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Gorakhpur News: गोरखपुर के बच्चों में जगा अंतरिक्ष विज्ञान का जुनून

Mon, 20 Jul 2026 02:21 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर Updated Mon, 20 Jul 2026 02:21 AM IST
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Today is International Moon Day; interest in scientific thinking and future lunar missions is growing among the youth.
गोरखपुर। एक समय था जब चांद केवल कहानियों, कविताओं और ''''''''चंदा मामा'''''''' तक सीमित था, लेकिन अब गोरखपुर के बच्चे भी चंद्रमा पर बनने वाले भविष्य के शोध केंद्रों और चंद्र अभियानों की बातें कर रहे हैं। वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में आने वाले छात्र-छात्राएं अपोलो-11 मिशन से लेकर भारत के चंद्रयान-3 तक की उपलब्धियों को जानने के लिए उत्सुक हैं।
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नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि 20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग ने पहली बार चंद्रमा की सतह पर कदम रखकर इतिहास रचा था। यह दिवस केवल इतिहास को याद करने का अवसर नहीं, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों और अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति नई पीढ़ी को प्रेरित करने का भी माध्यम है। उन्होंने बताया कि भारत ने चंद्रयान-एक से चंद्रमा पर जल-अणुओं के प्रमाण खोजे, जबकि चंद्रयान-3 ने दक्षिणी ध्रुव के पास सफल सॉफ्ट लैंडिंग कर देश को नई पहचान दिलाई।
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अमर पाल सिंह के अनुसार, चंद्रमा पृथ्वी का एकमात्र प्राकृतिक उपग्रह है और पृथ्वी की जलवायु, ज्वार-भाटा और वैज्ञानिक शोध में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस पर लोग दूरबीन से चंद्रमा का देखें। बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान से जोड़ें और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा दें।
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गोरखपुर की नक्षत्रशाला लगातार विद्यार्थियों के बीच अंतरिक्ष विज्ञान को लोकप्रिय बनाने का कार्य कर रही है। ऐसे आयोजन भविष्य के वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष शोधकर्ताओं को प्रेरित करने में अहम भूमिका निभाएंगे। आज जब दुनिया फिर से चंद्रमा पर मानव मिशन की तैयारी कर रही है, तब गोरखपुर के युवाओं में भी अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ती रुचि भविष्य की नई संभावनाओं का संकेत दे रही है। खगोलविद अमर पाल सिंह भविष्य में चंद्रमा पर स्थायी अनुसंधान केंद्र, लूनर गेटवे स्पेस स्टेशन और मंगल अभियानों के लिए आधार विकसित करने की योजनाएं बन रही हैं। चंद्र ध्रुवों पर मौजूद जल-बर्फ और हीलियम-थ्री जैसे संसाधन भविष्य की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।

चंद्र यात्रा ने बढ़ाया दुनिया में गौरव
अंतरराष्ट्रीय चंद्र दिवस भारत के लिए भी बेहद खास महत्व रखता है। भारत ने अपने चंद्र अभियानों के जरिए अंतरिक्ष विज्ञान में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। भारत के पहले चंद्र मिशन चंद्रयान-1 ने चंद्रमा की सतह पर जल-अणुओं के प्रमाण खोजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके बाद चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर आज भी चंद्रमा से महत्वपूर्ण वैज्ञानिक आंकड़े भेज रहा है।
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