Coronavirus in Gorakhpur: अब गोरखपुर में रोजाना हो सकेगी कोरोना की इतनी जांच, जानें क्या है खास वजह
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के आइसीएमआर में अब 500 जांच प्रतिदिन हो सकेगी। कॉलेज को दो नए रीयल टाइम पॉलिमर चेन रिएक्शन (आरटीपीसीआर) शासन की ओर से मिल गए हैं। मौजूदा समय में रोज लगभग ढाई सौ नमूनों की जांच हो पाती है। आने वाले दिनों में इनकी क्षमता और बढ़ाई जाएगी, तब यहां प्रतिदिन लगभग 750 जांचें हो सकेंगी।
आरएमआरसी में आरटीपीसीआर मशीन से कोरोना संक्रमण की जांच हो रही है। शुरुआत में लगभग 80 नमूनों की जांच हो पाती थी। लेकिन गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों से जब नमूनों की संख्या बढ़ी तो करीब 20 दिन पहले मशीन में नई तकनीक की डाई लगा दी गई।
इस से इसकी क्षमता बढ़कर ढाई सौ हो गई। इस बीच बनारस की लैब में एक विशेषज्ञ के कोरोना पॉजिटिव मिलने से जांच बंद हुई तो वहां के नमूने बीआरडी में आने शुरू हो गए। बनारस और आजमगढ़ मंडल से प्रतिदिन करीब तीन सौ नमूने आ रहे हैं।
दो बॉयोसेफ्टी कैबिनेट और आएंगे
इतने ही नमूने रोज गोरखपुर-बस्ती मंडल के जिलों से आ रहे हैं। इसकी वजह से आरएमआरसी के सामने नया संकट आ खड़ा हो गया। दूसरी तरफ माइक्रोबायोलॉजी विभाग में टीबी की सीबीनैट मशीन से होने वाली जांच किट के अभाव में बंद है। यही वजह है कि आनन-फानन में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने दो नई आरटीपीसीआर मशीन मंगवाई हैं।
मेडिकल कॉलेज में दो बायोसेफ्टी कैबिनेट लगे हैं। लेकिन जांच बढ़ने के कारण दो और बॉयोसेफ्टी कैबिनेट की मांग की गई है। विशेषज्ञ बताते हैं कि बॉयोसेफ्टी कैबिनेट में बैठकर कोरोना जांच के लिए नमूने लेने से संक्रमण का खतरा नहीं रहता है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. गणेश कुमार ने बताया कि दो आरटीपीसीआर मशीन आ गई हैं। एक से दो दिनों के अंदर उनसे भी जांच शुरू हो जाएगी। इसके बाद से प्रतिदिन 500 जांचें होंगी। आने वाले दिनों में इन मशीनों में नई तकनीक की डाई लगाकर इनकी क्षमता और बढ़ाई जाएगी। इसके बाद लगभग 750 जांच रोजाना होना संभव हो सकेगा। दो बायोसेफ्टी कैबिनेट भी जल्द ही मिलने वाले हैं।