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विश्व बाल श्रम निषेध दिवस 2021: गोरखपुर में दो वर्ष में 700 बच्चों को मजदूरी से कराया गया मुक्त, इस खास योजना से मिल रही मदद
Sat, 12 Jun 2021 02:12 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 12 Jun 2021 02:12 PM IST
सार
बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के लिए श्रम विभाग की ओर से चलाई जा रही है नया सवेरा योजना। बाल श्रमिकों के परिजनों को भी दिलाया जा रहा श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
गोरखपुर जिले को बाल श्रम से मुक्त करने में श्रम विभाग लगातार कार्य कर रहा है। इसी का नतीजा है कि पिछले दो सालों में लगभग 700 बाल श्रमिकों को मुक्त कराते हुए उन्हें शिक्षा से जोड़ने के साथ ही उनके परिजनों को श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ दिलाया गया है।
श्रम विभाग की ओर से बाल श्रमिकों के उत्थान के लिए चलाई जा रही नया सवेरा योनजा की तकनीकी सलाकार यूनिसेफ की सितारा सिद्दीकी ने बताया कि श्रम विभाग बाल श्रमिकों को चिंहित कर उन्हें शिक्षित कराने के साथ ही उनके परिवार को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
बताया कि श्रम विभाग की ओर से संचालित नया सवेरा योजना के अंतर्गत गोरखपुर में 2019-20 में बाल श्रमिक बच्चों का सर्वेक्षण गैर सरकारी संस्था के द्वारा नगर निगम के 15 वार्डों में कराया गया। जिसमें छह से 18 वर्ष के कुल 593 बच्चों को चिंहित किया गया। जिसमें शिक्षा विभाग के सहयोग से 474 बच्चों का नामांकन सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में कराया गया।
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वहीं 280 बच्चों को बाल श्रमिक विद्या योजना से जोड़ा गया। इसके साथ ही 414 श्रमिक परिवारों को बीओसीडब्लू की योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभांवित कराया जा रहा है। बताया कि इसी तरह 2020-21 में नया सवेरा योजना के अंतर्गत नगर निगम के 28 वार्डों में बाल श्रमिक बच्चों का सर्वेक्षण कार्य गैर सरकारी संगठन सैफ सोसायटी द्वारा कराया जा रहा है। जिसमें अबतक 105 बाल श्रमिक बच्चों को चिंहित किया जा चुका है।
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श्रम विभाग की ओर से बाल श्रमिकों के उत्थान के लिए चलाई जा रही नया सवेरा योनजा की तकनीकी सलाकार यूनिसेफ की सितारा सिद्दीकी ने बताया कि श्रम विभाग बाल श्रमिकों को चिंहित कर उन्हें शिक्षित कराने के साथ ही उनके परिवार को विभिन्न योजनाओं से जोड़ने का कार्य कर रहा है।
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बताया कि श्रम विभाग की ओर से संचालित नया सवेरा योजना के अंतर्गत गोरखपुर में 2019-20 में बाल श्रमिक बच्चों का सर्वेक्षण गैर सरकारी संस्था के द्वारा नगर निगम के 15 वार्डों में कराया गया। जिसमें छह से 18 वर्ष के कुल 593 बच्चों को चिंहित किया गया। जिसमें शिक्षा विभाग के सहयोग से 474 बच्चों का नामांकन सरकारी व गैर सरकारी विद्यालयों में कराया गया।
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वहीं 280 बच्चों को बाल श्रमिक विद्या योजना से जोड़ा गया। इसके साथ ही 414 श्रमिक परिवारों को बीओसीडब्लू की योजनाओं से जोड़कर उन्हें लाभांवित कराया जा रहा है। बताया कि इसी तरह 2020-21 में नया सवेरा योजना के अंतर्गत नगर निगम के 28 वार्डों में बाल श्रमिक बच्चों का सर्वेक्षण कार्य गैर सरकारी संगठन सैफ सोसायटी द्वारा कराया जा रहा है। जिसमें अबतक 105 बाल श्रमिक बच्चों को चिंहित किया जा चुका है।
बाल श्रमिकों को शिक्षित बनाती है बाल श्रमिक विद्या योजना
गरीबी और मजबूरी के कारण अक्सर बच्चे कम उम्र में मजदूरी करके अपने और परिवार के पेट भरने के लिए कहीं होटलों पर जूठे बर्तन धुलते, कभी रिक्शा और ठेला खींचते तो कभी ईंट-भट्टों व भवन निर्माण में ईंट-गारे का काम करते नजर आते हैं। इन सब के बीच सबसे ज्यादा नुकसान बच्चे का ही होता है। श्रम करके यह बच्चे जीवन में सबसे महत्पवपूर्ण शिक्षा से वंचित हो जाते हैं। इसी कमी को दूर करने के लिए बाल श्रमिक विद्या योजना चल रही है। यह योजना बच्चों को शिक्षित बनाने के साथ ही उन्हें आगे बढ़ने के लिए छात्रवृत्ति भी उपलब्ध कराती है।
शिक्षा के साथ मिलती है छात्रवृत्ति
उपश्रमायुक्त अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि बाल श्रमिक विद्या योजना के अंतर्गत शिक्षा ग्रहण करने पर बाल श्रमिकों को हर महीने एक हजार रुपये और लड़कियों को 1200 रुपये मिलते हैं। कक्षा 8, 9 और 10 पास करने पर अलग से छह हजार रुपये दिए जाते हैं। बताया कि बाल मजदूर शिक्षा के मंदिर तक पहुंच जाए इसके लिए सरकार ने उसके मां-बाप को प्रोत्साहित करते हुए सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का निर्देश दिए हैं। जिसमें अंत्योदय, पेंशन और आयुष्मान जैसी योजनाएं शामिल हैं।
ये है पात्रता
उपश्रमायुक्त अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि योजना के अंतर्गत संगठित तथा असंगठित क्षेत्र के सभी बाल श्रमिकों को योजना लाभ मिलेगा। उन बाल श्रमिकों को वरीयता मिलेगी जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हो या माता-पिता में से किसी एक कि मृत्यु हो चुकी हो। जिनके मां-बाप दिव्यांग हैं उन्हें भी योजना का विशेष लाभ मिलेगा।
शिक्षा के साथ मिलती है छात्रवृत्ति
उपश्रमायुक्त अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि बाल श्रमिक विद्या योजना के अंतर्गत शिक्षा ग्रहण करने पर बाल श्रमिकों को हर महीने एक हजार रुपये और लड़कियों को 1200 रुपये मिलते हैं। कक्षा 8, 9 और 10 पास करने पर अलग से छह हजार रुपये दिए जाते हैं। बताया कि बाल मजदूर शिक्षा के मंदिर तक पहुंच जाए इसके लिए सरकार ने उसके मां-बाप को प्रोत्साहित करते हुए सरकार की सभी जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ देने का निर्देश दिए हैं। जिसमें अंत्योदय, पेंशन और आयुष्मान जैसी योजनाएं शामिल हैं।
ये है पात्रता
उपश्रमायुक्त अमित कुमार मिश्रा ने बताया कि योजना के अंतर्गत संगठित तथा असंगठित क्षेत्र के सभी बाल श्रमिकों को योजना लाभ मिलेगा। उन बाल श्रमिकों को वरीयता मिलेगी जिनके माता-पिता की मृत्यु हो चुकी हो या माता-पिता में से किसी एक कि मृत्यु हो चुकी हो। जिनके मां-बाप दिव्यांग हैं उन्हें भी योजना का विशेष लाभ मिलेगा।