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World Environment Day 2021: कभी मशहूर थीं छोटी लाइनें, अब 73 फीसदी रेल ट्रैक पर विद्युतीकरण

Sat, 05 Jun 2021 03:54 PM IST
vivek shukla अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 05 Jun 2021 03:54 PM IST
सार

पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए डीजल की जगह इलेक्ट्रिक इंजन से ट्रेन चलाने पर काम। पौधरोपण, बायोटॉयलेट लगाने में भी पूर्वोत्तर रेलवे का जोर।
 

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World Environment Day 2021 running trains with electric locomotive instead of diesel to make environment friendly
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

पर्यावरण को अनुकूल बनाने के लिए पूर्वोत्तर रेलवे में ढेर सारे कार्य किए जा रहे हैं। कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए जहां डीजल इंजन की जगह इलेक्ट्रिक इंजन के जरिये ट्रेन चलाने पर जोर है, वहीं इस वर्ष आठ लाख पौधे लगाने का भी लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा पटरियों पर टॉयलेट की गंदगी न गिरे, इसके लिए ट्रेनों में बायोटॉयलेट लगाए जा रहे हैं।
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कभी ‘छोटी लाइन’ के नाम से प्रसिद्ध पूर्वोत्तर रेलवे में वर्ष 2014- 15 के पहले 24 किलोमीटर रेलखंड ही विद्युतीकृत हो पाया था। मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह के मुताबिक अब 2287 किमी रेलखंड को विद्युतीकृत कर लिया गया है। यह पूर्वोत्तर रेलवे पर बड़ी लाइन का 73 प्रतिशत है। 
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विगत दो वित्त वर्षों 2019-20 एवं 2020-21 में पूर्वोत्तर रेलवे विद्युतीकरण में संपूर्ण भारतीय रेल पर द्वितीय स्थान पर रहा है। सभी बड़ी लाइनों को विद्युतीकृत करने का लक्ष्य दिसंबर 2023 तक है। इसके अलावा ‘हेड ऑन जेनरेशन’ (एचओजी) व्यवस्था के अंतर्गत कोचों में बिजली की सप्लाई, ओवरहेड इक्विपमेंट से इलेक्ट्रिक लोकमोटिव के माध्यम से की जा रही है। पूर्वोत्तर रेलवे से कुल 34 ट्रेनों को एचओजी युक्त कर चलाया जा रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 में लगभग 21 करोड़ के ईंधन की बचत हुई है तथा कार्बन उत्सर्जन मेंभी कमी आई है।
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3355 कोचों में लगा बायो-टॉयलेट

‘स्वच्छता’ पर्यावरण संरक्षण का एक प्रमुख अंग है। पूर्वोत्तर रेलवे पर 3355 कोचों मेंबायो-टॉयलेट लगाया गया है, शेष बचे 14 डबल डेकर कोच में से 5 कोचों मेंबायो-टॉयलेट लगा दिया गया है बाकी में भी कार्य प्रगति पर है। स्वच्छता कार्यक्रम के अंतर्गत पूर्वोत्तर रेलवे द्वारा वर्ष 2020-21 मेंरिकार्ड स्क्रैप निस्तारण कर सम्पूर्ण भारतीय रेल पर प्रथम स्थान पर रहा।

25 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन
पूर्वोत्तर रेलवे के कार्यालय भवनों एवं स्टेशनों पर सौर ऊर्जा के पैनल लगाए गए हैं जिससे लगभग 25 लाख यूनिट सौर ऊर्जा का उत्पादन किया गया। करीब एक करोड़ की बचत हुई है। इसी प्रकार जल संरक्षण की लिए ऐसे सभी भवन जहां छत का क्षेत्रफल 200 वर्ग मीटर से ज्यादा है वहाँ ‘रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम’ लगाया जा रहा है। रेलवे के ज्यादातर भवनों मेंयह व्यवस्था क्रियाशील है।

आठ लाख पौधे लगाने का लक्ष्य
वर्ष 2020-21 में कुल नौ लाख पौधे लगाए गए हैं। इस वर्ष भी आठ लाख पौधों को लगाए जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसका शुभारंभ पांच जून यानी कि पर्यावरण दिवस के अवसर से किया जाएगा। पौधों के बेहतर रखरखाव के लिए नवप्रयोग के तौर पर पौधे के साथ उसे लगाने वाले अधिकारी व कर्मचारी का नेम प्लेट भी लगा दिया जाता है। पूर्वोत्तर रेलवे के तीनों मंडलों मेंरेलपथ के किनारे खाली पड़ी भूमि पर तीन-तीन ग्रीन नर्सरियां भी विकसित की गई हैं।
 
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