फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   wait for two months for Test in RMRC

गोरखपुर: आरएमआरसी में जांच के लिए करना होगा दो माह का इंतजार, जर्मनी और अमेरिका से आएगीं मशीनें

Sat, 18 Dec 2021 02:32 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 18 Dec 2021 02:32 AM IST
सार

जिन मशीनों से जांचें होनी हैं, वह सभी अमेरिका और जर्मनी से आनी हैं। इन मशीनों का ऑर्डर दिया जा चुका है, लेकिन अब तक मशीनें आरएमआरसी को नहीं मिली हैं।

विज्ञापन
wait for two months for Test in RMRC
गोरखपुर आईसीएमआर आरएमआरसी। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर (आरएमआरसी) के जिन नौ लैबों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था, उन लैबों में जांच के लिए अभी और दो माह का इंतजार करना होगा। लैब में जिन मशीनों से जांच होनी हैं, वे जर्मनी और अमेरिका से आनी हैं। लेकिन, अब तक मशीनें आरएमआरसी को मिल नहीं पाई है।

विज्ञापन


जानकारी के मुताबिक, सात दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), खाद कारखाना के साथ आरएमआरसी के पांच मंजिला भवन के नौ लैबों का लोकार्पण किया था। लोकार्पण के बाद उम्मीद थी कि जीनोम सीक्वेसिंग से लेकर डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफेलाइटिस आदि की जांच आरएमआरसी में हो शुरू हो जाएंगी। लेकिन, अब तक ऐसा नहीं हो सका है। एक भी जांच लैब में नहीं हुई है।
विज्ञापन


बताया जा रहा है कि जिन मशीनों से जांचें होनी हैं, वह सभी अमेरिका और जर्मनी से आनी हैं। इन मशीनों का ऑर्डर दिया जा चुका है, लेकिन अब तक मशीनें आरएमआरसी को नहीं मिली हैं। इसके अलावा पांचवें मंजिल पर कुछ काम भी पूरे नहीं हुए हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


 

आरएमआरसी के मीडिया प्रभारी डॉ अशोक कुमार पांडेय ने बताया कि सबसे महत्वपूर्ण नेक्स्ट जनरेशन सीक्वेंसिंग (एनजीएस) मशीन जर्मनी से आनी है। इसी मशीन से वायरस के नए वैरिएंट का पता लगाया जाता है। यह मशीन अब तक नहीं मिली है। इसके अलावा साइटोकाइन मशीन है, जो शरीर की प्रतिरोधक क्षमता का पता लगाती है। फ्लो क्यटोमैट्री मशीन, जो कोशिकाओं की जांच कर बीमारियों का पता लगाती है, यह मशीनें भी अब तक नहीं मिली हैं। इन मशीनों को आने में कम से कम दो माह का समय लगेगा। इसके बाद ही लैब में जांचें शुरू हो पाएंगी।

यह लैब बनाई गई है....

इम्यूनोलॉजी: वैक्सीन की प्रतिरोधक क्षमता तथा उसके प्रभाव पर शोध होंगे।
मॉलिक्यूलर बायोलॉजी: जीनोम सिक्वेंसिंग की जा सकेगी। अभी जीन सीक्वेसिंग के लिए नमूने दिल्ली और पुणे भेजे जाते हैं।
माइकोलॉजी: फंगल की जांच सहित शोध हो सकेगा।
मेडिकल इंटोमोलॉजी: डेंगू, चिकनगुनिया, इंसेफ्लाइटिस आदि के वाहक कीटों पर शोध होगा।
नॉन कम्युनिकेबल डिजीज: मधुमेह व हाइपरटेंशन के कारणों की जांच की जाएगी।
माइक्रोबायोलॉजी:  वायरस और वैक्टीरिया पर शोध होंगे।
सोशल बिहेवियर स्टडी: मानसिक बीमारियों पर शोध किया जाएगा।  
हेल्थ कम्युनिकेशन:  बीमारियों की रोकथाम के उपायों के प्रचार-प्रसार का प्रमुख जरिया।
इंटरनेशनल हेल्थ पॉलिसी: इसके जरिए विश्व स्तर की होने वाली बीमारियों के बारे में लोगों को बताया जाएगा।

आरएमआरसी मीडिया प्रभारी डॉ. अशोक कुमार पांडेय ने कहा कि लैब बनकर तैयार हो चुका है। अब केवल मशीनें आनी बाकी हैं। सभी मशीनें अमेरिका और जर्मनी से आनी हैं। इसलिए थोड़ी देरी हो रही है। इसके अलावा पांच पंजिला भवन पर कुछ काम अधूरे रह गए हैं। उस पर भी तेजी से काम हो रहा है।
 


 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed