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कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह ने कहा, पाठ्यक्रमों के मूलभूत ढांचे में सुधार की जरूरत
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गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन सीबीसीएस सिस्टम पर आयोजित व्याख्यान बोलते प्रो. जीएच बोहरा व
- फोटो : GORAKHPUR CITY
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के संवाद भवन में बृहस्पतिवार को कुलपति प्रोफेसर राजेश सिंह की अध्यक्षता में च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम (सीबीसीएस) पर व्याख्यान हुआ। इसमें सीबीसीएस के तमाम पहलुओं पर मंथन हुआ। कुलपति ने कहा कि पाठ्यक्रमों के मूलभूत ढांचे में सुधार करने की जरूरत है।
कहा कि विश्वविद्यालय में 40 से अधिक नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी शुरुआत से पहले यह जरूरी है कि च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को भली-भांति समझ लिया जाए। सभी विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने विभाग में वर्कशॉप आयोजित कर सबसे अच्छा बायोडाटा तैयार करें तथा च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम की बारीकियों को समझ कर उसे शामिल करें। क्रेडिट सिस्टम को कम करते हुए उसे व्यवहारिक बनाने की जरूरत है ताकि विद्यार्थियों पर बेवजह भार ना बढ़े।
प्रो. गौरहरी बेहरा ने कहा कि सीबीसीएस में ‘क्रेडिट’ अंतरविश्वविद्यालय गतिशीलता को
बढ़ावा देता है। यह विद्यार्थियों को कैफेटेरिया अप्रोच की सुविधा देता है, जिसमें वह अपनी इच्छा के मुताबिक पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं। प्रो. अजेय कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रणाली में कक्षाओं में सिर्फ व्याख्यान ही नहीं बल्कि ट्यूटोरियल, फील्ड वर्क, प्रैक्टिकल इत्यादि भी शामिल होते हैं।
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कार्यक्रम में शिक्षकों की ओर से वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालय तथा संबद्ध महाविद्यालयों में अलग-अलग शिक्षा प्रणाली, चॉइस बेस्ड क्रेडिट प्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए, जिस पर कुलपति ने शीघ्र ही निराकरण की बात कही। इस दौरान समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष तथा कुलसचिव डॉ. ओम प्रकाश सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।
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कहा कि विश्वविद्यालय में 40 से अधिक नए पाठ्यक्रम शुरू किए जाने की प्रक्रिया चल रही है। इसकी शुरुआत से पहले यह जरूरी है कि च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम को भली-भांति समझ लिया जाए। सभी विभागाध्यक्षों से अनुरोध किया कि वे अपने-अपने विभाग में वर्कशॉप आयोजित कर सबसे अच्छा बायोडाटा तैयार करें तथा च्वॉइस बेस्ड क्रेडिट सिस्टम की बारीकियों को समझ कर उसे शामिल करें। क्रेडिट सिस्टम को कम करते हुए उसे व्यवहारिक बनाने की जरूरत है ताकि विद्यार्थियों पर बेवजह भार ना बढ़े।
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प्रो. गौरहरी बेहरा ने कहा कि सीबीसीएस में ‘क्रेडिट’ अंतरविश्वविद्यालय गतिशीलता को
बढ़ावा देता है। यह विद्यार्थियों को कैफेटेरिया अप्रोच की सुविधा देता है, जिसमें वह अपनी इच्छा के मुताबिक पाठ्यक्रम का चयन कर सकते हैं। प्रो. अजेय कुमार गुप्ता ने कहा कि इस प्रणाली में कक्षाओं में सिर्फ व्याख्यान ही नहीं बल्कि ट्यूटोरियल, फील्ड वर्क, प्रैक्टिकल इत्यादि भी शामिल होते हैं।
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कार्यक्रम में शिक्षकों की ओर से वर्तमान मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालय तथा संबद्ध महाविद्यालयों में अलग-अलग शिक्षा प्रणाली, चॉइस बेस्ड क्रेडिट प्रणाली पर महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे गए, जिस पर कुलपति ने शीघ्र ही निराकरण की बात कही। इस दौरान समस्त संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष तथा कुलसचिव डॉ. ओम प्रकाश सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक उपस्थित रहे।