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Gorakhpur News: कचरा प्रबंधन के नए नियम लागू, अब चार श्रेणियों में बांटना अनिवार्य
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गोरखपुर। शहर को स्वच्छ और पर्यावरण के अनुकूल शहर बनाने की दिशा में नगर निगम ने बड़ा कदम उठाते हुए एक अप्रैल से ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम लागू कर दिए हैं। नई व्यवस्था के तहत अब शहर के हर घर, दुकान और संस्थान को कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटना अनिवार्य कर दिया गया है। नियमों का पालन न करने पर जुर्माने का प्रावधान भी रखा गया है।
नगर निगम की ओर से इस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए रंग-आधारित डस्टबिन वितरित किए जा रहे हैं। हरे डस्टबिन में गीला जैविक कचरा, नीले में सूखा पुनर्चक्रण योग्य कचरा, लाल में सेनेटरी वेस्ट और काले डस्टबिन में हानिकारक कचरा जैसे ई-वेस्ट और दवाएं डालनी होंगी। साथ ही कचरा संग्रहण वाहनों को भी चार हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
जनजागरूकता के लिए नगर निगम ने विशेष टीमें गठित की हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के लिए जागरूक और प्रशिक्षित कर रही हैं। सभी 11 आदर्श वार्ड सहित शहर के 80 वार्डों में चयनित घरों को चार रंगों के डस्टबिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नए नियमों के तहत बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को भी जिम्मेदारी दी गई है। प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करने वाले संस्थान, बड़े भवन और अधिक जल खपत वाली इकाइयों को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा। इसके लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस प्लांट अनिवार्य किया गया है।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, अन्यथा ‘पॉल्यूटर पेज’ सिद्धांत के तहत कार्रवाई की जाएगी।
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नगर निगम की ओर से इस प्रणाली को प्रभावी बनाने के लिए रंग-आधारित डस्टबिन वितरित किए जा रहे हैं। हरे डस्टबिन में गीला जैविक कचरा, नीले में सूखा पुनर्चक्रण योग्य कचरा, लाल में सेनेटरी वेस्ट और काले डस्टबिन में हानिकारक कचरा जैसे ई-वेस्ट और दवाएं डालनी होंगी। साथ ही कचरा संग्रहण वाहनों को भी चार हिस्सों में विभाजित किया गया है, ताकि कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जा सके।
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जनजागरूकता के लिए नगर निगम ने विशेष टीमें गठित की हैं, जो घर-घर जाकर लोगों को कचरा पृथक्करण के लिए जागरूक और प्रशिक्षित कर रही हैं। सभी 11 आदर्श वार्ड सहित शहर के 80 वार्डों में चयनित घरों को चार रंगों के डस्टबिन उपलब्ध कराए जा रहे हैं। नए नियमों के तहत बड़े पैमाने पर कचरा उत्पन्न करने वाले संस्थानों को भी जिम्मेदारी दी गई है। प्रतिदिन 100 किलोग्राम से अधिक कचरा पैदा करने वाले संस्थान, बड़े भवन और अधिक जल खपत वाली इकाइयों को अपने परिसर में ही गीले कचरे का निस्तारण करना होगा। इसके लिए कंपोस्टिंग या बायोगैस प्लांट अनिवार्य किया गया है।
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नगर आयुक्त गौरव सिंह सोगरवाल ने नागरिकों से अपील की है कि वे नियमों का पालन करें, अन्यथा ‘पॉल्यूटर पेज’ सिद्धांत के तहत कार्रवाई की जाएगी।