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Exclusive: गोरखपुर में एक ही पटरी पर आगे-पीछे दौड़ेंगी ट्रेनें, लोको पायलट को अब तीन नहीं, दिखेंगे चार सिग्नल
Mon, 04 Dec 2023 01:35 PM IST
vivek shukla
राजन राय, गोरखपुर।
राजन राय, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 04 Dec 2023 01:35 PM IST
सार
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम के लगने के बाद लोको पायलट को तीन के बजाय चार सिग्नल दिखेंगे। एक किमी पीछे वाली ट्रेन के लोको पायलट को पहला सिग्नल रेड दिखेगा, फिर डबल येलो सिग्नल दिखेगा। इससे आगे बढ़ने पर येलो और फिर ग्रीन सिग्नल दिखने लगेगा।
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भारतीय रेल
- फोटो : शटरस्टॉक्स
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विस्तार
पूर्वोत्तर रेलवे में पहली बार अप्रैल-2024 से एक ही पटरी पर आगे-पीछे ट्रेनें दौड़ने लगेंगी। गोरखपुर से बस्ती तक ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम का काम मार्च-2024 तक पूरा हो जाएगा। अप्रैल से सिग्नल की नई तकनीक से ट्रेनें चलाई जाएंगी। इस व्यवस्था के तहत ट्रेनों को चलाना और सुरक्षित हो जाएगा।
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लोको पायलट को अब तीन की जगह चार सिग्नल दिखेंगे। हर एक किमी के दायरे में सिग्नल मिलने से ट्रेनें सरपट दौड़ेंगी। बिना नई पटरी बिछाए रेल प्रशासन ट्रेनों की संख्या आसानी से बढ़ा सकेगा।
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अभी रेल खंडों पर एब्सलूट ब्लॉक सिग्नल सिस्टम चल रहा है। इसके तहत एक ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अगले स्टेशन पर पहुंचने के बाद पीछे से आने वाली ट्रेन को हरा सिग्नल दिया जाता है। दो ट्रेनों के बीच आठ से दस किलोमीटर की दूरी होती है। इस वजह से पीछे से आने वाली ट्रेनें देरी की शिकार होती हैं। सिग्नल के इंतजार में ट्रेनें खड़ीं कर दी जाती हैं।
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ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम को पूर्वाेत्तर रेलवे के सभी रूटों पर लगाया जाना है। पहले चरण में छपरा से बाराबंकी तक पूरा करना है। गोरखपुर से बस्ती के बीच तेजी से सिग्नल की व्यवस्था की जा रही है। साथ ही गोरखपुर से देवरिया के बीच भी ऑटोमेटिक सिग्नल सिस्टम लगाने का काम शुरू किया गया है।
अब डबल येलो सिग्नल भी दिखेगा
ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम के लगने के बाद लोको पायलट को तीन के बजाय चार सिग्नल दिखेंगे। एक किमी पीछे वाली ट्रेन के लोको पायलट को पहला सिग्नल रेड दिखेगा, फिर डबल येलो सिग्नल दिखेगा। इससे आगे बढ़ने पर येलो और फिर ग्रीन सिग्नल दिखने लगेगा। एक ब्लॉक 10 किमी का होता है। इस तरह तीन से चार ट्रेनें एक साथ चलने लगेंगी। अभी एक ही ट्रेन चलती है।
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दो ब्लॉक के बीच बनेंगे हट
गोरखपुर से लखनऊ के बीच हर दो ब्लॉक के बीच एक हट बनाए जाएंगे। हट में सिग्नल से जुड़े संयंत्र रखे जाएंगे, ताकि सिग्नल में कोई फाल्ट आए तो तत्काल ठीक कर लिया जाए। इसमें सिग्नल भी पहले लाल फिर डबल पीला, पीला और इसके बाद हरा रहेगा। इसे देखकर ड्राइवर ट्रेन को एक किमी के पीछे दूसरी ट्रेन चला सकेंगे।
पूर्वाेत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य मार्ग छपरा से बाराबंकी के मध्य ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। कुछ भाग इस वित्त वर्ष में पूरा कर ओपन कर दिया जाएगा। इसके तैयार हो जाने से लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खंड की गति बढ़ाने में भी यह सहायक होगा।
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दो ब्लॉक के बीच बनेंगे हट
गोरखपुर से लखनऊ के बीच हर दो ब्लॉक के बीच एक हट बनाए जाएंगे। हट में सिग्नल से जुड़े संयंत्र रखे जाएंगे, ताकि सिग्नल में कोई फाल्ट आए तो तत्काल ठीक कर लिया जाए। इसमें सिग्नल भी पहले लाल फिर डबल पीला, पीला और इसके बाद हरा रहेगा। इसे देखकर ड्राइवर ट्रेन को एक किमी के पीछे दूसरी ट्रेन चला सकेंगे।
पूर्वाेत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य मार्ग छपरा से बाराबंकी के मध्य ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग सिस्टम लगाने का कार्य तेजी से चल रहा है। कुछ भाग इस वित्त वर्ष में पूरा कर ओपन कर दिया जाएगा। इसके तैयार हो जाने से लाइन की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और खंड की गति बढ़ाने में भी यह सहायक होगा।