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संकट के सिपाही : यह अपनी फिक्र का वक्त नहीं, इस समय दूसरों की जान बचाना ही है फर्ज...
Mon, 26 Apr 2021 06:42 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
अमर उजाला नेटवर्क, गोरखपुर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 26 Apr 2021 06:42 AM IST
सार
- संक्रमण के भय पर जान बचाने का जुनून भारी
- बीआरडी मेडिकल कॉलेज, स्त्री एवं प्रसूति रोग की विभागाध्यक्ष कोरोना पॉजिटिव गर्भवतियों का करती हैं इलाज
- डॉ. वाणी आदित्य बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष हैं
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डॉ. वाणी आदित्य...
- फोटो : amar ujala
विस्तार
संक्रमित होने का खतरा तो हर समय बना रहता है लेकिन गर्भवती व उसके होने वाले शिशु की जिंदगी बचाना, मेरी प्राथमिकता है। कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा खतरनाक है, ऐसे में सभी को सतर्कता बरतनी चाहिए। कुछ इस तरह के विचार बयां करती हैं, डॉ. वाणी आदित्य। वे बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की अध्यक्ष भी हैं। अब तक 26 पॉजिटिव गर्भवतियों का सुरक्षित प्रसव करा चुकी हैं। कहती हैं कि जब संक्रमित होंगे तब देखा जाएगा। फिलहाल संकट का समय है और इसमें जच्चा-बच्चा की जान बचाना मेरा पहला कर्तव्य है।
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डॉ. वाणी विभाग के प्रशासनिक कार्य देखने के साथ ही जोखिम वाले प्रसव के केस खुद संभालती हैं। विभाग में रोजाना दो से तीन पॉजिटिव केस प्रसव के आते हैं। इन सभी का प्रसव उनकी देखरेख में चिकित्सकों की टीम कराती है। जो केस गंभीर होता है उसे डॉ. वाणी खुद देखती हैं। कहती हैं कि प्रसव कराने के लिए पीपीई किट पहन कर आठ-आठ घंटा काम करना घुटन और थकान देनेवाला होता है। इन सबके बावजूद संक्रमित होने का भय हमेशा बना रहता है। हाल ही में कोरोना संक्रमण से बीआरडी पासआउट एक चिकित्सक की मौत हो गई। इससे चिकित्सक साथियों का मनोबल गिरा है। इस सबके बावजूद वह खुद और उनकी टीम हिम्मत और जुनून के साथ ऐसे मरीजों का इलाज करने में जुटी है।
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डॉ. आदित्य सिर्फ प्रशासक और चिकित्सक की ही भूमिका नहीं निभाती हैं, टीम और मरीजों के साथ अभिभावक सुलभ भावना से मिलती हैं। यही कारण है कि उनकी टीम के सीनियर रेजिडेंट डॉ. अवनीश, डॉ. सुकेंशू, डॉ. अंजली, डॉ. गौरी, डॉ.जेबा और डॉ. आयुषी उनके साथ चौबीस घंटे काम करने को तैयार रहते हैं। वार्ड में मरीज भी उनका इंतजार करते हैं क्योंकि वह हर एक से उसकी सेहत के बारे में बात करने के अलावा उनका दुख सुनकर संबल भी देती हैं। डॉक्टर वाणी बताती हैं कि पिछली कोरोना लहर में 15 पॉजिटिव केस की डिलीवरी कराई गई थी। दूसरी लहर में 26 प्रसव कराए जा चुके हैं जबकि 14 का पंजीकरण हो चुका है।
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कोरोना पॉजिटिव कैंसर पीड़िता की बचाई जान
डॉ. वाणी ने बताया कि गंभीर गर्भाशय कैंसर से जूझ रही पीड़िता को सभी अस्पतालों ने लौटा दिया गया था। महिला जब उनके विभाग में लाई गई तो उसे लगातार रक्तस्राव हो रहा था। यदि जल्द ही उसकी सर्जरी नहीं की जाती तो अधिक रक्तस्राव से उसकी मृत्यु हो सकती थी। आनन-फानन में तैयारी कर उन्होंने रात में ही महिला के गर्भाशय के कैंसर की सर्जरी कर उसकी जिंदगी बचाई। स्वास्थ्य लाभ होने पर उसे कैंसर का इलाज कराने के लिए लखनऊ रेफर किया था।