खेल हुआ फेल: गोरखपुर एम्स में ही मिली पर्सनल फाइल, अभिलेख गायब होने की उड़ी थी अफवाह
गोरखपुर एम्स में दो दिन पहले कार्यालय से अभिलेख गायब होने की अफवाह उड़ाई थी। इसकी जांच शुरू कराई गई तो मंगलवार को अभिलेख सही सलामत मिली। प्रशासन का कहना है कि फाइल ऑफिस में ही थी।
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एम्स में यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे प्रशासनिक अफसर की पर्सनल फाइल व सर्विस बुक मिल गई है। प्रशासन का कहना है कि फाइल ऑफिस में ही थी। इस मामले में फाइल गायब होने की अफवाह उड़ाई गई थी। इस मामले में एक अफसर की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है, जो आरोपी अधिकारी के विरोधी माने जाते हैं। अब जांच यह की जा रही है कि पर्सनल फाइल और सर्विस बुक दफ्तर में ही थी तो अफवाह उड़ाई क्यों गई।
अब जांच के बाद ही सच सामने आएगा, लेकिन अंदरखाने चर्चा यह भी है कि आरोपी अफसर ने अपने अभिलेख भिजवाते हुए एनओसी के लिए आवेदन किया है। मामला हाई प्रोफाइल होने के चलते जिम्मेदारों ने चुप्पी साध ली है। उधर, आरोप लगाने वाली छात्रा की हालत भी अब ठीक है और वह अपनी मां के साथ परिसर में ही अलग फ्लैट में रह रही है। अफसरों ने बताया कि वहां सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है।
आरोपी प्रशासनिक अफसर की प्रतिनियुक्ति शनिवार को ही समाप्त कर दी गई थी। इसके बाद रविवार को परिसर में इस बात की चर्चा होने लगी कि अफसर अपनी सर्विस बुक और पर्सनल फाइल साथ लेकर गए हैं। अब सवाल उठने लगे थे कि सप्ताह भर पूर्व आरोप लगने के बाद से ही अफसर के परिसर में प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई थी। उसका केबिन भी लॉक कर दिया गया था। ऐसे में फाइल गायब कैसे हो गई।
मंगलवार को अवकाश के बाद जब एम्स खुला तो फाइल गायब होने का प्रकरण चर्चा का विषय बन गया। मामले के जांच की बात जब होने लगी तो कहानी एक बार फिर पलट गई और मंगलवार शाम को पता चला कि फाइल मिल गई है। फाइल मिलने पर भी एम्स परिसर में कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं। पहले यह कहा गया कि आरोपी अफसर स्वयं फाइल लेकर आया था।
इसके बाद कहा जाने लगा कि अफसर ने किसी दूसरे के माध्यम से फाइल भेजी है। फिलहाल जांच के बाद ही असली तस्वीर सामने आएगी, लेकिन इतना जरूर कहा जा रहा है कि जिस पर्सनल फाइल व सर्विस बुक के गायब होने की बात कही जा रही थी, अब वह एम्स कार्यालय में वापस पहुंच चुकी है। आरोपी अफसर को यहां से कार्यमुक्त करने की प्रक्रिया भी चल रही है। कार्यमुक्ति प्रमाण पत्र से पहले सभी विभागों की रिपोर्ट ली जाएगी कि इस अफसर से संबंधित कोई पत्रावली या अन्य देनदारी बाकी तो नहीं है।
इस मामले में अब अहम भूमिका छात्रा और उसके परिजनों की रहेगी। कानून के जानकारों का कहना है कि छात्रा बालिग है और ऐसे प्रकरण में उसे खुद ही आगे आकर केस दर्ज कराना चाहिए। अगर वह अपने कॅरिअर के चलते ऐसा नहीं करना चाहती तो उसके घरवालों को ऐसा करना होगा। छात्रा बीमार थी, इसलिए अभी तक उसकी तरफ से केस दर्ज कराया जाएगा या नहीं इस पर चर्चा नहीं हो रही थी।