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गोरखपुर महिला अस्पताल के दो डॉक्टरों ने दिया इस्तीफा, सामने आई ये बड़ी वजह

Wed, 29 Jul 2020 07:44 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Wed, 29 Jul 2020 07:44 PM IST
सार

  • नियमों को दरकिनार कर दी गई नियुक्ति 
  • अंदरुनी तौर पर डॉक्टरों में इसे लेकर नाराजगी 

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Two doctors of Gorakhpur Women's Hospital resign
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

महिला अस्पताल के दो डॉक्टरों ने कोरोना महामारी के बीच इस्तीफा दे दिया। इसके बाद से अस्पताल में हड़कंप मच गया है। इस्तीफे के पीछे की कहानी कार्यवाहक एसआईसी डॉ नीना त्रिपाठी और उनके पति डॉ एके त्रिपाठी की ओर से जारी किए गए नए-नए नियम कानून बताए जा रहे हैं। 

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इतना ही नहीं नियमों को दरकिनार कर एसआईसी ने अपने पति को ही अस्पताल के अधीक्षक पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंप दी है। इस पर एडी हेल्थ ने भी सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के मुताबिक इस्तीफा सौंपने वाले डॉक्टरों में डॉ अभियुल श्रीवास्तव औैर डॉ अलका वर्मा शामिल हैं।
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हालांकि इन्होंने इस्तीफा का कारण व्यक्तिगत बताया है। लेकिन अंदरूनी तौर पर यह बात सामने आई है कि पति और पत्नी के नियमों से तंग आकर इन लोगों ने इस्तीफा दिया है। बताया जाता है कि जल्द ही कुछ और डॉक्टर इस्तीफा दे सकते हैं। इसे लेकर अन्य डॉक्टरों ने बैठकों का दौर भी शुरू कर दिया है।  

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नियमों को दरकिनार कर बना दिया अधीक्षक

कार्यवाहक एसआईसी की जिम्मेदारी मिलने के बाद ही डॉ नीना त्रिपाठी ने नियमों को दरकिनार कर अपने पति डॉ एके त्रिपाठी को अधीक्षक बना दिया। जबकि डॉ एके त्रिपाठी लेवल-थ्री के डॉक्टर हैं।  इनसे सीनियर लेवल-फोर के चार डॉक्टर महिला अस्पताल में हैं। लेकिन उन्हें जिम्मेदारी नहीं सौंपी गई। इतना ही नहीं सारे महत्वूपर्ण काम की जिम्मेदारी भी एसआईसी ने अपने पति को सौंप रखी है। इसकी वजह से अस्पताल के अंदरखाने में विरोध के स्वर उठने लगे हैं। 

एडी हेल्थ ने भी जताई आपत्ति 
एसआईसी डॉ नीना त्रिपाठी के फैसले पर एडी हेल्थ ने भी आपत्ति जताई है। उन्होंने इसे लेकर एसआईसी को पत्र भी लिखा है। इसमें कहा गया है कि डॉ चंद्रशेखर आजाद को मुख्य चिकित्सा अधीक्षक और डॉ एके त्रिपाठी को अधीक्षक पद की जिम्मेदारी देने के बाद प्रभार प्रमाण पत्र भी दे दिया गया, जो की उचित नहीं है। जबकि प्रभार प्रमाण पत्र शासन की ओर से उच्चाधिकारी देते हैं। ऐसी स्थिति में प्रभार प्रमाण पत्र देना समझ से परे हैं। नियम के तहत कार्यवाहक एसआईसी नीतिगत फैसले भी नहीं ले सकता है। 

महिला अस्पताल की कार्यवाहक एसआईसी डॉ नीना त्रिपाठी ने कहा कि जिन दो डॉक्टरों ने इस्तीफा सौंपा है। वह संविदा पर तैनात थे। दोनों पति पत्नी है। शीतल नर्सिंग होम में वह प्रैक्टिस करते हैं। इसकी वजह से दोनों ने इस्तीफा दिया है। प्रताड़ित करने की बात पूरी तरह से निराधार है। 

रही बात पति को अधीक्षक बनाने की, तो नियम के तहत उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। वह सीनियर है। कुछ लोग सोची समझी राजनीति के तहत बदनाम कर रहे हैं। क्योंकि उन्हें कमाने का मौका नहीं मिल रहा है। 
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