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Gorakhpur News: बेइंतहा दर्द पर लगाएंगे अपनेपन का मरहम...शांति से गुजर जाएगा अंतिम वक्त

Fri, 26 Jul 2024 06:44 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 26 Jul 2024 06:44 AM IST
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Will apply the balm of closeness on the immense pain...the last time will pass peacefully.
गोरखपुर। कैंसर पीड़ित व्यक्ति को असहनीय दर्द होता है। जैसे-जैसे मरीज की हालत बिगड़ती है डॉक्टर इलाज से अपना हाथ खींचने लगते हैं, मरीज के प्रति लोगों का भाव बदलने लगता है। कई बार अंतिम वक्त उसे अपनों की उपेक्षा का दर्द झेलना पड़ता है। जबकि, ऐसे वक्त मरीज को सहानुभूति नहीं बल्कि समभाव की जरूरत होती है। अब ऐसे मरीजों के बेइंतहा दर्द पर डॉक्टर अपनेपन का मरहम लगाएंगे, जिससे उनका अंतिम वक्त शांति से गुजर सके।
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एम्स झज्जर के डॉक्टरों ने एक अध्ययन में यह पाया कि अगर ऐसे गंभीर मरीजों को दया भाव की जगह समभाव रखते हुए उनका इलाज किया जाए तो उनमें न केवल जीवन के प्रति ललक बढ़ती है, बल्कि मौत भी कम कष्टकारक होती है। इसीलिए सरकार ने गोरखपुर के जिला अस्पताल में भी ऐसे मरीजों के लिए पैलिएटिव केयर यूनिट खोलने का निर्णय लिया है। इसके लिए दो डॉक्टर व दो स्टॉफ नर्स को एम्स झज्जर भेजकर ट्रेनिंग भी कराई गई है। यह यूनिट बीएचयू के अधीन होगी।
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कैंसर के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। महज एक दशक पहले तक जहां इससे पूर्वांचल में इक्का-दुक्का मौत के मामले आते थे, वहीं अब हर इलाके में मरीज मिलने लगे हैं। हर तीसरा घर ऐसा होगा, जिनके किसी परिचित को यह गंभीर बीमारी है। इसी प्रकार एचआईवी का मामला है। अगर कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आ गया तो वह अपनी मौत से अधिक उपेक्षा से मर जाता है। उसके घरवाले भी किनारा कस लेते हैं। बीमारी की जानकारी होने पर लोग ऐसे मरीज से बात करना तो दूर, उसके नजदीक भी नहीं जाना चाहते।
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ऐसे मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए सरकार ने जिला अस्पतालों में पैलिएटिव केयर यूनिट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस केंद्र के जरिए अति गंभीर रोगियों के इलाज में मदद के साथ-साथ डॉक्टर उनका हौसला भी बढ़ाएंगे। अगर जरूरत पड़ी तो मरीज के घरवालों की भी काउंसिलिंग करेंगे। इसके अलावा मरीज की दवा इत्यादि के विषय में जानकारी रखेंगे। अगर कोई मरीज ऐसा है, जो किसी सामान्य लक्षण जैसे अचानक दर्द तेज होना या सांस लेने में दिक्कत आदि से परेशान है और कैंसर अस्पताल तक नहीं पहुंच सकता तो ऐसे मरीजों को पैलिएटिव केयर यूनिट में उपचार दिया जाएगा। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर उसके चिकित्सा संस्थान से भी संपर्क करेंगे। इसके लिए डॉ. प्रशांत अस्थाना और डॉ. प्रशांत सिंह व दो स्टॉफ नर्स को ट्रेनिंग के लिए एम्स झज्जर भेजा गया था। गोरखपुर-बस्ती मंडल के सरकारी अस्पतालों में गोरखपुर सदर अस्पताल ऐसी सुविधा वाला पहला अस्पताल होगा। पूर्वांचल में इसके अलावा जिला अस्पताल आजमगढ़ और प्रयागराज में भी यह सुविधा मिलेगी।
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डबल लॉकर में रहेगी दवा निवारक मार्फिन
एम्स झज्जर से प्रशिक्षण लेकर लौटे डॉ. प्रशांत अस्थाना और डॉ. प्रशांत सिंह ने बताया कि पैलिएटिव केयर यूनिट मूलरूप से गंभीर मरीजों के साथ भावात्मक रिश्ता बनाकर उपचार में मदद करेगी। डॉक्टर और स्टॉफ नर्स घरवालों को मरीज की देखभाल का तरीका बताएंगे, जिससे कि अंतिम वक्त में भी मरीज को अपनों के साथ होने का एहसास बना रहे। ऐसा करने से उसमें जीवन की इच्छा बनी रहेगी, जो किसी भी इलाज की सफलता के लिए पहला मूलाधार माना जाता है। साथ ही जिला अस्पताल में दर्द निवारक दवा मार्फिन भी डबल लॉकर में रखी जाएगी, जिससे कि अगर मरीज को कभी असहनीय दर्द हो तो इसे दिया जा सके। जो ट्रेनिंग एम्स में मिली है, उससे अन्य डॉक्टर व स्टॉफ को भी अवगत कराना है, जिससे कि यह काम केवल कुछ डॉक्टरों तक सीमित न रहे।

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कोट-
शासन के निर्देश पर डॉ. प्रशांत अस्थाना और डॉ. प्रशांत सिंह को दो दिन के ट्रेनिंग पर भेजा गया था। सरकार की यह योजना है कि जीवन के अंतिम वक्त में गंभीर बीमारी से जूझते किसी मरीज को चिकित्सकीय कमी का सामना न करना पड़े। अभी शासन से यूनिट शुरू करने के लिए विस्तृत गाइड लाइन नहीं मिली है, लेकिन ट्रेनिंग प्रोग्राम पैलिएटिव केयर मैनेजमेंट का ही हिस्सा है।
- डॉ. राजेंद्र ठाकुर, एसआईसी, जिला अस्पताल
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