ट्रांसपोर्टर को तीसरी बार भुगतनी पड़ी माफिया के हमनाम होने की सजा, हत्या के मामले में भी उठा चुकी है पुलिस
- पुलिस ने ट्रांसपोर्टर को पहले दो बार हत्या के मामले में उठाया था, अब वाहनों को जब्त करने का नोटिस थमा दिया
- ट्रांसपोर्टर सुधीर की शिकायत पर एडीएम फाइनेंस ने आरटीओ से जांच कर रिपोर्ट मांगी
- माफिया की जगह हड़बड़ी में ट्रांसपोर्टर की गाड़ियों को जब्त करने की शुरू कर दी गई कार्रवाई
विस्तार
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के पिपरौली ब्लॉक प्रमुख, माफिया सुधीर सिंह का हमनाम होने की सजा ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह को तीसरी बार भुगतनी पड़ी है। दरअसल, संयोग ऐसा है कि ट्रांसपोर्टर और माफिया दोनों के पिता का नाम भी सुरेंद्र ही है। पहले दो बार हत्या के मामलों में पुलिस ने ट्रांसपोर्टर को उठाया था। अब माफिया की संपत्ति व वाहनों की कुर्की की बारी आई तो पुलिस ने ट्रांसपोर्टर की गाड़ियों की लिस्ट प्रशासन व आरटीओ के पास भेज दी। ट्रांसपोर्टर ने मंगलवार को एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह से मिलकर अपनी तकलीफ बताई। इसपर एडीएम फाइनेंस ने आरटीओ से रिपोर्ट तलब की है।
जानकारी के मुताबिक, करीब आठ साल पहले नीनाथापा इंटर कॉलेज के पास एक हत्या में माफिया सुधीर सिंह का नाम आया था। तब पुलिस, माफिया की जगह ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह को पकड़ कर थाने ले गई थी। भला हो पीड़ित के घरवालों का जो खुद सामने आए और सच बताया कि जिसने हत्या कराई वह ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह नहीं हैं। इसके बाद पुलिस ने ट्रांसपोर्टर को छोड़ा था।
इसी तरह करीब छह साल पहले छोटू सिंह की हत्या के मामले में गुलरिहा पुलिस ने रात के दो बजे ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह को माफिया सुधीर सिंह समझकर घर से हिरासत में ले लिया था। दो दिन तक पूछताछ भी हुई थी। पूरी तरह तस्दीक होने के बाद पुलिस ने ट्रांसपोर्टर को छोड़ा था। अब माफिया की संपत्ति कुर्क करने की बारी आई तो भी पुलिस ने गलती कर दी। पुलिस ने माफिया की जगह ट्रांसपोर्टर के वाहनों की सूची जब्त करने के लिए भेज दी।
...फिर कैसे हो गई चूक
आरटीओ और पुलिस भले ही माफिया सुधीर सिंह और ट्रांसपोर्टर के पिता का नाम एक होने का तर्क देकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करें, लेकिन यह तो तय है कि दोनों ने ही गैर जिम्मेदाराना तरीके से इतनी गंभीर कार्रवाई की रिपोर्ट तैयार कर दी। जिस माफिया सुधीर की संपत्ति और गाड़ी कुर्क करने की कार्रवाई होनी है उसका पूरा नाम सुधीर सिंह और उसके पिता का नाम स्व. सुरेंद्र सिंह है, जबकि ट्रांसपोर्टर सुधीर का पूरा नाम सुधीर कुमार सिंह और उनके पिता का नाम सुरेंद्र प्रताप सिंह है। यही नहीं, थाना भले ही दोनों का एक हो मगर पता अलग-अलग है। दोनों के ही मोहल्लों के बीच काफी दूरी है। माफिया सुधीर एल्युमीनियम फैक्ट्री के पास रहता है, जबकि ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह सर्वोदय नगर, बिछिया कॉलोनी के पास रहते हैं।
गलती की, फिर एक-दूसरे को जिम्मेदार बताने में जुटे
