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Gorakhpur News: माफिया का फैला जाल... 15 से 25 हजार रुपये में बिकते हैं मरीज
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- आस-पास के जिलों के साथ नेपाल और बिहार के मरीजों पर रहती है माफिया की नजर
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर में मरीज माफिया का जाल लगातार फैल रहा है। जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल काॅलेज और एम्स के पास सक्रिय गिरोह के गुर्गे, मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर 15 से 25 हजार रुपये में निजी अस्पताल संचालकों को बेच रहे हैं। पुलिस और जिला प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। मरीज माफिया केवल गोरखपुर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आस-पास के जिलों और नेपाल, बिहार से आने वाले मरीजों पर भी इनकी नजर रहती है।
जुलाई 2023 में गुलरिहा पुलिस ने चिलुआताल के फतेपुर निवासी रिजवान, रियासुद्दीन, मोहम्मद अकसीम, मिर्जापुर निवासी औरंगजेब, गुलरिहा निवासी आसिफ अली उर्फ गोलू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। 20 दिसंबर को इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। पुलिस ने दावा किया था कि मेडिकल कॉलेज परिसर में सक्रिय नेटवर्क टूट गया है, लेकिन अब माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने 12 अन्य मरीज माफिया को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
डीआईजी बंगले के सामने फायरिंग और दहशत
29 जुलाई 2022 को डीआईजी बंगले के सामने हाॅस्पिटल के पास फायरिंग की घटना ने प्रशासन और नागरिकों में दहशत फैला दी। जांच में सामने आया कि यह वारदात हाॅस्पिटल माफिया के बीच चल रही आपसी रंजिश की वजह से हुई थी। मरीजों को अस्पताल भेजने के बाद कमिशन न मिलने पर एक गुट ने फायरिंग की थी।
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गिरोह का काम करने का तरीका
माफिया पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं। निजी एंबुलेंस चालकों की मदद से उन्होंने अपना गिरोह बना रखा है, जो जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कालेज में मरीजों और उनके तीमारदारों को झांसा देकर अपने नेटवर्क से जुड़े अस्पतालों में भेजता है। वहां पहुंचते ही मरीजों से जबरन वसूली की जाती है।
माफिया के निशाने पर आस-पास के जिले के मरीज
माफिया की नजर देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर और बिहार तथा नेपाल से आने वाले मरीजों पर रहती है। डीआईजी ने हाॅस्पिटल माफिया और उनके नेटवर्क से जुड़े लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन मामला कुछ ही समय में ठंडा पड़ गया। 25 अक्तूबर 2022 को निजी हॉस्पिटल के संचालक से हर माह 20 हजार रुपये रंगदारी मांगने वाले गिरोह के गुर्गों ने संचालक की पिटाई कर चेन लूट ली थी।
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अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। शहर में मरीज माफिया का जाल लगातार फैल रहा है। जिला अस्पताल, बीआरडी मेडिकल काॅलेज और एम्स के पास सक्रिय गिरोह के गुर्गे, मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर 15 से 25 हजार रुपये में निजी अस्पताल संचालकों को बेच रहे हैं। पुलिस और जिला प्रशासन की लगातार कार्रवाई के बीच माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। मरीज माफिया केवल गोरखपुर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि आस-पास के जिलों और नेपाल, बिहार से आने वाले मरीजों पर भी इनकी नजर रहती है।
जुलाई 2023 में गुलरिहा पुलिस ने चिलुआताल के फतेपुर निवासी रिजवान, रियासुद्दीन, मोहम्मद अकसीम, मिर्जापुर निवासी औरंगजेब, गुलरिहा निवासी आसिफ अली उर्फ गोलू और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की थी। 20 दिसंबर को इनके खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हुई। पुलिस ने दावा किया था कि मेडिकल कॉलेज परिसर में सक्रिय नेटवर्क टूट गया है, लेकिन अब माफिया फिर से सक्रिय हो गए हैं। इसके अलावा पुलिस ने 12 अन्य मरीज माफिया को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है।
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डीआईजी बंगले के सामने फायरिंग और दहशत
29 जुलाई 2022 को डीआईजी बंगले के सामने हाॅस्पिटल के पास फायरिंग की घटना ने प्रशासन और नागरिकों में दहशत फैला दी। जांच में सामने आया कि यह वारदात हाॅस्पिटल माफिया के बीच चल रही आपसी रंजिश की वजह से हुई थी। मरीजों को अस्पताल भेजने के बाद कमिशन न मिलने पर एक गुट ने फायरिंग की थी।
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गिरोह का काम करने का तरीका
माफिया पेशेवर तरीके से काम कर रहे हैं। निजी एंबुलेंस चालकों की मदद से उन्होंने अपना गिरोह बना रखा है, जो जिला अस्पताल और बीआरडी मेडिकल कालेज में मरीजों और उनके तीमारदारों को झांसा देकर अपने नेटवर्क से जुड़े अस्पतालों में भेजता है। वहां पहुंचते ही मरीजों से जबरन वसूली की जाती है।
माफिया के निशाने पर आस-पास के जिले के मरीज
माफिया की नजर देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बस्ती, सिद्धार्थनगर और बिहार तथा नेपाल से आने वाले मरीजों पर रहती है। डीआईजी ने हाॅस्पिटल माफिया और उनके नेटवर्क से जुड़े लोगों को चिन्हित कर कार्रवाई के आदेश दिए थे, लेकिन मामला कुछ ही समय में ठंडा पड़ गया। 25 अक्तूबर 2022 को निजी हॉस्पिटल के संचालक से हर माह 20 हजार रुपये रंगदारी मांगने वाले गिरोह के गुर्गों ने संचालक की पिटाई कर चेन लूट ली थी।