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आज मनाया जाएगा महारविवार पर्व, व्रत करने से दूरी होते हैं सारे कष्ट
Sun, 30 Aug 2020 02:33 AM IST
vivek shukla
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Sun, 30 Aug 2020 02:33 AM IST
सार
- कष्टों का नाश कर सुख की प्राप्ति कराता महा रविवार
- श्रद्धालु आज व्रत रख करेंगे भगवान सूर्य की उपासना
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सूर्य भगवान।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भगवान सूर्य की उपासना का पर्व महारविवार 30 अगस्त को मनाया जाएगा। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की आखिरी रविवार का दिन परम पुनीत माना जाता हैं। इस व्रत को करने से समस्त कष्टों का नाश होता है और व्रती सुख की प्राप्ति होती है।
महा रविवार व्रत का माहात्म्य
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। यह व्रत इस दिन से प्रारंभ कर 52 व्रतों की संख्या में करना चाहिए। इस व्रत के देवता सूर्य हैं। सूर्य ग्रह की शांति के लिए किया जाता है। सूर्य समस्त ग्रहों के अधिपति होने से इस व्रत को करने से समस्त ग्रहों के भी दोष समाप्त होता है और भगवान सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
उन्होंने बताया कि व्रती समस्त कष्टों से विमुक्त होकर असीम सुखों को प्राप्त करता है। इसका उल्लेख नारद पुराण मे भी है। इस दिन का व्रत आरोग्यता प्रदान कराने वाला होता है। मनुष्य का मान सम्मान बढ़ता है।
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पूजन विधि
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार स्नानादि के बाद परमात्मा का ध्यान करें। सूर्य नारायण की पूजा सविधि करें। अर्घ्य प्रदान करें। दिनभर निराहार रहें। सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार मीठा भोजन ग्रहण करें। सूर्य पुराण का पाठ, सूर्य मंत्र का जप, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे समस्त पीड़ाओं का उपशमन होता है। त्वचा के रोगों से विमुक्ति के लिए यह उत्तम व्रत है। अगले दिन व्रत का पारण करें।
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महा रविवार व्रत का माहात्म्य
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार इसी दिन भगवान सूर्य का जन्म हुआ था। यह व्रत इस दिन से प्रारंभ कर 52 व्रतों की संख्या में करना चाहिए। इस व्रत के देवता सूर्य हैं। सूर्य ग्रह की शांति के लिए किया जाता है। सूर्य समस्त ग्रहों के अधिपति होने से इस व्रत को करने से समस्त ग्रहों के भी दोष समाप्त होता है और भगवान सूर्य देव की कृपा भी प्राप्त होती है।
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उन्होंने बताया कि व्रती समस्त कष्टों से विमुक्त होकर असीम सुखों को प्राप्त करता है। इसका उल्लेख नारद पुराण मे भी है। इस दिन का व्रत आरोग्यता प्रदान कराने वाला होता है। मनुष्य का मान सम्मान बढ़ता है।
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पूजन विधि
पंडित बृजेश पांडेय के अनुसार स्नानादि के बाद परमात्मा का ध्यान करें। सूर्य नारायण की पूजा सविधि करें। अर्घ्य प्रदान करें। दिनभर निराहार रहें। सूर्यास्त से पूर्व केवल एक बार मीठा भोजन ग्रहण करें। सूर्य पुराण का पाठ, सूर्य मंत्र का जप, आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें। इससे समस्त पीड़ाओं का उपशमन होता है। त्वचा के रोगों से विमुक्ति के लिए यह उत्तम व्रत है। अगले दिन व्रत का पारण करें।