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खुद को अलमारी में कर लिया बंद: नाना ने चार साल के बच्चे को इंजेक्शन से डराया, उसकी तलाश में पूरा घर चकराया

Fri, 19 May 2023 10:40 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Fri, 19 May 2023 10:40 AM IST
सार

गोला तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता रविन्द्र नाथ दुबे का नाती हनु मिश्रा (4) बृहस्पतिवार की सुबह दरवाजे पर छोटी साइकिल चलाते समय गिर पड़ा और रोने लगा। परिजन ने उसे डराया कि साइकिल मत चलाओ, नहीं मानोगे तो डॉक्टर के यहां इंजेक्शन लगवा देंगे। इसके थोड़ी देर बाद हनु अचानक गायब हो गया। परिजन परेशान हो गए।

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family members threatened innocent with injection he locked himself in cupboard
4 साल का बच्चा खुद को अलमारी में कर लिया था बंद - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

गोरखपुर जिले में एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां गोला इलाके के भडसड़ा गांव में ननिहाल आए चार साल के मासूम को घरवालों ने इंजेक्शन से डरा दिया। इस बात से मासूम इतना डर गया कि खुद को अलमारी में बंद कर लिया। उधर, मासूम के नहीं मिलने पर परिजनों ने उसके नाना अधिवक्ता रविंद्र नाथ दुबे को सूचना दी।

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रविंद्र की सूचना पर एसडीएम गोला रोहित कुमार मौर्या, सीओ गोला अजय कुमार सिंह फोर्स के साथ मौके पर पहुंच गए। पुलिस अपहरण मानकर तलाश में जुट गई, लेकिन इसी बीच एक दरोगा घर में तलाश करते पहुंचा तो उसकी नजर अलमारी पर पड़ी। खोला तो बच्चा उसी में छिपा था, जिसके बाद घरवालों ने राहत की सांस ली।
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जानकारी के मुताबिक, भडसड़ा निवासी गोला तहसील के वरिष्ठ अधिवक्ता रविंद्र नाथ दुबे का नाती हनु मिश्रा (4) बृहस्पतिवार की सुबह दरवाजे पर छोटी साइकिल चलाते समय गिर पड़ा और रोने लगा। परिजन ने उसे डराया कि साइकिल मत चलाओ, नहीं मानोगे तो डॉक्टर के यहां इंजेक्शन लगवा देंगे। इसके थोड़ी देर बाद हनु अचानक गायब हो गया। परिजन परेशान हो गए।
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अधिवक्ता रविंद्र काफी खोजबीन किया, लेकिन घर के अलमारी पर उनकी नजर नहीं पड़ी। घटना कि सूचना एसडीएम गोला रोहित कुमार मौर्य व सीओ गोला अजय कुमार सिंह को दी गई। गोला पुलिस तत्काल हरकत में आ गई। करीब एक घंटे बाद घर में बनी आलमारी को खोला गया तो बच्चा उसी में खड़ा था। हनु मिश्रा मूल रूप से चैनपुर जिला बलिया का रहने वाला है।

 

इससे पहले भी हो चुका है ऐसा

केस एक
07 सितंबर 2021:
चिलुआताल थाना क्षेत्र का छह वर्षीय अंकित को मां ने बंदर से डरा दिया था। इसके बाद वह घर से निकल गया था। करीब दो घंटे बाद घरवालों ने उसकी तलाश शुरू की और फिर पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने घंटों तलाश के बाद उसे गोरखनाथ के पास से बरामद किया था। सीसी टीवी कैमरे की मदद से बच्चे को पुलिस ने जाते देखा था, जिसके बाद वह मिला था। दरअसल, बच्चा घर से निकलने के बाद भटक गया था और रास्ता न पाने की वजह से गोरखनाथ की ओर चला गया था।

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केस दो
08 अक्तूबर 2022:
कैंट इलाके का रहने वाला दस वर्षीय अर्जुन मां की डांट से नाराज होकर रेलवे स्टेशन पहुंच गया था। मां ने उसे पढ़ाई न करने पर पिता से शिकायत करने का डर दिखाया था। इसके बाद वह घर से निकल गया था। पुलिस तत्काल सक्रिय हुई तो आरपीएफ की मदद से एक ट्रेन के डिब्बे से उतारा था। पुलिस से तब उसने बताया था कि वह दिल्ली जाने के लिए रेलवे स्टेशन आया था।

 

विशेषज्ञों ने क्या कहा

गोरखपुर विश्वविद्यालय के मनोविज्ञान विभाग प्रो. धनंजय ने कहा कि बचपन में हर किसी को किसी न किसी बात से डर लगता है। किसी को छिपकली तो किसी को ऊंचाई से। इसे फोबिया कहा जाता है। अक्सर घर वाले बच्चे जिस बात से डरते हैं, उसी का इस्तेमाल कर डराते हैं। ताकि, बच्चा उस काम को न करें। लेकिन, इसका बच्चे के दिमाग पर दुष्प्रभाव पड़ता है और फिर वह उसके दिमाग में घर कर जाता है। इसे ट्रामा कहा जाता है। इस स्थिति में आने के बाद बच्चा किसी भी हद तक जा सकता है। यह संयोग अच्छा है कि बच्चे ने घर में खुद को बंद किया, नहीं तो कई बार ट्रामा के मरीज छत से कूदने जैसी वारदात को भी कर देते हैं।

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गोरखपुर विश्वविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग डॉ. मनीष पांडेय ने कहा कि समाज में सामान्य रूप से असहनशीलता बढ़ी है, जिसका प्रभाव बच्चों पर भी दिख रहा है। छोटे बच्चे भी असामान्य रूप से प्रतिक्रियावादी हो रहे हैं। परिवार का स्वरूप एकल होने से वे कई प्रकार की सहानुभूति से वंचित हैं। बच्चे में दुख और डर को समझना और पहचानना अभिभावक के लिए मुश्किल भरा हो गया है। हर बच्चा अपनी उम्र के हिसाब से ट्रामा पर अलग तरह से रिएक्ट करता है और यहीं पर परिवार की भूमिका और समाजीकरण कमजोर होने से समस्याएं खड़ी हो रही हैं।
 
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