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गोविवि : निलंबित प्रोफेसर ने कुलाधिपति को लिखा पत्र, पत्रावली नहीं दिखाने का आरोप
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गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय के निलंबित प्रोफेसर कमलेश गुप्ता ने कुलाधिपति को पत्र भेजकर विश्वविद्यालय प्रशासन पर पत्रावली नहीं दिखाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पत्र भेजने का जिक्र करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति की भी जांच कराने की मांग की है।
उन्होंने कुलाधिपति को भेजे गए पत्र में लिखा है कि नए कुलपति का नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद भी प्रो. राजेश सिंह पहले की तरह तमाम पत्रावलियां अपने आवास पर ही मंगवा रहे हैं। वह प्रशासनिक भवन से जरूरी कार्यों का संपादन नहीं कर रहे हैं। अफवाह, अनिश्चितता और आशंका का वातावरण व्याप्त है, जो विश्वविद्यालय के हित में कदापि नहीं है।
उन्होंने प्रो. राजेश सिंह को तत्काल पदमुक्त किए जाने, कुलपति आवास से समस्त पत्रावलियां प्रशासनिक भवन मंगवाए जाने, कुलपति के खिलाफ की गई शिकायतों के लिए जांच समिति गठित किए जाने, आय-व्यय की निष्पक्ष जांच, निर्माण व खरीद की जांच की मांग की है। प्रो. कमलेश ने आशंका जताई है कि उनकी व्यक्तिगत पत्रावली गायब या क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। उसके संरक्षण की जिम्मेदारी कुलसचिव की है। उनकी गैरजानकारी और लिखित अनुमति के बगैर अगर उनकी व्यक्तिगत पत्रावली विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन अनुभाग से कहीं और गई हैं, तो यह अत्यंत आपत्तिजनक है।
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उन्होंने कुलाधिपति को भेजे गए पत्र में लिखा है कि नए कुलपति का नियुक्ति पत्र जारी होने के बाद भी प्रो. राजेश सिंह पहले की तरह तमाम पत्रावलियां अपने आवास पर ही मंगवा रहे हैं। वह प्रशासनिक भवन से जरूरी कार्यों का संपादन नहीं कर रहे हैं। अफवाह, अनिश्चितता और आशंका का वातावरण व्याप्त है, जो विश्वविद्यालय के हित में कदापि नहीं है।
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उन्होंने प्रो. राजेश सिंह को तत्काल पदमुक्त किए जाने, कुलपति आवास से समस्त पत्रावलियां प्रशासनिक भवन मंगवाए जाने, कुलपति के खिलाफ की गई शिकायतों के लिए जांच समिति गठित किए जाने, आय-व्यय की निष्पक्ष जांच, निर्माण व खरीद की जांच की मांग की है। प्रो. कमलेश ने आशंका जताई है कि उनकी व्यक्तिगत पत्रावली गायब या क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। उसके संरक्षण की जिम्मेदारी कुलसचिव की है। उनकी गैरजानकारी और लिखित अनुमति के बगैर अगर उनकी व्यक्तिगत पत्रावली विश्वविद्यालय के सामान्य प्रशासन अनुभाग से कहीं और गई हैं, तो यह अत्यंत आपत्तिजनक है।
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