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Gorakhpur News: नए साल में बदल जाएगी वाटर बॉडी की सूरत, वर्क आर्डर जारी
Tue, 20 Dec 2022 01:55 PM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Tue, 20 Dec 2022 01:55 PM IST
सार
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि वाटर बॉडी को विकसित करने के लिए 12 दिसंबर को वर्क आर्डर जारी कर दिया गया है। इसे पर्यटन के एक बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। रामगढ़ताल से 50 मीटर के दायरे में कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। परियोजना के तहत तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी संचालकों को उठानी पड़ेगी।
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रामगढ़ताल।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
सर्किट हाउस के सामने फैली वाटर बॉडी की सूरत नए साल में पूरी तरह बदल जाएगी। 6.50 एकड़ में फैली इस वाटर बॉडी को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करने के लिए गोरखपुर विकास प्राधिकरण (जीडीए) ने वर्क आर्डर जारी कर दिया है।
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प्राधिकरण, पीपीपी मोड पर इसका सुंदरीकरण कराएगा। इसके लिए मेसर्स पीवीएस इंटरप्राइजेज को मासिक 3.54 लाख रुपये के किराए पर 15 साल के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है।
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फर्म को 30 सितंबर 2023 तक इस वाटर बॉडी को पर्यटन केंद्र के तौर पर विकसित करना होगा। वर्क आर्डर की शर्तों के मुताबिक एक अक्तूबर से फर्म को हर माह जीडीए को 3.54 लाख रुपये किराया जमा करना होगा। यह करार 15 वर्ष के लिए किया गया है जिसे चार साल और बढ़ाया जा सकेगा।
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वाटर बॉडी की 50 फीसदी भूमि में पानी वाला क्षेत्र रहेगा, जिसमें फ्लोटिंग फाउंटेन एवं बोटिंग की सुविधा मिलेगी। बाकी 50 फीसदी हिस्से को अतिक्रमण से बचाने के लिए किनारे-किनारे बाउंड्रीवाल बनाई जाएगी। आकर्षक पौधे लगेंगे।
रामगढ़ताल की तरफ पाथवे के पास वेडिंग जोन एवं पार्किग का विकास होगा। इसमें 20 कार और 50 दो पहिया वाहन खड़े किए जा सकेंगे। साथ ही फर्म, एम्युजमेंट पार्क, टिकट घर, बच्चों के खेलने के लिए अन्य सुविधाएं विकसित करेगी। इन सुविधाओं और बोटिंग से फर्म आय अर्जित करेगी और जीडीए का किराया अदा करेगी।
रामगढ़ताल से 50 मीटर के दायरे में नहीं होगा पक्का निर्माण
जीडीए के प्रभारी मुख्य अभियंता किशन सिंह ने बताया कि वाटर बॉडी को विकसित करने के लिए 12 दिसंबर को वर्क आर्डर जारी कर दिया गया है। इसे पर्यटन के एक बड़े केंद्र के तौर पर विकसित किया जाएगा। रामगढ़ताल से 50 मीटर के दायरे में कोई पक्का निर्माण नहीं होगा। परियोजना के तहत तरल एवं ठोस कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी संचालकों को उठानी पड़ेगी।