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यूपी पंचायत चुनाव: यहां निर्विरोध निर्वाचन का सच जानने के लिए होगी जांच, एडीजी ने दिया ये खास निर्देश
Fri, 09 Apr 2021 11:34 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Fri, 09 Apr 2021 11:34 AM IST
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नवागत एडीजी जोन अखिल कुमार
- फोटो : अमर उजाला।
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गोरखपुर में क्षेत्र पंचायत सदस्य पद पर कई जगह निर्विरोध निर्वाचन तय होने को पुलिस ने गंभीरता से लिया है। पुलिस ने जानना चाहा है कि उक्त लोग वास्तव में इतने लोकप्रिय हैं कि किसी ने इनके विरुद्ध पर्चा दाखिल नहीं किया अथवा मामला कुछ और है। एडीजी जोन अखिल कुमार ने सभी निर्विरोध निर्वाचित लोगों की जांच के निर्देश दिए हैं। अब पुलिस निर्विरोध होने के पीछे की वास्तविकता देखेगी। अगर दूसरे प्रत्याशियों को जोर जबरदस्ती से बैठाया गया है तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
जानकारी के मुताबिक, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) तथा अन्य पदों के कई उम्मीदवार इस बार निर्विरोध चुने गए हैं। उनके खिलाफ या तो किसी ने पर्चा ही नहीं दाखिल किया या फिर दाखिला के बाद कुछ ने पर्चा वापस ले लिया। किन्हीं कारणों से पर्चा खारिज हो गया। अकेले गोरखपुर में ही 40 से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार हैं जो निर्विरोध हुए हैं। इनमें से ज्यादातर बीडीसी सदस्य हैं। इनमें भी अधिकांश पूर्व प्रमुख रह चुके हैं या फिर जनप्रतनिधि तथा धनबली हैं।
इसके बाद एडीजी ने जोन के सभी आईजी, डीआईजी, एसएसपी व एसपी को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के बारे में जांच करा ली जाए कि इसके पीछे क्या कारण थे। कहीं निर्विरोध होने के पीछे दबाव या भय तो काम नहीं कर रहा था। एडीजी अखिल कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक, त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में क्षेत्र पंचायत सदस्य (बीडीसी) तथा अन्य पदों के कई उम्मीदवार इस बार निर्विरोध चुने गए हैं। उनके खिलाफ या तो किसी ने पर्चा ही नहीं दाखिल किया या फिर दाखिला के बाद कुछ ने पर्चा वापस ले लिया। किन्हीं कारणों से पर्चा खारिज हो गया। अकेले गोरखपुर में ही 40 से ज्यादा ऐसे उम्मीदवार हैं जो निर्विरोध हुए हैं। इनमें से ज्यादातर बीडीसी सदस्य हैं। इनमें भी अधिकांश पूर्व प्रमुख रह चुके हैं या फिर जनप्रतनिधि तथा धनबली हैं।
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इसके बाद एडीजी ने जोन के सभी आईजी, डीआईजी, एसएसपी व एसपी को पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि निर्विरोध चुने गए उम्मीदवारों के बारे में जांच करा ली जाए कि इसके पीछे क्या कारण थे। कहीं निर्विरोध होने के पीछे दबाव या भय तो काम नहीं कर रहा था। एडीजी अखिल कुमार ने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
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ग्राम प्रहरी की ड्यूटी गृह ब्लॉक में नहीं लगेगी: एसएसपी
त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में ग्राम प्रहरी की चुनाव में ड्यूटी उनके गृह ब्लाक में नहीं लगाई जाएगी। बल्कि उनकी ड्यूटी दूसरे ब्लाक में लगाई जाएगी। यह जानकारी एसएसपी दिनेश कुमार पी ने दी। एसएसपी ने बताया कि ग्राम प्रहरी को होमगार्ड व पीआरडी जवानों के सहयोग हेतु मतदाताओं की लाइन लगाने के लिए लगाया जाएगा।
बताया कि गोरखपुर जनपद के 1294 गांव में पंचायत चुनाव सकुशल संपन्न कराने के लिए जनपद में एक कंपनी एसएसबी, एक कंपनी सीआरपीएफ, 5000 अन्य जनपदों से बुलाए गए पुलिस व उपनिरीक्षक के अलावा जिले के 6000 उपनिरीक्षक, इंस्पेक्टर, होमगार्ड, पीआरडी के जवानों को तैनात किया जाएगा। इनकी संख्या कम पड़ती है तो ग्राम प्रहरी को गृह ब्लाक के अलावा जनपद के अन्य ब्लाकों में लगाया जायेगा।
अगर पीआरडी जवानों व होमगार्ड कम पड़ेंगे तो इनको सहयोग करने के लिए लगाया जायेगा। क्योंकि ग्राम चौकीदारों की ग्रामीण व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका रहती है। बताया कि जनपद में 1390 ग्राम प्रहरी नियुक्त हैं। वर्तमान में 1377 ग्राम प्रहरी अपनी सेवा विभिन्न ग्रामों में दे रहे हैं। ग्राम प्रहरियों को प्रति माह 2500 रुपये मानदेय प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाता है।
बताया कि गोरखपुर जनपद के 1294 गांव में पंचायत चुनाव सकुशल संपन्न कराने के लिए जनपद में एक कंपनी एसएसबी, एक कंपनी सीआरपीएफ, 5000 अन्य जनपदों से बुलाए गए पुलिस व उपनिरीक्षक के अलावा जिले के 6000 उपनिरीक्षक, इंस्पेक्टर, होमगार्ड, पीआरडी के जवानों को तैनात किया जाएगा। इनकी संख्या कम पड़ती है तो ग्राम प्रहरी को गृह ब्लाक के अलावा जनपद के अन्य ब्लाकों में लगाया जायेगा।
अगर पीआरडी जवानों व होमगार्ड कम पड़ेंगे तो इनको सहयोग करने के लिए लगाया जायेगा। क्योंकि ग्राम चौकीदारों की ग्रामीण व्यवस्थाओं को सुचारू रूप से चलाने में अहम भूमिका रहती है। बताया कि जनपद में 1390 ग्राम प्रहरी नियुक्त हैं। वर्तमान में 1377 ग्राम प्रहरी अपनी सेवा विभिन्न ग्रामों में दे रहे हैं। ग्राम प्रहरियों को प्रति माह 2500 रुपये मानदेय प्रदेश सरकार द्वारा दिया जाता है।