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Gorakhpur: दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराने वाली महिलाओं व अधिवक्ता पर कसा शिकंजा, जालसाजी का मुकदमा दर्ज

Tue, 09 Aug 2022 11:33 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Tue, 09 Aug 2022 11:33 AM IST
सार

 कैंपियरगंज थानाक्षेत्र के खालिद की तहरीर पर कैंट पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया है, उसके मुताबिक, महिलाओं का  गिरोह साजिशन फंसाता है। इसके बाद दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराके धनउगाही करता है। इस गिरोह को माधव तिवारी नामक व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है।

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Tighten screws on women and advocate who filed a fake case of Molestation
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराकर रुपये ऐंठने वाली महिलाओं के गिरोह व एक अधिवक्ता के खिलाफ रविवार देर रात कैंट थाने में आपराधिक साजिश रचने, रंगदारी मांगने, जालसाजी व धमकी देने सहित अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। गिरोह में छह महिलाएं हैं।

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कैंपियरगंज थाना क्षेत्र के खालिद की तहरीर पर कैंट पुलिस ने जो मुकदमा दर्ज किया है, उसके मुताबिक, महिलाओं का गिरोह साजिशन फंसाता है। इसके बाद दुष्कर्म का मुकदमा दर्ज कराके धनउगाही करता है। इस गिरोह को माधव तिवारी नामक व्यक्ति का संरक्षण प्राप्त है।
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माधव की मदद से झूठे साक्ष्य गढ़े और फर्जी गवाह खड़े किए जाते हैं। गिरोह की महिलाओं ने और भी लोगों को फंसाया है। सब न्याय पाने के लिए भटक रहे हैं। गिरोह में कुछ ऐसी भी महिलाएं हैं, जो फर्जी तरीके से एससी-एसटी का मुकदमा दर्ज कराती हैं। इसके बाद सरकार से आर्थिक सहायता लेती हैं। गिरोह का फर्जीवाड़ा पुलिस की जांच में पकड़ा जा चुका है।
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दो सीओ की जांच रिपोर्ट के बाद हुई कार्रवाई
सीओ कैंट व सीओ बांसगांव की जांच रिपोर्ट के बाद कैंट थाने में केस दर्ज किया गया। जांच में गिरोह के फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज कराकर रुपये ऐंठने की पुष्टि हुई थी। गिरोह में छह महिलाएं हैं। इनमें से दो सगी बहनें हैं। इन महिलाओं ने अलग-अलग थानों में दुष्कर्म सहित अन्य धाराओं में साजिशन 11 केस दर्ज कराए हैं। गिरोह को अधिवक्ता का संरक्षण प्राप्त है।

 

ऐसे खुला मामला
दुष्कर्म में जेल की सजा काटने और मामले से बरी होने वाले कैंपियरगंज के खालिद ने मुख्यमंत्री के जन सुनवाई पोर्टल (आईजीआरएस) पर सक्रिय गिरोह की जानकारी दी थी। साथ ही जांच कराके आरोपी महिलाओं के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। इस मामले की जानकारी तत्कालीन एसएसपी डॉ. विपिन ताडा को मिली। एसएसपी ने पूरे मामले की जांच सीओ कैंट को दी। सीओ ने गहनता से जांच कर रिपोर्ट एसएसपी को दी।

जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 11 आपराधिक केस में महिलाएं शामिल हैं। इन मामलों में अलग-अलग आरोपी दिखाए गए हैं। मुकदमों में अलग-अलग आरोपी भी हैं, जबकि वादिनी कुछ महिलाएं ही हैं। जिन मामलों में न्यायालय के आदेश पर केस दर्ज हुए हैं, उसमें एक ही अधिवक्ता की भूमिका सामने आई है। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि हर मामले में अधिवक्ता की मुख्य भूमिका मिली है।

एसएसपी ने दर्ज कराया मुकदमा
सीओ कैंट का कहना है कि जांच करके रिपोर्ट एसएसपी को भेज दी गई थी। मगर, इसी बीच एसएसपी डॉ. विपिन ताडा का तबादला हो गया। मामले की जानकारी पीड़ित से होने पर एसएसपी डॉ. गौरव ग्रोवर ने पूरे प्रकरण की फाइल को देखी और फिर एसपी सिटी को केस दर्ज कराने का आदेश दिया था। एसपी सिटी के आदेश पर कैंट पुलिस ने तहरीर के आधार पर केस दर्ज कर लिया।

 

पहले महिला, फिर बहन ने दर्ज कराया दुष्कर्म का केस
सीओ की जांच में सामने आया है कि 2018 में राजघाट और गोरखनाथ थाने में दुष्कर्म का केस दर्ज कराने वाली महिला अपनी बहन को आगे करती है। बहन से ही खजनी थानाक्षेत्र के तीन लोगों पर दुष्कर्म का केस दर्ज करा देती है। इस मामले में आरोपी जेल भी भेजे गए। एक युवक ने विरोध किया तो उसके परिचित पर गीडा थाने में सामूहिक दुष्कर्म का केस 2021 में दर्ज करा दिया गया। इन सब मामलों में भी पैरवीकार एक ही है, जिसने कोर्ट के जरिए केस दर्ज कराने की सलाह दी थी।

विवेचक पर ही दर्ज करा दिया था मुकदमा
महिलाओं के गिरोह ने 2016 के दौरान ही कैंपियरगंज थाने में तीन लोगों के खिलाफ सामूहिक दुष्कर्म का केस दर्ज कराया था। मामले में आरोपी पहले जेल भेजे गए, फिर पुलिस ने गहनता से जांच की। अफसरों के आदेश पर जांच हुई तो पता चला कि मामला पूरी तरह से फर्जी है। विवेचक ने मामले में फाइल रिपोर्ट लगा दी।

महिला को जैसे ही इसकी जानकारी हुई, उसने फिर विवेचक रहे दरोगा पर ही लूट, बलवा, धमकी देने का केस दर्ज करा दिया। इस बार उसका आरोप था कि केस की जांच के दौरान दरोगा ने उससे रुपये छीन लिए और धमकी दी। दरोगा ने सीओ बांसगांव को दिए शपथ पत्र में महिला को पेशेवर और अधिवक्ता को संरक्षक बताया है।

 

फर्जी केस कर ली चार लाख का सरकारी मदद
सीओ बांसगांव की जांच में सामने आया है कि न्यायालय के आदेश पर दर्ज एक केस में सरकारी मदद के चार लाख रुपये गलत तरीके से लिए गए हैं। इस मुकदमे में भी अधिवक्ता एक ही है। जबकि, इस केस की जांच कर विवेचक ने एफआर (फाइनल रिपोर्ट) लगा दी थी।

दुष्कर्म का फर्जी केस दर्ज कराने वाली महिलाओं को एक अधिवक्ता का विधिक संरक्षण प्राप्त है। इस गंभीर मामले में न्यायप्रिय कार्रवाई के लिए शिकायत कराई गई थी। पुलिस की जांच से न्याय मिला। पुलिस ने केस दर्ज कर कई बेगुनाह लोगों को बचाया और अधिवक्ता पेशे को बदनाम कर गिरोह चलाने वाले पर कार्रवाई की है। कोर्ट में भी पीड़ितों की पैरवी की जाएगी। न्याय दिलाने का प्रयास किया जाएगा।- मृत्युंजय राज सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता

नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाएगा। गैंगस्टर की कार्रवाई भी होगी। मामला गंभीर है। जल्द ही विवेचना कराकर चार्जशीट दाखिल की जाएगी। - कृष्ण कुमार विश्नोई, एसपी सिटी

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