World Rabies Day 2020: गोरखपुर में हर साल 55 हजार लोगों को काट रहे कुत्ते, जानिए कब होता है ज्यादा खतरा
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गोरखपुर जिला अस्पताल के आंकड़ों के मुताबिक जिले में हर साल करीब 55 हजार लोगों को कुत्ते काट रहे हैं। इनमें से 15 से 18 हजार लोगों को एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगाई जा रही है। जबकि करीब 25 ऐसे लोग भी होते हैं जिन्हें एआरवी के साथ इम्युनोग्लोबुलिन भी लगाना पड़ रहा है। सीएमओ का दावा है कि सरकारी अस्पतालों में एंटी रेबीज वैक्सीन की कमी नहीं है।
जिला अस्पताल में शनिवार को 157 लोग एंटी रेबीज वैक्सीन (एआरवी) लगवाने पहुंचे थे। जिला अस्पताल के एसआईसी डॉ. एसी श्रीवास्तव ने बताया कि अस्पताल में एंटी रेबीज वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। उन्होंने बताया कि जिस व्यक्ति को कुत्ता काट ले उसे चार एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाया जाता है। एक उस दिन जिस दिन कुत्ते ने काटा, दूसरा काटने के तीसरे दिन, तीसरा सातवें दिन और चौथा 28वें दिन लगवाना चाहिए। सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि लॉकडाउन में सीएचसी और पीएचसी में एंटी रैबीज वैक्सीन नहीं लगाई जा रही थी। अब यहां से पाबंदी हटा दी गई है। अब यहां भी वैक्सीन के टीके लगाए जा रहे हैं।
गर्दन के ऊपर काटे कुत्ता तो खतरा ज्यादा
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अगर किसी को कुत्ता गर्दन के ऊपर काटता है तो यह ज्यादा खतरनाक है। ऐसे लोगों की संख्या साल में 20 से 25 के आसपास होती है। ऐसे लोगों को एआरवी के साथ-साथ इम्युनोग्लोबुलिन का डोज दिया जाता है। इससे मरीज के ब्रेन पर संक्रमण का असर कम पड़ता है। अगर यह डोज न दी जाए तो मरीज के दिमाग पर वायरस असर कर जाता है।
केवल 0.25 प्रतिशत कुत्ते होते हैं रैपिड
सीएमओ डॉ. श्रीकांत तिवारी ने बताया कि आमतौर पर 0.25 प्रतिशत कुत्ते ही रैपिड होते हैं, जिनके काटने से रैबीज होता है। पालतू कुत्तों के काटने से रैबीज की आशंका न के बराबर होती है, क्योंकि पालतू कुत्तों को लोग पहले ही एंटी रैबीज वैक्सीन लगवा देते हैं।
कुत्ते के काटने पर वैक्सीन जरूर लगवाएं
डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि यदि किसी को कुत्ते ने काट लिया है और वह एंटी रेबीज वैक्सीन नहीं लगवाता है तो वह अपनी जान से खेल रहा होता है। उन्होंने बताया कि कुत्तों के काटने का तत्काल प्रभाव नहीं पड़ता है। जैसे-जैसे समय बीतता है वैसे-वैसे शरीर में संक्रमण बढ़ता जाता है। ऐसे में मरीज के शरीर में क्या परिवर्तन हो जाए यह किसी को नहीं पता। इसलिए कुत्ते के काटने पर तत्काल एआरवी जरूर लगवाएं।
लॉकडाउन में आक्रामक हो गए थे कुत्ते, अब बदला व्यवहार
भूख और प्यास से बेहाल कुत्ते लॉकडाउन में अधिक आक्रामक हो गए थे। अनलॉक में कुत्तों के व्यवहार में फिर बदलाव देखने को मिल रहा है। कुत्ते अब ज्यादा खतरनाक नहीं रह गए हैं। अनलॉक में रोजाना करीब 150 मरीज वैक्सीन लगवाने आ रहे हैं, जबकि लॉकडाउन के दौरान यह संख्या 200 के आसपास थी।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. डीके शर्मा ने बताया कि अनलॉक में सब कुछ खुल गया है। ऐसे में अब कुत्तों को खाना-पीना मिलना शुरू हो गया है। रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड की दुकानें खुल गई हैं। गली-मोहल्लों के आवारा कुत्तों को अब खाना मिल जा रहा है। यही वजह है कि अब कुत्तों के व्यवहार में बदलाव आ गया है। जिला अस्पताल के डॉ. राजेश कुमार ने बताया कि अब कुत्ते ज्यादा आक्रामक नहीं हर गए हैं। शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों से मरीज ज्यादा आ रहे हैं।