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गोरखपुर: वायु प्रदूषण पर अध्ययन करेगा एमएमएमयूटी, सोर्स और कैटरिंग कैपेसिटी पर भी अध्ययन करेगा विश्वविद्यालय
Sat, 10 Jul 2021 08:06 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sat, 10 Jul 2021 08:06 AM IST
सार
राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के ई-मेल से मिली जानकारी।
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- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
मदन मोहन मालवीय प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एमएमएमयूटी) गोरखपुर शहर में वायु प्रदूषण के कारकों पर अध्ययन करेगा। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने विश्वविद्यालय को गोरखपुर शहर में वायु प्रदूषण के मसले पर स्वच्छ वायु कार्ययोजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी है। उसे सोर्स और कैटरिंग कैपेसिटी पर अध्ययन करने का भी जिम्मा सौंपा है। नियंत्रण बोर्ड ने ई-मेल के माध्यम से यह जानकारी विवि के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय को दी है।
हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली ने प्रदेश के तीन बड़े शहरों नोएडा, गोरखपुर और मेरठ में वायु प्रदूषण पर अध्ययन तथा नियंत्रण के लिहाज से कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। नोएडा के लिए यह जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली को सौंपी गई है।
आईआईटी रुड़की मेरठ में वायु प्रदूषण का अध्ययन करेगा। एमएमएमयूटी को गोरखपुर के वायु प्रदूषण पर कार्य कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। ई-मेल में यह भी बताया गया है कि 2011 की जनगणना के आधार पर गोरखपुर में वायु प्रदूषण पर अध्ययन और नियंत्रण पर कार्ययोजना बनाने के 74 लाख रुपये की धनराशि विवि को उपलब्ध कराई जाएगी।
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इसके लिए विवि के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय को परियोजना का प्रधान अन्वेषक और डॉ. अरुण कुमार मिश्र को सह प्रधान अन्वेषक के रूप में नामित किया गया है। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने हर्ष जताते हुए कहा है इससे साबित हुआ है कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता स्थापित करने में सफल रहा है।
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हाल ही में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, दिल्ली ने प्रदेश के तीन बड़े शहरों नोएडा, गोरखपुर और मेरठ में वायु प्रदूषण पर अध्ययन तथा नियंत्रण के लिहाज से कार्ययोजना तैयार करने का निर्णय लिया है। नोएडा के लिए यह जिम्मेदारी आईआईटी दिल्ली को सौंपी गई है।
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आईआईटी रुड़की मेरठ में वायु प्रदूषण का अध्ययन करेगा। एमएमएमयूटी को गोरखपुर के वायु प्रदूषण पर कार्य कराने के लिए जिम्मेदारी दी गई है। ई-मेल में यह भी बताया गया है कि 2011 की जनगणना के आधार पर गोरखपुर में वायु प्रदूषण पर अध्ययन और नियंत्रण पर कार्ययोजना बनाने के 74 लाख रुपये की धनराशि विवि को उपलब्ध कराई जाएगी।
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इसके लिए विवि के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के आचार्य प्रो. गोविंद पांडेय को परियोजना का प्रधान अन्वेषक और डॉ. अरुण कुमार मिश्र को सह प्रधान अन्वेषक के रूप में नामित किया गया है। कुलपति प्रो. जेपी पांडेय ने हर्ष जताते हुए कहा है इससे साबित हुआ है कि विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर पर अपनी क्षमता स्थापित करने में सफल रहा है।
नैक ने स्वीकार किया मूल्यांकन के लिए आवेदन
एमएमएमयूटी के आवेदन को नैक ने स्वीकार कर लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने अब सेल्फ एप्रेजल रिपोर्ट की तैयारी जोरशोर से शुरू कर दी है। 45 दिन में यह रिपोर्ट नैक (राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद) मूल्यांकन की साइट पर अपलोड करनी है। उसके बाद रिपोर्ट का भौतिक सत्यापन करने के लिए नैक की टीम परिसर में आएगी और उसी आधार पर विश्वविद्यालय की ग्रेडिंग करेगी।
विवि प्रशासन ने नैक मूल्यांकन में ए प्लस-प्लस ग्रेड हासिल करने का लक्ष्य रखा है। सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट को तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर शिक्षक तक जुटे हुए हैं। प्रतिदिन चार घंटे की बैठक इसके लिए आयोजित की जा रही है। जिसमें हर बिंदु पर पहले गंभीरता से विचार हो रहा और फिर रिपोर्ट में शामिल करने पर मुहर लगाई जा रही है।
बैठक में उन सात समितियों के प्रभारी और उनके तीन-तीन सहयोगी शामिल रह रहे हैं, जिन पर नैक द्वारा निर्धारित सात बिंदुओं का मानक पूरा करने की जिम्मेदारी है। कुलपति ने कहा कि मूल्यांकन के लिए विवि का आवेदन नैक ने स्वीकार कर लिया है। इसे हम उपलब्धि के रूप में ले रहे हैं। ब्यूरो
विवि प्रशासन ने नैक मूल्यांकन में ए प्लस-प्लस ग्रेड हासिल करने का लक्ष्य रखा है। सेल्फ अप्रेजल रिपोर्ट को तैयार करने के लिए विश्वविद्यालय के कुलपति से लेकर शिक्षक तक जुटे हुए हैं। प्रतिदिन चार घंटे की बैठक इसके लिए आयोजित की जा रही है। जिसमें हर बिंदु पर पहले गंभीरता से विचार हो रहा और फिर रिपोर्ट में शामिल करने पर मुहर लगाई जा रही है।
बैठक में उन सात समितियों के प्रभारी और उनके तीन-तीन सहयोगी शामिल रह रहे हैं, जिन पर नैक द्वारा निर्धारित सात बिंदुओं का मानक पूरा करने की जिम्मेदारी है। कुलपति ने कहा कि मूल्यांकन के लिए विवि का आवेदन नैक ने स्वीकार कर लिया है। इसे हम उपलब्धि के रूप में ले रहे हैं। ब्यूरो