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Gorakhpur News: पाठ्यक्रम नया पर विश्वविद्यालय में किताबें पुरानी... नहीं मिलते नये जोड़े गये टॉपिक

Tue, 16 Jul 2024 03:54 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Tue, 16 Jul 2024 03:54 AM IST
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The syllabus is new but the books in the university are old...newly added topics are not available
- विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पुरानी किताबों में नहीं मिलते नये पाठ्यक्रम के टॉपिक
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- प्रवेश और परीक्षा के बीच समय की कमी और किताबों की उलझन से छात्रों को पाठ्यक्रम पूरा करने में हो रहीं दिक्कत
संवाद न्यूज एजेंसी
गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्याल के पाठ्यक्रम को नई शिक्षा नीति के अनुसार बदल दिया गया है। पाठ्यक्रम को सेमेस्टर सिस्टम के अनुसार बांट भी दिया गया है। इस कारण विभिन्न विभागों के स्नातक और परास्नातक के विषयों के टॉपिक बदल गए हैं। लेकिन विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पाठ्यक्रम की किताबें पुराने पैटर्न के अनुसार रखी गई हैं। ऐसे में छात्रों को लाइब्रेरी से नए पाठ्यक्रम के आधार पर किताबें नहीं मिल पा रही हैं।
विश्वविद्यालय की सेमेस्टर सिस्टम के कारण पाठ्यक्रम तो बदला ही है साथ ही प्रवेश और परीक्षा के बीच छात्रों को समय भी कम दिया जा रहा है। छात्र जब तक छात्र पाठ्यक्रम को समझते है तब तक परीक्षाएं आ जा रही है। एडमिशन और परीक्षा के बीच समय की कमी के कारण छात्र पाठ्यक्रम के कंटेट को पूरा नहीे कर पा रहे है। ऊपर से विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में अभी भी किताबें पुराने पैटर्न की वार्षिक परीक्षाओं के आधार पर रखी गयी है।किताबों में जोड़ी गई अतिरिक्त नई चीजें इन किताबों में मिलती ही नहीं है। छात्रों को नये पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए छात्रों को कम समय तो मिल ही रहा है। साथ ही लाइब्रेरी की किताबों से पाठ्यक्रम की चीजों को खोजने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। नये पाठ्यक्रम के पूरे टॉपिक को कवर करने के लिए छात्रों को किताबों से ज्यादा ऑनलाइन कटेंट पर निर्भर रहना पड़ रहा है। यहां उन्हें कम समय में पूरे कंटेंट मिल जा रहे है।
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लाइब्रेरी के एक कर्मचारी ने बताया कि जब से पाठ्यक्रम को बदला गया है। तभी से छात्रों का लाइब्रेरी से किताबें ले जाना कम हुआ है। किताबें पुरानी होने के कारण छात्रों को पूरा टॉपिक नहीं मिलने की शिकायत रहती है। छात्र नये जोड़े गये टॉपिक को किताबों में खोजने की कोशिश करते है। जब टॉपिक नहीं मिलता तो किताबें या तो ले नहीं जाते या वापस कर देते है।
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- नए सेमेस्टर में एडमिशन और फिर परीक्षा दोनों के बीच समय काफी कम रहता है। लाइब्रेरी की किताबों में पूरे टॉपिक मिल पाना मुश्किल रहता है। जो नई जानकारियां जोड़ी जा रहीं वह इन किताबों में नहीं रहती है।
सिद्धार्थ राय, बीएएलएलबी नवंम सेमेस्टर
- विश्वविद्याल में कोर्सों का पाठ्यक्रम बदल गया है। पर लाइब्रेरी में अभी भी नये पाठ्यक्रम की जगह पुराने पाठ्यक्रम में अनुसार किताबें उपलब्ध है। पाठ्यक्रम के साथ किताबों को भी अपडेट होना चाहिए।
निधि मौर्या, बीए तृतीय सेमेस्टर

- लाइब्रेरी से किताबें लेने पर उसमें काम की चीजें खोजने में समय ज्यादा लग जाता है। पुरानी किताबों के अधिकतर चीजें मिलती भी नहीं है। अपडेट किताबों के बाजार में मूल्य ज्यादा रहते है। लाइब्रेरी का उपयोग तभी सही होगा जब नयी किताबें हो।

विजय शंकर , एलएलबी तृतीय सेमेस्टर

- सेमेस्टर सिस्टम आने के बाद पढ़ने और समझने के लिए कम समय मिलता है।ऊपर से लाइब्रेरी में मौजूद किताबें पुराने पैटर्न की है। उन किताबों को पूरा पढ़ने के लिए समय कम होता है। पूरी किताब में दो- चार टॉपिक के अलावा कुछ नहीं मिलता है।
आकाश तिवारी, बीए तृतीय सेमेस्टर
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