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Gorakhpur News: मरीज के बेहोश होने पर पल्स रेट हो जाता है कम, तत्काल ऑक्सीजन दें
Sat, 07 Jan 2023 02:51 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 07 Jan 2023 02:51 PM IST
सार
सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, एसपी ट्रैफिक डॉ. महेंद्र पाल सिंह, अधीक्षक डॉ. एके वर्मा, डॉ.एनके त्रिवेदी, डॉ. राकेश कुमार पांडेय और रिजनल मैनेजर प्रवीण कुमार द्विवेद्वी ने कर्मियों को आकस्मिक स्थितियों के प्रबंधन के बारे में बताया।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : iStock
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विस्तार
102 और 108 नंबर एंबुलेंस का संचालन कर रही ईएमआरआई ग्रीन हेल्थ सर्विस संस्था की ओर से गोरखपुर, बस्ती और कुशीनगर जिले के एंबुलेंस सेवा से जुड़े लोगों को प्रशिक्षण दिया गया। इन जिलों के 766 कर्मियों को दुर्घटना और आकस्मिक मामलों के बेहतर प्रबंधन के बारे में जानकारी दी गई।
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सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दूबे, एसपी ट्रैफिक डॉ. महेंद्र पाल सिंह, अधीक्षक डॉ. एके वर्मा, डॉ.एनके त्रिवेदी, डॉ. राकेश कुमार पांडेय और रिजनल मैनेजर प्रवीण कुमार द्विवेद्वी ने कर्मियों को आकस्मिक स्थितियों के प्रबंधन के बारे में बताया।
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बताया गया कि कई बार ले जाते समय मरीज बेहोश रहता है, जिससे उसकी पल्स रेट कम होने लगती है। उसके शरीर में हरकत नहीं होती और वह सांस भी नहीं ले पाता है। ऐसी स्थिति में उसकी जान भी जा सकती है। अगर यह स्थिति आए तो इमरजेंसी मेडिकल टेक्निशियन (ईएमटी) सतर्कता के साथ मरीज को ऑक्सीजन दें। शरीर को 30 बार दबा कर दो बार सांस देना मरीज के लिए जीवनदायी साबित होगा।
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बताया कि दुर्घटनाग्रस्त मरीज को प्राथमिक चिकित्सा देते हुए एक घंटे के भीतर अस्पताल पहुंचाए। ऐसा करने से मरीज की जान बचने की संभावना 85 से 90 फीसदी तक बढ़ जाती है। अति गंभीर मरीजों के लिए गोरखपुर जिले में ट्रैफिक पुलिस की मदद से ग्रीन कॉरिडोर भी बनवाएं, ताकि कम समय में मरीज अस्पताल पहुंच सकें।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि अगर घायल मरीज की हड्डी टूटी हो तो स्कूप स्ट्रेचर की मदद से एंबुलेंस तक ले जाएं। इसके बाद मरीज के शरीर में एयर स्प्लिंट उपकरण लगाते हुए उपकरण में हवा भर कर चेन खींच दें, ताकि हड्डी टूटी जगह पर जाकर बैठ जाए और मरीज को दर्द कम हो। इससे जटिलताएं भी रुक जाती हैं।
जिले में 102 नंबर की 50 एंबुलेंस
सीएमओ ने बताया कि जिले में 102 नंबर की 50 एंबुलेंस और 108 नंबर की 46 एंबुलेंस सेवाएं दे रही हैं। दुर्घटना, आकस्मिक स्थिति, तेज बुखार, संस्थागत प्रसव आदि के लिए एंबुलेंस की सुविधा का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वरित प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती है।
प्रशिक्षण में यह भी बताया गया कि अगर घायल मरीज की हड्डी टूटी हो तो स्कूप स्ट्रेचर की मदद से एंबुलेंस तक ले जाएं। इसके बाद मरीज के शरीर में एयर स्प्लिंट उपकरण लगाते हुए उपकरण में हवा भर कर चेन खींच दें, ताकि हड्डी टूटी जगह पर जाकर बैठ जाए और मरीज को दर्द कम हो। इससे जटिलताएं भी रुक जाती हैं।
जिले में 102 नंबर की 50 एंबुलेंस
सीएमओ ने बताया कि जिले में 102 नंबर की 50 एंबुलेंस और 108 नंबर की 46 एंबुलेंस सेवाएं दे रही हैं। दुर्घटना, आकस्मिक स्थिति, तेज बुखार, संस्थागत प्रसव आदि के लिए एंबुलेंस की सुविधा का ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए, क्योंकि इससे त्वरित प्राथमिक चिकित्सा मिल जाती है।