गोरखपुर: मच्छर जनित रोगों का खतरा मंडराया, निगम के इंतजाम नाकाफी
नगर निगम के मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी का कहना है कि इस बार शहर में मच्छरों पर नियंत्रण के लिए लगातार फॉगिंग हो रही है। 35 छोटी फॉगिंग मशीनों के अलावा चार बड़ी फॉगिंग मशीनों से फॉगिंग की जा रही है।
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तापमान बढ़ने के साथ मच्छरों का प्रकोप बढ़ने लगा है। मच्छरों की संख्या बढ़ने से बीमारियों का खतना मंडराने लगा है। लेकिन सरकारी महकमा अभी इसे लेकर संजीदा नहीं है। इन पर नियंत्रण के लिए नगर निगम की रफ्तार भी सुस्त है।
22-32 डिग्री सेंटीग्रेड का तापमान मच्छरों की ब्रीडिंग (प्रजनन) के लिए अनुकूल होता है। पिछले कुछ दिनों से तापमान बढ़कर इसी के आसपास रह रहा है। ठंड का असर कुछ कम होने और धूप निकलने के बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ना शुरू हो गया है। जहां गंदगी ज्यादा है, उन इलाकों के लोग मच्छरों से ज्यादा परेशान हो रहे हैं। वैसे तो मच्छरों को मारने के लिए नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग के पास छोटी, बड़ी फॉगिंग मशीन हैं, लेकिन इससे फॉगिंग के लिए अब तब शेड्यूल निर्धारित नहीं किया गया है।
यह मच्छरों का मारने का सबसे अच्छा समय: प्रो. डीके सिंह
गोरखपुर यूनिवर्सिटी के शिक्षक प्रो. डीके सिंह का कहना है कि मच्छरों की ब्रीडिंग के लिए फरवरी से अप्रैल और अगस्त से नवंबर का समय अनुकूल होता है। सामान्य तौर पर मच्छर अपने जीवन काल में करीब 18 हजार लार्वा पैदा करते हैं। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से फॉगिंग का कोई फायदा नहीं है। उनको पनपने वाले स्थानों पर ही मार देना चाहिए। इससे ज्यादा फायदा होगा। जलभराव वाले स्थानों, जिन नालों में पानी का बहाव बहुत कम है, वहां और जहां गंदगी फैली रहती है, उन स्थानों पर एंटी लार्वा का छिड़काव करने से मच्छरों पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
इस बार बढ़ गई है फॉगिंग मशीन की संख्या
नगर निगम के मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश रस्तोगी का कहना है कि इस बार शहर में मच्छरों पर नियंत्रण के लिए लगातार फॉगिंग हो रही है। 35 छोटी फॉगिंग मशीनों के अलावा चार बड़ी फॉगिंग मशीनों से फॉगिंग की जा रही है। पांचों जोन में सात-सात फॉगिंग मशीन दी गईं हैं। इसके साथ ही जहां भी जलभराव है, उन स्थानों पर एंटी लार्वा भी डाला जाएगा।