की दिक्कते हैं। इसके अलावा बिहार के बेतिया से भी मरीजों की संख्या अधिक है।
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फेफड़े की टीबी (एक्सटेंसिव प्लमोनरी टीबी) मरीजों के लिए जानेलवा साबित हो रही है। इससे हर साल पांच से सात प्रतिशत मरीजों की जान जा रही है। चिंता की बात यह है कि इसके मरीज दोनों फेफड़े खराब होने के बाद बीआरडी में इलाज के लिए पहुंच रहे हैं।
वहीं, निजी चिकित्सकों के पास बलगम में खून (हिमोटिप्सिस) आने वाले टीबी के मरीज इलाज के लिए जा रहे हैं। इनकी संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि एमडीआर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जो चिंता का विषय है।
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हर साल 500 से 600 मरीज एमडीआर के बीआरडी में आ रहे हैं। इनमें 90 फीसदी मरीजों में फेफड़े की टीबी की शिकायत है। एक मरीज पर 12 से 18 माह की दवा पर तीन से चार लाख रुपये खर्च हो रहा है, जो बीआरडी में निशुल्क है।
कुशीनगर और महराजगंज के सबसे अधिक मरीज
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि बीआरडी में गोरखपुर मंडल से मरीज आते हैं। इनमें सबसे अधिक कुशीनगर और महराजगंज के हैं, जिन्हें फेफड़े वाली टीबी की दिक्कते हैं। इसके अलावा बिहार के बेतिया से भी मरीजों की संख्या अधिक है।
एक नजर आंकड़ों पर
| वर्ष | मरीजों की संख्या |
| 2018 | 8795 |
| 2019 | 13482 |
| 2020 | 10687 |
| 2021 | 13361 |
| 2022 | 15408 |
| 2023 | 5202 |
यह आंकड़े फरवरी तक के हैं।