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Gorakhpur News: नवजातों की पीड़ा...फोलिक एसिड की कमी से रीढ़ की हड्डी में बन रहा फोड़ा

Sun, 15 Feb 2026 02:35 AM IST
Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Sun, 15 Feb 2026 02:35 AM IST
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The suffering of newborns... abscesses forming in the spinal cord due to folic acid deficiency

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स्पाइना बिफिडा: बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में मामलों की बढ़ी संख्या

गोरखपुर। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में स्पाइना बिफिडा से पीड़ित नवजातों की संख्या लगातार बढ़ रही है। सर्जरी विभाग के डॉक्टरों के मुताबिक, हर महीने 30 से 40 बच्चों की सर्जरी करनी पड़ रही है। यह बीमारी गर्भावस्था के शुरुआती चरण में फोलिक एसिड की कमी के कारण होती है। इसमें बच्चे की रीढ़ की हड्डी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाती और कमर या पीठ के निचले हिस्से में फोड़े या थैली जैसी संरचना बन जाती है, जिसमें नसें और दिमागी द्रव बाहर आ जाते हैं।
डॉक्टर बताते हैं कि स्पाइना बिफिडा एक जन्मजात न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट है, जो गर्भ ठहरने के पहले 28 दिनों के भीतर विकसित हो जाता है। इस दौरान यदि महिला के शरीर में फोलिक एसिड की कमी हो, तो न्यूरल ट्यूब पूरी तरह बंद नहीं हो पाता। नतीजन, बच्चे की रीढ़ और नसें प्रभावित हो जाती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर संक्रमण, लकवा, पेशाब-पखाने पर नियंत्रण खत्म होना और जान का खतरा भी हो सकता है।
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केस 1
देवरिया जिले के एक गांव की रहने वाली 24 वर्षीय महिला ने बीते महीने एक बच्चे को जन्म दिया। जन्म के समय बच्चे की कमर पर गुब्बारे जैसी सूजन थी। परिजन इसे सामान्य मानते रहे। कुछ दिनों बाद बच्चे को तेज बुखार और सुस्ती होने लगी। बीआरडी मेडिकल कॉलेज में जांच के बाद पता चला कि बच्चा स्पाइना बिफिडा (मायलोमेनिंगोसील) से पीड़ित है। डॉक्टरों ने तत्काल ऑपरेशन किया। सर्जरी सफल रही। पूछताछ में सामने आया कि मां ने गर्भावस्था के शुरुआती महीनों में फोलिक एसिड की गोलियां नहीं ली थीं।
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केस 2
महाराजगंज जिले की 27 वर्षीय महिला का यह पहला गर्भ था। आर्थिक तंगी और जागरूकता की कमी के कारण उसने नियमित एएनसी (प्रसवपूर्व देखभाल) जांच नहीं कराई। प्रसव के बाद नवजात की रीढ़ के निचले हिस्से में खुला घाव दिखाई दिया, जिससे तरल पदार्थ रिस रहा था। बच्चे को गंभीर हालत में बीआरडी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। डॉक्टरों ने बताया कि यह स्पाइना बिफिडा का गंभीर रूप है। ऑपरेशन के जरिये बच्चे की जान बचा ली गई।

यह है बढ़ते मामलों की वजह
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग की डॉ. रेनू कुशवाहा का कहना है कि पूर्वांचल के ग्रामीण इलाकों में कुपोषण, कम उम्र में गर्भधारण और स्वास्थ्य सेवाओं तक सीमित पहुंच इसकी बड़ी वजह है। कई महिलाएं गर्भ ठहरने के बाद भी फोलिक एसिड और आयरन की दवाएं नियमित नहीं लेतीं। इसके अलावा जागरूकता की कमी के चलते शुरुआती जांच भी नहीं हो पाती। उन्होंने बताया कि स्पाइना बिफिडा को काफी हद तक रोका जा सकता है। गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं को गर्भ ठहरने से पहले और शुरुआती तीन महीनों में रोज फोलिक एसिड लेना चाहिए। हरी सब्जियां, दालें और पौष्टिक आहार जरूरी हैं। समय पर जांच और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ लेकर इस गंभीर बीमारी से बच्चों को बचाया जा सकता है।
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