हड़बड़ी में माफिया सुधीर सिंह की जगह ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह की गाड़ियां जब्त करने की कार्रवाई शुरू करने के मामले में गलती स्वीकार करने की बजाय अब आरटीओ और पुलिस एक-दूसरे को ही जिम्मेदार ठहराने में लग गए हैं। आरटीओ का कहना है कि पुलिस ने शाहपुर में रह रहे सुधीर सिंह की गाड़ियों का ब्योरा मांगा था, तो विभाग ने सभी सुधीर नाम के लोगों की गाड़ियों का ब्योरा दे दिया, जबकि पुलिस का कहना है सुधीर सिंह की गाड़ियों की रिपोर्ट आरटीओ से मिली थी। उसी के आधार पर आगे की कार्रवाई के लिए रिपोर्ट तैयार की गई थी।
सात ट्रक व एक बुलेट जब्त करने का नोटिस
पुलिस की रिपोर्ट पर डीएम ने ब्लॉक प्रमुख व माफिया सुधीर सिंह की संपत्ति जब्त करने का निर्देश दे दिया है। इसी क्रम में आरटीओ को वाहन जब्त करने के लिए पत्र के साथ ही पूरी सूची भेजी गई थी, मगर सर्वोदय निगर बिछिया के रहने वाले सुधीर कुमार सिंह का कहना है कि सूची में दर्ज सात ट्रक और एक बुलेट उनकी है। इसे पुलिस, प्रशासन और आरटीओ ने माफिया सुधीर सिंह की समझकर कार्रवाई शुरू कर दी है।
एडीएम फाइनेंस राजेश कुमार सिंह ने बताया कि ट्रांसपोर्टर सुधीर कुमार सिंह ने मुलाकात कर प्रार्थना पत्र दिया है। उनके मुुताबिक नाम और पिता का नाम एक होने की वजह से ब्लॉक प्रमुख सुधीर सिंह की जगह आरटीओ और पुलिस ने उनकी गाड़ियों को जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। आरटीओ को मामले की जांच कर समस्या के निस्तारण और रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा गया है।
एआरटीओ श्यामलाल ने बताया कि विभाग की कोई गलती नहीं है। मैं तो तब था भी नहीं। जो जानकारी है, उसके मुताबिक पुलिस ने शाहपुर थाना क्षेत्र के रहने वाले सुधीर सिंह के वाहनों की जुलाई में जानकारी मांगी थी। विभाग ने शाहपुर में रहने वाले सभी सुधीर सिंह की गाड़ियों का ब्योरा पुलिस को मुहैया करा दिया था।
अब पुलिस को चेक करना चाहिए था कि उन्हें किस पर कार्रवाई करनी है। प्रशासन की तरफ से जो आदेश आया, उसके मुताबिक विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी। अगर किसी को कोई आपत्ति हो तो वह प्रशासन से शिकायत करे। वहां से निर्देश मिलने पर कार्रवाई रोककर नए सिरे से की जाएगी।
किरायेदार हटते ही शुरू हो जाएगी कुर्की की कार्रवाई
सहजनवां तहसील के कालेसर में स्थित ब्लॉक प्रमुख माफिया सुधीर सिंह के आवास की कुर्की की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। डीएम की तरफ से तैनात रिसीवर व तहसीलदार सहजनवां लालजी विश्वकर्मा का कहना है कि कालेसर स्थित सुधीर सिंह के मकान में वर्तमान में सात-आठ किरायेदार परिवार हैं। सभी को जल्द मकान खाली करने का निर्देश दिया गया है।
किरायेदारों ने भी दो-चार दिन में मकान खाली करने का भरोसा दिलाया है। किरायेदारों के हटते ही कुर्की की जाएगी। उधर, शहर क्षेत्र के शाहपुर में स्थित संपत्ति को लेकर तैनात रिसीवर व नायब तहसीलदार कोरोना संक्रमित हो गए हैं। दोनों अवकाश पर हैं। प्रभारी सदर तहसीलदार नीलम त्रिपाठी का कहना है, दो से तीन दिन में नायाब तहसीलदार काम पर लौट आएंगे। इसके बाद कुर्की की कार्रवाई शुरू होगी।
मकान-जमीन की रजिस्ट्री पर भी रोक
रजिस्ट्री दफ्तर में सब रजिस्ट्री प्रथम (शहर) योगेंद्र प्रताप सिंह और सब रजिस्ट्रार सहजनवां जुबेर अहमद ने बताया कि डीएम के निर्देश के बाद माफिया सुधीर सिंह की संपत्ति की रजिस्ट्री पर रोक लगा दी गई है। संबंधित से कहा गया है कि यदि सुधीर की संपत्ति बेचने का कोई मामला आए तो तत्काल अवगत कराया जाए। खास सतर्कता बरती जा रही है।