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गोरखपुर: गुआक्टा विश्वविद्यालय के खिलाफ खोलेगा मोर्चा, रुपये कम देने पर है संगठन नाराज
Mon, 31 Oct 2022 11:28 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 31 Oct 2022 11:28 AM IST
सार
गुआक्टा के महामंत्री प्रोफेसर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहा है। मिडटर्म परीक्षा के लिए मनमानी की जा रही है। इससे शिक्षक तो परेशान होंगे ही छात्रों को भी परेशानी होगी। जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी दी गई है, लेकिन उनकी तरफ से कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है।
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DDU Gorakhpur
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय की मिडटर्म परीक्षा के संबंध में संबद्ध महाविद्यालयों के शिक्षकों का संगठन गुआक्टा आंदोलन के मूड में आ गया है। संगठन से जुड़े शिक्षक परीक्षा और मूल्यांकन नहीं करने की तैयारी कर रहे हैं। संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि बिना पढ़ाए ही परीक्षा कराई जा रही है। इसका नुकसान विद्यार्थियों को होगा। विश्वविद्यालय का ध्यान इस पर नहीं जा रहा है।
गुआक्टा के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ही दिन में चार पाली की परीक्षा आयोजित कर विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को परेशान करने में जुट गया है। इस वजह से शिक्षकों को अतिरिक्त काम करने होंगे। यही नहीं मूल्यांकन का पारिश्रमिक भी कम करके शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
पदाधिकारियों की नाराजगी विश्वविद्यालय से नोडल केंद्रों को परीक्षा के बाद रुपये न दिए जाने को लेकर भी है। इसका विरोध जताया गया है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि इस मामले को लेकर आगे आएं, जिससे कि विश्वविद्यालय की मनमानी को रोका जा सके।
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गुआक्टा के महामंत्री प्रोफेसर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहा है। मिडटर्म परीक्षा के लिए मनमानी की जा रही है। इससे शिक्षक तो परेशान होंगे ही छात्रों को भी परेशानी होगी। जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी दी गई है, लेकिन उनकी तरफ से कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है। लेकिन संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेगा।
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गुआक्टा के पदाधिकारियों का कहना है कि एक ही दिन में चार पाली की परीक्षा आयोजित कर विश्वविद्यालय ने महाविद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों को परेशान करने में जुट गया है। इस वजह से शिक्षकों को अतिरिक्त काम करने होंगे। यही नहीं मूल्यांकन का पारिश्रमिक भी कम करके शिक्षकों के साथ अन्याय किया जा रहा है।
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पदाधिकारियों की नाराजगी विश्वविद्यालय से नोडल केंद्रों को परीक्षा के बाद रुपये न दिए जाने को लेकर भी है। इसका विरोध जताया गया है। इसके बाद भी विश्वविद्यालय प्रशासन कोई ध्यान नहीं दे रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने जनप्रतिनिधियों से अपील की है कि इस मामले को लेकर आगे आएं, जिससे कि विश्वविद्यालय की मनमानी को रोका जा सके।
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गुआक्टा के महामंत्री प्रोफेसर धीरेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन मनमानी कर रहा है। मिडटर्म परीक्षा के लिए मनमानी की जा रही है। इससे शिक्षक तो परेशान होंगे ही छात्रों को भी परेशानी होगी। जनप्रतिनिधियों को भी जानकारी दी गई है, लेकिन उनकी तरफ से कोई रुचि नहीं दिखाई जा रही है। लेकिन संगठन विश्वविद्यालय प्रशासन की मनमानी को बर्दाश्त नहीं करेगा।