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Gorakhpur News: आसपास के जिलों में भी फैला है फर्जी स्टांप का नेटवर्क, जांच में जुटी पुलिस

Thu, 18 Jan 2024 06:10 PM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 18 Jan 2024 06:10 PM IST
सार

10 जनवरी को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन ने शिकायत की थी। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन, गोरखपुर के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन द्वारा भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है।

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The network of fake stamps is also spread in the surrounding districts
सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : iStock

विस्तार

फर्जी स्टांप का खेल सिर्फ गोरखपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों में भी होने की आशंका है। एसआईटी की जांच में इसके संकेत मिले हैं, लेकिन पुलिस पहले तो गोरखपुर पर ही फोकस कर जांच को आगे बढ़ा रही है।
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मुख्य आरोपी रविदत्त मिश्रा मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। उससे पूछताछ के बाद पुलिस को कई जानकारियां मिलने की उम्मीद हैं, लेकिन फिलहाल वह खुद को अस्वस्थ बता रहा है। डॉक्टरों ने उसे कोई बीमारी न होने की बात कही है, लेकिन उसने खुद भर्ती होने की इच्छा जाहिर की है। वह मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में भर्ती है। एसआईटी उसके स्वास्थ्य पर नजर बनाए हुए हैं, ताकि डिस्चार्ज होते ही पूछताछ की जा सके।
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जानकारी के मुताबिक, केस दर्ज होने के बाद से पुलिस को कई तथ्य मिले हैं, जिसके आधार पर जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। नामजद केस में रविदत्त मिश्रा की भूमिका संदिग्ध पाए जाने पर पुलिस ने उसे पूछताछ के लिए मंगलवार को बुलाया था। लेकिन, पुलिस ने जैसे ही पूछताछ शुरू की, उसने खुद की तबीयत को खराब बता दिया। इसके बाद उसे नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया, जहां से मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया है। पुलिस उससे पूछताछ की तैयारी में है।
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उधर, पुलिस को अभी तक वैध वेंडरों की सूची नहीं मिल सकी है। सूची के बाद पुलिस वेंडरों का सत्यापन करेंगी। जांच कर रही एसआईटी के सदस्यों की माने तो रविदत्त मिश्रा से पूछताछ के बाद गिरोह के कई सदस्यों का चेहरा साफ हो जाएगा। उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। एएसपी मानुष पारिक ने बताया कि केस का आरोपी अभी मेडिकल कॉलेज में है। उसके स्वस्थ होने के बाद पूछताछ की जाएगी। पुलिस जांच व साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।


यह हुआ था
10 जनवरी को हुमायूंपुर दक्षिणी, दुर्गाबाड़ी रोड निवासी राजेश मोहन ने शिकायत की थी। उनका कहना है कि सहायक महानिरीक्षक निबंधन, गोरखपुर के कार्यालय में 28 फरवरी 2023 को ऑनलाइन आवेदन द्वारा भारतीय कोर्ट फीस 53 हजार का स्टांप रिफंड के लिए आवेदन किया था। अधिवक्ता की मदद से आवेदन करने पर पता चला कि स्टांप ही फर्जी है। महज तीन हजार का स्टांप सही पाया गया, बाकी 50 हजार का फर्जी था। डीएम के आदेश पर नासिक भी पत्र भेजकर इसके फर्जी होने की पुष्टि करा ली गई। इसके बाद ही पुलिस केस दर्ज कर पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है।
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