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World Disability Day 2020: पूर्वांचल के दिव्यांग बच्चों को बीआरडी में मिलेंगी हर सुविधाएं, जानिए कैसे
Thu, 03 Dec 2020 01:04 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Thu, 03 Dec 2020 01:04 PM IST
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बीआरडी मेडिकल कॉलेज।
- फोटो : अमर उजाला।
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पूर्वांचल के दिव्यांग बच्चों को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में हर सुविधाएं मिलेंगी। मेडिकल कॉलेज में समेकित क्षेत्रीय कौशल विकास पुनर्वास एवं दिव्यांग जन सशक्तिकरण केंद्र (सीआरसी) का नया भवन बनाया जा रहा है। इस भवन में दिव्यांग बच्चों को हर सुविधाएं मिलेंगी।
मेडिकल कॉलेज में 26 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे भवन में इलाज के साथ ही दिव्यांग बच्चों व उनके माता-पिता की सुविधा के लिए आवास भी बनाया जा रहा है। ऐसे में अभिभावक बच्चों के साथ ठहरकर उनका इलाज करा सकेंगे। इसके अलावा थेरेपी और शिक्षा के लिए अलग-अलग यूनिटों का निर्माण भी किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि छह माह में भवन तैयार हो जाएगा। इसके बाद दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
प्रदेश का पहला डिप्लोमा कोर्स होगा शुरू
सीआरसी में जनवरी से दो कोर्स शुरू किए जाएंगे। बहु दिव्यांगता में डिप्लोमा, प्रदेश का पहला और देश का दूसरा पाठ्यक्रम होगा। इसके अलावा सर्टिफिकेट कोर्स इन केयर गिविंग भी शुरू किया जाएगा। भारत सरकार ने इसकी मान्यता दे दी है। सर्टिफिकेट कोर्स तो दिव्यांग बच्चों के अभिभावक भी कर सकते हैं। कोर्स करने के बाद वह बच्चों की देखभाल भी कर सकेंगे। साथ ही कहीं नौकरी भी कर सकते हैं। इसके लिए शैक्षिक योग्यता 10वीं है।
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मेडिकल कॉलेज में 26 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे भवन में इलाज के साथ ही दिव्यांग बच्चों व उनके माता-पिता की सुविधा के लिए आवास भी बनाया जा रहा है। ऐसे में अभिभावक बच्चों के साथ ठहरकर उनका इलाज करा सकेंगे। इसके अलावा थेरेपी और शिक्षा के लिए अलग-अलग यूनिटों का निर्माण भी किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि छह माह में भवन तैयार हो जाएगा। इसके बाद दिव्यांग बच्चों और उनके अभिभावकों को कहीं भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
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प्रदेश का पहला डिप्लोमा कोर्स होगा शुरू
सीआरसी में जनवरी से दो कोर्स शुरू किए जाएंगे। बहु दिव्यांगता में डिप्लोमा, प्रदेश का पहला और देश का दूसरा पाठ्यक्रम होगा। इसके अलावा सर्टिफिकेट कोर्स इन केयर गिविंग भी शुरू किया जाएगा। भारत सरकार ने इसकी मान्यता दे दी है। सर्टिफिकेट कोर्स तो दिव्यांग बच्चों के अभिभावक भी कर सकते हैं। कोर्स करने के बाद वह बच्चों की देखभाल भी कर सकेंगे। साथ ही कहीं नौकरी भी कर सकते हैं। इसके लिए शैक्षिक योग्यता 10वीं है।
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