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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Gorakhpur News ›   Case registered against a businessman for sending a fake summons in the name of the ACJM court in Gorakhpur.

UP: अधिवक्ता को ही भेज दिया ACJM कोर्ट का फर्जी समन, रजिस्टर्ड लिफाफे में पहुंचा- व्यापारी नेता पर केस दर्ज

Thu, 16 Jul 2026 02:07 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर Published by: गोरखपुर ब्यूरो Updated Thu, 16 Jul 2026 02:07 AM IST
सार

अधिवक्ता ने बताया कि 25 जून को उनके आवास पर स्पीड पोस्ट के जरिये एक रजिस्टर्ड लिफाफा पहुंचा, जिस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-2, गोरखपुर की मुहर जैसी मुहर लगी थी।
लिफाफे पर उनके पते के साथ एक मोबाइल नंबर भी अंकित था। बताया कि संदेह होने पर उन्होंने उस मोबाइल नंबर पर संपर्क किया लेकिन फोन रिसीव करने वाले व्यक्ति ने इस प्रकरण से किसी भी तरह का संबंध होने से इन्कार करते हुए कहा कि उसके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग किया गया है।

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Case registered against a businessman for sending a fake summons in the name of the ACJM court in Gorakhpur.
एफआईआर। (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क

विस्तार

अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (एसीजेएम) कोर्ट नंबर-2 के नाम से फर्जी समन भेजने का गंभीर मामला सामने आया है। कैंट पुलिस ने अधिवक्ता की तहरीर पर व्यापारी नेता नवल किशोर नथानी, उनकी पत्नी किरण देवी, खुद को कर्मचारी बताने वाले एक आरोपी समेत अन्य के खिलाफ जालसाजी, कूटरचना, आपराधिक साजिश आदि धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।

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रामगढ़ताल क्षेत्र के पॉम पैराडाइज निवासी अधिवक्ता सुरेश कुमार रामरायका ने तहरीर में बताया कि वह वर्षों से दीवानी न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। 25 जून को उनके आवास पर स्पीड पोस्ट के जरिये एक रजिस्टर्ड लिफाफा पहुंचा, जिस पर अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट नंबर-2, गोरखपुर की मुहर जैसी मुहर लगी थी।

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लिफाफे पर उनके पते के साथ एक मोबाइल नंबर भी अंकित था। अधिवक्ता ने बताया कि संदेह होने पर उन्होंने उस मोबाइल नंबर पर संपर्क किया लेकिन फोन रिसीव करने वाले व्यक्ति ने इस प्रकरण से किसी भी तरह का संबंध होने से इन्कार करते हुए कहा कि उसके मोबाइल नंबर का दुरुपयोग किया गया है।

इसके बाद उन्होंने लिफाफा खोलने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई। लिफाफे में मिले दस्तावेज न्यायालयी समन जैसे दिखाई दिए। दस्तावेजों की सत्यता की पुष्टि के लिए जब वह दीवानी न्यायालय पहुंचे तो पता चला कि संबंधित स्पीड पोस्ट और समन न्यायालय की ओर से जारी ही नहीं किए गए थे।
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इससे मामला फर्जी दस्तावेज तैयार कर भेजने का निकला। तहरीर में अधिवक्ता ने आरोप लगाया है कि व्यापारी नेता नवल किशोर नथानी और उनकी पत्नी किरण देवी से उनकी पुरानी मुकदमेबाजी चल रही है।

इसी रंजिश के चलते दोनों ने अन्य लोगों के साथ मिलकर न्यायालय की फर्जी मुहर और कूटरचित दस्तावेज तैयार कर स्पीड पोस्ट के माध्यम से उन्हें भेजे, ताकि उन्हें भ्रमित कर अवैध लाभ हासिल किया जा सके।
पीड़ित ने आशंका जताई है कि पूरे प्रकरण में न्यायालय के किसी कर्मचारी या अन्य व्यक्ति की मिलीभगत भी हो सकती है।

उन्होंने पुलिस से न्यायालय की कथित फर्जी मुहर और दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच कराने, स्पीड पोस्ट से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड, मोबाइल नंबरों और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित कर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि अधिवक्ता की तहरीर पर कैंट पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर पूरे प्रकरण की विवेचना शुरू कर दी है।
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