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ऑनलाइन गेमिंग का खतरनाक असर: नौकरी गई तो लग गई 'फ्रीफायर गेम' की लत...पैसे तो डूबे ही हाथ आया Depression
Mon, 09 Feb 2026 01:44 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: गोरखपुर ब्यूरो
Updated Mon, 09 Feb 2026 01:44 AM IST
सार
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग में तुरंत पैसा जीतने का लालच दिमाग में डोपामिन हार्मोन को सक्रिय करता है। यही वजह है कि व्यक्ति बार-बार गेम खेलने के लिए प्रेरित होता है। शुरुआत में छोटी रकम लगाई जाती है लेकिन नुकसान की भरपाई के चक्कर में लोग बड़ी रकम दांव पर लगा देते हैं।
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online game
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
विस्तार
35 वर्षीय एक व्यक्ति की नौकरी चली गई। इसके बाद उसे फ्रीफायर गेम की लत लग गई। लत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि उसने गेम में लाखों रुपये गंवा दिए। शुरुआत में कुछ रुपये मिले लेकिन बाद में सब डूब गए। पैसे तो डूबे ही, वह अवसादग्रस्त भी हो गया। मनोवैज्ञानिक उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
ऑनलाइन गेमिंग की लत अब केवल बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बड़ी संख्या में युवा और अधेड़ उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में लोग मनोरंजन के नाम पर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं लेकिन धीरे-धीरे यह आदत जुए जैसी लत में बदल जाती है।
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ऑनलाइन गेमिंग की लत अब केवल बच्चों तक सीमित नहीं रह गई है बल्कि बड़ी संख्या में युवा और अधेड़ उम्र के लोग भी इसके शिकार हो रहे हैं। कई मामलों में लोग मनोरंजन के नाम पर ऑनलाइन गेमिंग प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं लेकिन धीरे-धीरे यह आदत जुए जैसी लत में बदल जाती है।
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मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, इस लत के कारण कई लोगों ने लाखों रुपये गंवा दिए हैं और इसके बाद उन्हें मानसिक तनाव, पारिवारिक कलह और अवसाद जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय ने बताया कि हाल ही में उनके पास एक ऐसा केस आया, जिसमें एक किशोर ने ऑनलाइन गेमिंग में लगभग 60 लाख रुपये गंवा दिए।
रकम गंवाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे एम्स में भर्ती कराना पड़ा। किशोर गेम के दांव-पेंच में फंस गया और उसने बैंक लेन-देन के जरिये इतना बड़ा नुकसान कर लिया। घटना के बाद उसने आत्महत्या की धमकी भी दी, जिस पर परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाकर इलाज कराया।
जानकारी के अनुसार, उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग/गेमिंग खाते में लगातार पैसे लगाए, जिसका परिणाम यह भारी वित्तीय घाटा रहा। वहीं, 50 साल के एक व्यक्ति ने भी ऑनलाइन गेम के चक्कर में लाखों रुपये गंवा दिए। मनोचिकित्सक उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
रकम गंवाने के बाद उसकी तबीयत बिगड़ गई और उसे एम्स में भर्ती कराना पड़ा। किशोर गेम के दांव-पेंच में फंस गया और उसने बैंक लेन-देन के जरिये इतना बड़ा नुकसान कर लिया। घटना के बाद उसने आत्महत्या की धमकी भी दी, जिस पर परिजनों ने उसे अस्पताल ले जाकर इलाज कराया।
जानकारी के अनुसार, उसने ऑनलाइन ट्रेडिंग/गेमिंग खाते में लगातार पैसे लगाए, जिसका परिणाम यह भारी वित्तीय घाटा रहा। वहीं, 50 साल के एक व्यक्ति ने भी ऑनलाइन गेम के चक्कर में लाखों रुपये गंवा दिए। मनोचिकित्सक उसकी काउंसिलिंग कर रहे हैं।
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डोपामिन हार्मोन देता है तत्काल पैसे जीतने का लालच
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग में तुरंत पैसा जीतने का लालच दिमाग में डोपामिन हार्मोन को सक्रिय करता है। यही वजह है कि व्यक्ति बार-बार गेम खेलने के लिए प्रेरित होता है। शुरुआत में छोटी रकम लगाई जाती है लेकिन नुकसान की भरपाई के चक्कर में लोग बड़ी रकम दांव पर लगा देते हैं।
जब लगातार हार होती है, तो व्यक्ति तनाव, गुस्से और आत्मग्लानि से घिर जाता है। काउंसिलिंग में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और यहां तक कि गृहिणियां भी ऑनलाइन गेमिंग की वजह से आर्थिक संकट में आ गई हैं।
मनोवैज्ञानिक डॉ. आकृति पांडेय का कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग में तुरंत पैसा जीतने का लालच दिमाग में डोपामिन हार्मोन को सक्रिय करता है। यही वजह है कि व्यक्ति बार-बार गेम खेलने के लिए प्रेरित होता है। शुरुआत में छोटी रकम लगाई जाती है लेकिन नुकसान की भरपाई के चक्कर में लोग बड़ी रकम दांव पर लगा देते हैं।
जब लगातार हार होती है, तो व्यक्ति तनाव, गुस्से और आत्मग्लानि से घिर जाता है। काउंसिलिंग में ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जिनमें नौकरीपेशा लोग, व्यापारी और यहां तक कि गृहिणियां भी ऑनलाइन गेमिंग की वजह से आर्थिक संकट में आ गई हैं।
स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण जरूरी
मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही बताते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग की लत को पहचानना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति दिन का अधिकांश समय मोबाइल या लैपटॉप पर गेम खेलने में बिताता है, काम या परिवार की जिम्मेदारियों से बचने लगता है, बार-बार पैसे लगाने के लिए बेचैन रहता है या हारने पर चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता है, तो यह खतरे का संकेत है।
ऐसे मामलों में समय रहते काउंसिलिंग और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है। सबसे पहले स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण जरूरी है। मोबाइल में गेमिंग ऐप्स के लिए समय सीमा तय की जानी चाहिए। पैसों से जुड़े गेम्स से दूरी बनाना सबसे प्रभावी उपाय है। इसके अलावा व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में खेल-कूद, योग, ध्यान और सामाजिक गतिविधियों को शामिल करना चाहिए ताकि दिमाग को सकारात्मक दिशा मिल सके।
मनोचिकित्सक डॉ. अमित शाही बताते हैं कि ऑनलाइन गेमिंग की लत को पहचानना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति दिन का अधिकांश समय मोबाइल या लैपटॉप पर गेम खेलने में बिताता है, काम या परिवार की जिम्मेदारियों से बचने लगता है, बार-बार पैसे लगाने के लिए बेचैन रहता है या हारने पर चिड़चिड़ा और आक्रामक हो जाता है, तो यह खतरे का संकेत है।
ऐसे मामलों में समय रहते काउंसिलिंग और परिवार का सहयोग बेहद जरूरी होता है। सबसे पहले स्क्रीन टाइम पर नियंत्रण जरूरी है। मोबाइल में गेमिंग ऐप्स के लिए समय सीमा तय की जानी चाहिए। पैसों से जुड़े गेम्स से दूरी बनाना सबसे प्रभावी उपाय है। इसके अलावा व्यक्ति को अपनी दिनचर्या में खेल-कूद, योग, ध्यान और सामाजिक गतिविधियों को शामिल करना चाहिए ताकि दिमाग को सकारात्मक दिशा मिल सके।