विश्व तंबाकू निषेध दिवस: अगर तंबाकू का कर रहे हैं सेवन तो हो जाए सावधान, कई युवाओं की जा चुकी है जान
डॉक्टर बोले, युवा और बुजुर्ग न करें सेवन, देश में हर साल करीब 12 लाख लोग यानि करीब तीन हजार लोग हर रोज कैंसर से तोड़ देते हैं दम।
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बीड़ी-सिगरेट व अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन करने वाले लोग न केवल अपने जीवन से खिलवाड़ करते हैं बल्कि घर-परिवार की जमा पूंजी को भी इलाज पर फूंक देते हैं। इसके बाद भी लोग इसे लेकर जागरूक नहीं है। इन सबके बीच कोरोना महामारी की दूसरी लहर में इसका महत्व और बढ़ जाता है। क्योंकि पहली लहर में कई तंबाकू का सेवन करने वाले लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसके अलावा दूसरी लहर में कई लोगों की इससे मौत भी हो चुकी है। विशेषज्ञों की मानें तो तंबाकू का सेवन करने वाले लोगों को कोरोना का खतरा सबसे ज्यादा है। 31 मई को विश्व तंबाकू निषेध दिवस मनाया जाता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि कोरोना महामारी के बीच तंबाकू का सेवन और भी खतरनाक है। संक्रमित व्यक्ति अगर तंबाकू या फिर पान मसाला का सेवन करता हैं, तो वह कई लोगों को संक्रमण का शिकार बना सकता है।
इसके अलावा हर साल हजारों लोग खाने से कैंसर का शिकार होते हैं। बताया कि देश में हर साल करीब 12 लाख लोग यानि करीब तीन हजार लोग हर रोज कैंसर से दम तोड़ देते हैं। सरकार और स्वास्थ्य विभाग इन आंकड़ों को कम करने का हर संभव प्रयास कर रही है। लेकिन इस पर अंकुश नहीं लग पा रहा है।
तंबाकू का सेवन करने वालों को कोरोना का खतरा ज्यादा
डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि धूम्रपान करने वालों के फेफड़ों तक तो करीब 30 फीसद ही धुंआ पहुंचता है। यहीं धुंआ उनके फेफ ड़ों को नुकसान पहुंचाता है। ऐसे लोगों को कोरोना के वायरस ज्यादा तेजी से असर करते हैं। इसके अलावा 70 फीसदी धुंआ अन्य लोगों को नुकसान पहुंचाता है।
इतना ही नहीं तंबाकू का सेवन करने वालों को करीब 40 तरह के कैंसर और अन्य 25 गंभीर बीमारियों की चपेट में आने की संभावना रहती है। इसमें मुंह और गले का कैंसर सबसे अधिक है। इसके अलावा नपुंसकता का भी खतरा अधिक है। तंबाकू का सेवन करने वाले कई लोग संक्रमण का शिकार भी हो चुके हैं।
कई युवाओं की हो चुकी है मौत
दूसरी लहर में कई युवा ऐसे भी रहे, जो कोरोना की चपेट में आए। जांच में उनके सीने में संक्रमण अधिक मिला है। यह युवा सिगरेट ज्यादा पीते थे। इसकी वजह से फेफड़ों को दोहरा नुकसान हुआ। एक तरफ संकमण का तो दूसरी तरफ सिगरेट का। यही वजह है कि ऐसे युवाओं को बचाया नहीं जा सका। ऐसे युवाओं की संख्या करीब 20 के आसपास रही है।