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वरासत में हीलाहवाली, पड़ रही लोगों पर भारी, अविवादित मामलों का भी नहीं हो रहा निस्तारण

Wed, 23 Dec 2020 12:39 PM IST
vivek shukla विवेकानंद शुक्ल, देवरिया।
विवेकानंद शुक्ल, देवरिया। Published by: vivek shukla Updated Wed, 23 Dec 2020 12:39 PM IST
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Undisputed legacy not recorded during special campaign in Deoria
वरासत अभियान।(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के देवरिया जनपद में वरासत के विवादित नहीं अविवादित मामले भी दर्ज करने में हीलाहवाली की जा रही है। यही वजह है कि पांचों तहसीलों में 1672 अविवादित मामलों का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। सबसे अधिक 1025 मामले सदर तहसील और सबसे कम 55 मामले बरहज तहसील में लंबित पड़े हैं। जरूरतमंद लोग वरासत कराने के लिए लेखपाल से लेकर तहसील कार्यालय तक के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कहीं सुनवाई नहीं हो रही। हालांकि प्रशासन का दावा है कि दो माह तक चलने वाले अभियान में ऐसे मामलों का निस्तारण करा दिया जाएगा।
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ऐसा नहीं है कि ये एक-दो तहसीलों का मामला है। जिले की सभी तहसीलों में वरासत कराने के इच्छुक लोग महीनों से दौड़ लगा रहे हैं। कई लोगों ने ऑनलाइन आवेदन किया है, इसके बाद भी कई माह बीत गए और अब तक वरासत दर्ज नहीं की जा सकी। विवादित मामलों में तो वर्षों बीत जाने के बाद भी कोई प्रगति नहीं हो रही।
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नाम न छापने के अनुरोध पर चार पीड़ितों ने बताया कि वे तीन माह से तहसील दौड़ रहे हैं, लेकिन राजस्व विभाग के अधिकारी टालमटोल कर रहे हैं। हालांकि वरासत के मामलों में शासन के सख्त होने के बाद इधर प्रशासन की सक्रियता बढ़ी है। 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक कैंप लगाकर अविवादित वरासत दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं। इसके तहत शत-प्रतिशत प्रकरण दर्ज करना अनिवार्य किया गया है। शेष रह जाने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।
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पांचों तहसीलों में लटके मामले
जिले की पांचों तहसीलों के 2178 राजस्व ग्रामों में अविवादित वरासत के 1672 मामले लंबित हैं। इनमें 872 राजस्व ग्रामों में लेखपालों से सत्यापन कराया गया है। राजस्व निरीक्षक ने 552 दर्ज वादों 39 में आदेश जारी किया है। खतौनी में छह वरासत दर्ज की गई है। सदर तहसील में 1025, सलेमपुर में 65, रुद्रपुर में 77, बरहज में 55 तथा भाटपाररानी तहसील में 450 मामले लंबित पड़े हैं।
 
प्रशासन ने तय की समय सीमा
वरासत दर्ज करने के लिए प्रशासन की ओर से चलाए जा रहे अभियान की समय सीमा तय कर दी गई है। इसके तहत 30 दिसंबर तक राजस्व/तहसील के अधिकारी गांवों में भ्रमण करेंगे। राजस्व ग्रामों में वे न सिर्फ प्रचार-प्रसार करेंगे बल्कि खतौनियों को भी पढ़ेंगे, जबकि लेखपाल वरासत के लिए प्रार्थना पत्र प्राप्त करेंगे ताकि उन्हें ऑनलाइन भरने का काम हो सके।

31 दिसंबर से 15 जनवरी तक लेखपाल ऑनलाइन जांच कर कार्रवाई करेंगे। 16 से 31 जनवरी तक राजस्व निरीक्षक जांच एवं आदेश पारित करेंगे। राजस्व निरीक्षक कार्यालय से जारी नामांत्रण आदेश को आर-6 में दर्ज करने के बाद खतौनियों की प्रविष्टियों को भूलेख साफ्टवेयर में लोड किया जाएगा।

इसके बाद जिलाधिकारी लेखपाल, राजस्व निरीक्षक, तहसीलदार तथा उपजिलाधिकारी से इस आशय का प्रमाण पत्र लेंगे कि उनके क्षेत्र के राजस्व ग्रामों में निर्विवाद उत्तराधिकार का कोई भी प्रकरण दर्ज होने से शेष नहीं रह गया है। इसके लिए एक से सात फरवरी तक की तिथि तय की गई है।

आठ से 15 फरवरी तक जिलाधिकारी प्रत्येक तहसील के 10 प्रतिशत राजस्व गांवों को चिह्नित करेंगे। इसके बाद एडीएम, एसडीएम व जनपदस्तरीय अन्य अधिकारियों से तथ्यों की जांच कराई जाएगी। प्रगति की रिपोर्ट परिषद की वेबसाइट पर 31 दिसंबर, 17 जनवरी एवं दो फरवरी को अनिवार्य रूप से फीड की जाएगी। 20 फरवरी तक परिषद को निर्धारित प्रारूप पर प्रमाण पत्र उपलब्ध करा दिया जाएगा।
 
सीआरओ अमृत लाल बिंद ने बताया कि अविवादित वरासत दर्ज करने के लिए 15 दिसंबर से 15 फरवरी तक अभियान चलाया जा रहा है। अधिकारी व राजस्व कर्मी गांवों का भ्रमण कर ऐसे मामलों का निस्तारण कर रहे हैं। निर्धारित तिथि तक अविवादित वरासत के मामलों का निस्तारण करा दिया जाएगा।
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